पानी नहीं बरसने से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर संकट के बादल

जागरूक टाइम्स 110 Sep 14, 2018

- जसवंत सागर बांध में नहीं आया पानी, रह गया सूखा

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

बारिश कम होने से जोधपुर जिले का सबसे बड़ा जसवंत सागर बांध इस बार सूखा ही रह गया। पहले अच्छी बारिश हुई तो एनिकट व बांध के पेटे में बने अवैध कुओं को सीमेंटेड कर दिया। ताकि बांध में पानी आए तो लंबे समय तक ठहरा रहे लेकिन इस बार पानी बरसा ही नहीं। बांध में बने गड्ढे भी पूरी तरह नहीं भर पाए हैं। इससे पूरे क्षेत्र में चिंता की लहर है।

जसवंत सागर बांध क्षेत्र के हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार माना जाता है तथा इसके लबालब भरने एवं चादर चलने के बाद तो क्षेत्र के पचास-पचास कोस के कुंओं का जलस्तर ऊंचा आ जाता है और चारों और हरियाली तथा खेतों में भरपूर मात्रा में फसलें लहलहाने लगती है लेकिन इस वर्ष भी यह बांध खाली रह गया, यहां तक कि क्षेत्र के अन्य छोटे बड़े बांध, चौतीस एनिकट एवं दर्जनों खडीनों में भी पानी नहीं आया।

वर्ष 2007 में बांध की एक पाळ टूटने एवं पाळ की मरम्मत के बाद अब तक के आठ वर्षो में एक बार भी यह बांध नहीं तो भरा और कभी मामूली पानी आया भी तो बांध में खुदे नलकूपों के माध्यम से यह जल राशि भूमिगत हो गई। पहले बांध में पानी भरता था तो कई-कई महीनों तक बांध में पानी ठहरता। सिंचाई विभाग इस जल राशि को बांध के कमांड क्षेत्र के तेरह गांवों के किसानों को खेती के लिए पानी छोड़ता रहा है। सिंचाई विभाग को भी आमदनी होती तथा किसानों को भी कम खर्च में अच्छी उपज मिलती। जसवंत सागर बांध के अलावा क्षेत्र के छोटे-बांध जिनमें ओलवी बांध, पटेलनगर, बरना, रामासनी के दो, रणसीगांव बांध के अलावा विभिन्न चौबीस एनिकट एवं दर्जनों खड़ीन भी है। ये सभी बांध एवं एनिकट भी कम बारिश के कारण खाली पड़े हैं।

कुंओं को किया सीमेंटेड 

उच्च न्यायालय के फैसले के बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने बांध के पेटे में खुदे दर्जनों कुंओं को सीमेंटेड करते हुए बंद कर दिया था। विद्युत विभाग ने भी इन काश्तकारों को दिए कनेक्शन काट लिए, ताकि पानी का दोहन न कर से। यहां पुष्कर के नाग पहाड़ तथा क्षेत्र की नौ नदियों एवं 99 बालों का पानी पहुंचता है, लेकिन उस क्षेत्र में बारिश कम हुई तो बांध में पानी ही नहीं आया।

राजलाव तालाब खाली

आईपंथ के धर्मगुरु एवं सांतवें दीवान राजोलावसिंह ने यहां कस्बे में राजलाव तालाब की खुदाई करवाई थी। ताकि इस तालाब के भरने के साथ ही कस्बे में खुदे कुंओं का जलस्तर ऊपर आए, लेकिन रायपुर बांध में पानी नहीं आने तथा चादर नहीं चलने को लेकर चौपड़ा फीडर नहर में नाम मात्र का पानी ही नहीं आया। चौपड़ा फीडर नहर के चलने के साथ ही राजलाव तालाब का उद्गम होता है, इस नहर से जुड़़ी लिंक नहर से पानी तालाब में पहुंचता है।

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