अनुत्पादक योजनाएं बनी विकास में रोडा

जागरूक टाइम्स 68 Jan 12, 2019

जैसलमेर : जिले के आर्थिक विकास को देखते हुए कई योजनाओं की अनुपयोगिता उजागर होने के बावजूद आज तक कोई सकारात्मक कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। सरहदी जैसलमेर जिले की करीब 38 हजार वर्ग किमी राजस्व भूमि व कम आबादी होने के कारण विभिन्न योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए यहां अपार संभावनाएं है, लेकिन यहां ऐसी कई योजनाएं भी है, जो न केवल अनुत्पादक है, बल्कि विकास के लिहाज से भी बाधक बनी हुई है।

जैसलमेर व बाडमेर जिले के 3162 वर्ग किमी में वर्ष 1981 से वन्य जीव अभ्यारण्य चलाया जा रहा है। हकीकत यह है कि इस क्षेत्र में बसे आबाद गांव व ढाणियों का न केवल विकास रूक गया, बल्कि इंदिरा गांधी नहर परियोजना के पूरा होने में भी यह अभ्यारण्य बाधक बना हुआ है। इस अभ्यारण्य को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करने का जो उद्वेष्य था, वह आज तक पूरा नहीं हुआ है। इसके अलावा किसी विषेष वन्य जीवों का संरक्षण भी नहीं हुआ है।

सुरक्षा विभाग की ओर से जिले के शाहगढ क्षेत्र में 60 गुणा 40 वर्ग किमी क्षेत्र में मैनुवल रेंज के प्रस्ताव है। इस क्षेत्र में गैस के अथाह भण्डार है। ओएनजीसी को अन्वेषण व उत्पादन के लिए यह जगह लीज पर दी हुई है। इस क्षेत्र के गैस कुएं के आधार पर रामगढ गैस आधारित विधुत उत्पादन का विस्तार किया जा रहा है।

गौरतलब है कि इस क्षेत्र में इन्दिरा गांधी नहर की 4 लाख बीघा भूमि सिंचित है, जिसमें माइनर्स व खाले तक बने हुए है। ऐसे में हजारों भूमिहीन काष्तकारों को सिंचित भूमि आवंटित करने में मैनुवल रेंज का प्रस्ताव बाधक रोडा बना हुआ है।
पवन उर्जा व सौर उर्जा संयंत्रों को स्थापित करने की यहां अपार संभावनाएं है। उच्च श्रेणी का लाइम स्टोन उपलब्ध होने से सीमेंट उत्पादन इकाइयों के विकसित होने की संभावनाए है, । सीमांत क्षेत्र में इंदिरा गांधी नहर का सिंचित क्षेत्र में विकास की यहां अपार संभावनाएं है ।

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