अंधविश्वास में दो माह के बच्चे की मौत

जागरूक टाइम्स 36 May 24, 2018
भीलवाड़ा (जोधपुर)। दो माह के बच्चे को निमोनिया होने पर उसकी मां व पिता की बुआ शनिवार सुबह उसे गांव के डाक्टर को दिखाने जा रही थी। रास्ते में चौराहे पर मिले एक भील जाति के व्यक्ति ने दोनों को रोका तथा रूई में आग लगा बालक के पेट से कुछ ऊपर डांव लगा दिया। अबोध बालक की सेहत सुधरने के बजाय बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर दोपहर में माता-पिता व काका उसे जिला अस्पताल लाए, जहां गंभीर हालत में उसे चिल्ड्रन वार्ड में भर्ती किया गया। करीब ढाई घंटे उपचार के बाद उसने दम तोड़ दिया। नाथू नाथ के दो माह के बेटे दिनेश को दो-तीन दिन से निमोनिया व खांसी हो रही थी। तबीयत में सुधार नहीं हुआ तो शनिवार सुबह पिता नाथू नाथ ने पत्नी सुरजा व खामणिया गांव की बुआ सिणगार को उसे धामणिया गांव डॉक्टर को दिखाने भेजा था। >> अंधविश्वास के फेर में घटना बालक के पिता नाथू नाथ का कहना हैं कि वह सुबह रेत भराने के लिए चला गया। जाने से पहले उसने पत्नी सुरजा व बुआ सिणगार से कहा कि दिनेश को दोनों धामणिया के डॉक्टर को दिखा आना, लेकिन उन्हें रास्ते में मिले किसी व्यक्ति ने रोका तथा रूई से डांव लगा दिया। मां सुरजा का कहा कि वह उसे नहीं जानती, लेकिन उसकी बुआ सास उसे पहचानती होगी। डांव लगने से और बिगड़ी हालत अबोध बालक दिनेश का उपचार करने वाले डा. शिशु रोग विशेषज्ञ हाशम खान का कहना हैं कि बच्चा गंभीर निमोनिया संक्रमण रोग से ग्रस्त था। दागने से उसकी हालत और बिगड़ गई। सांस लेने में तकलीफ होने पर उसे ऑक्सीजन पर लेकर उपचार किया जा रहा था। दो साल में 15 बच्चों को डांव लगाया बाल कल्याण समिति अध्यक्ष डा. सुमन त्रिवेदी का कहना हैं कि जिले में निमोनिया की शिकायत पर दागने की घटनाएं थम नहीं रही हैं। इससे पूर्व 19 मार्च को कारोई थाना क्षेत्र में भी चार माह की मासूम बच्ची को निमोनिया होने पर दागा गया था। दो साल में डांव लगाने से करीब 15 बच्चों की हालत बिगडऩे के मामले एमजी अस्पताल में आए। एक बालिका व दो बालकों की मौत हो चुकी है। शेष की तबीयत में सुधार हुआ है। लोगों को जागरूक करने की जरूरत है।

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