निलंबित आईएएस निर्मला मीणा को मिली हाईकोर्ट से जमानत

जागरूक टाइम्स 184 Jul 18, 2018

- एसीबी ने पेश की थी करीब दो हजार पेजों की चार्जशीट, एक दिन बाद ही मिली राहत

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

जिला रसद विभाग से करीब आठ करोड़ रुपए का पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं का अतिरिक्त आवंटन कर गबन करने के मामले में जेल में बंद निलम्बित आईएएस व तत्कालीन जिला रसद अधिकारी निर्मला मीणा को राजस्थान हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। हाईकोर्ट ने जमानत अर्जी को मंजूर करते हुए मुचलकों व गारंटी पर रिहा करने के आदेश दिए। इसके साथ ही आरोपी ठेकेदार सुरेश उपाध्याय को भी हाईकोर्ट से राहत मिली है। उसके जमानत आवेदन को भी मंजूर कर लिया गया है। मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने एसीबी की विशेष अदालत में एक दिन पहले ही चार्जशीट पेश की थी, जो करीब दो हजार पन्नों की बताई गई है। चार्जशीट में निलम्बित आईएएस व तत्कालीन जिला रसद अधिकारी निर्मला मीणा, गेहूं सप्लाई ठेकेदार सुरेश उपाध्याय और आटा मील मालिक स्वरूपसिंह राजपुरोहित सहित कुछ अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

करोड़ों रुपए के गेहूं घोटाले में गिरफ्तार निलंबित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा को बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट से राहत मिली है। निर्मला मीणा ने मई में एसीबी के समक्ष सरेंडर किया था। उसके बाद से वे जेल में बंद है। पूर्व जिला रसद अधिकारी आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा की तरफ से अधिवक्ता महेश बोड़ा व निशांत बोड़ा ने हाईकोर्ट के न्यायाधीश विजय विश्नोई के समक्ष याचिका पेश कर जमानत देने का आग्रह किया। उन्होंने तर्क दिया कि मामले में एसीबी कोर्ट में चार्जशीट पेश कर चुकी है। मुकदमे की ट्रायल लंबी चलेगी। ऐसे में मीणा को जमानत पर रिहा किया जाए। सरकार की ओर से पैरवी करते हुए उप राजकीय अधिवक्ता विक्रमसिंह राजपुरोहित ने जमानत का विरोध किया। न्यायाधीश विश्नोई ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद 50 हजार रुपए के मुचलके पर जमानत याचिका स्वीकार कर ली। गौरतलब है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान तीन बार मीणा के जमानत आवेदन पर सुनवाई हुई। अवकाशकालीन न्यायाधीश विनीत माथुर व न्यायाधीश पुष्पेन्द्रसिंह भाटी की ओर से सुनवाई से इनकार किए जाने के बाद जुलाई के प्रथम सप्ताह में जस्टिस विश्नोई की पीठ में जमानत आवेदन की सुनवाई हुई। इसमें उन्होंने एसीबी से 18 जुलाई या इससे पहले मीणा के खिलाफ चार्जशीट पेश करने के निर्देश दिए थे।

एक दिन बाद मिली जमानत

इधर करीब तैंतीस हजार क्विंटल गेहूं के गबन के मामले में निलम्बित आईएएस अधिकारी निर्मला मीणा, गेहूं सप्लाई ठेकेदार सुरेश उपाध्याय और आटा मील मालिक स्वरूपसिंह राजपुरोहित की गिरफ्तारी और जांच के बाद एसीबी ने मंगलवार को अदालत में चार्जशीट पेश कर दी थी। चार्जशीट पेश करने के एक दिन बाद ही निर्मला मीणा को जमानत मिल गई। चार्जशीट में बताया गया है कि तत्कालीन डीएसओ निर्मला मीणा पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में लगभग पैंतीस हजार क्विंटल गेहूं गलत तरीके से वितरित किया गया था। एसीबी ने जांच में पाया कि डीएसओ मीणा ने सिर्फ मार्च 2016 में 33 हजार नए परिवार जोड़े और उच्चाधिकारियों को स्वयं की ओर से प्रेषित रिपोर्ट में अंकित कर 35 हजार 20 क्विंटल गेहूं अतिरिक्त मंगवा लिया। नए परिवारों को ऑनलाइन नहीं किया गया। फिर मीणा ने 8 करोड़ रुपए का अतिरिक्त गेहूं का आवंटन करवा लिया। आरोप है कि उन्होंने गेहूं ठेकेदार सुरेश उपाध्याय व स्वरूप सिंह राजपुरोहित की आटा मिल भिजवा दिया था।

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