सात करोड़ के टेंडर निरस्त, 24 वार्डों में विधानसभा चुनाव के बाद ही सुधर पाएगी सड़कें

जागरूक टाइम्स 144 Aug 8, 2018

- जेडीए से डी-बार ठेका फर्म के 7 करोड़ के टेंडर निरस्त, महापौर के जांच कमेटी गठित करते ही टेंडर निरस्त के ऑर्डर निकाले

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

जेडीए से डी-बार हुई ठेका फर्म मातेश्वरी कंस्ट्रक्शन कंपनी के नगर निगम में लिए 7 करोड़ लागत के ई-टेंडर को निरस्त कर नए सिरे से प्रक्रिया शुरू की गई है। शपथ-पत्र में जेडीए से तीन साल के लिए डी-बार हुई ठेका फर्म के निगम में टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेते समय जानकारी छिपाने के मामले की जांच के लिए महापौर घनश्याम ओझा ने जांच कमेटी गठित की थी। महापौर ने कमेटी को ठेका फर्म का पक्ष सुनते हुए सात दिन में रिपोर्ट भी मांगी थी, लेकिन कमेटी गठित होते ही निगम प्रशासन ने उक्त ठेका फर्म के उठाए सात करोड़ विकास कार्यों के ई-टेंडर निरस्त कर नए सिरे से टेंडर निकालने का फरमान जारी कर दिया। 


निगम के इस फैसले से अब तीनों विधानसभा क्षेत्र के करीब 24 वार्डों में टूटी सड़कों की मरम्मत व क्षतिग्रस्त सीवर लाइनों की मरम्मत का काम विधानसभा चुनावों के बाद ही संभव हो पाएगा। ऐसे में चुनावों में भाजपा बोर्ड को लोगों के विरोध का भी सामना करना पड़ सकता है। सात करोड़ के निरस्त हुए विकास कार्यों में वार्ड 1, 12, 13, 14, 15, 16 व 65 में सीसी रोड व सीवर लाइन के काम के अलावा सड़क मरम्मत व सुदृढ़ीकरण के कार्य शामिल थे। इसी प्रकार वार्ड 32 से 38, 47 व 48 में सीसी रोड व वार्ड 45, 51, 53, 55, 56, 59, 60 व 54 में सीसी रोड व निकासी के काम शामिल थे। 

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एक्ट में स्पष्ट उल्लेख नहीं 

नगरपालिका अधिनियम में किसी एक सरकारी संस्थान से डी-बार हुई ठेका फर्म के किसी अन्य निकाय या विभाग में टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले पाने का हक खोने का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है। तीन साल के लिए डी-बार हुई ठेका फर्म सिर्फ जेडीए में टेंडर प्रक्रिया से बाहर होगी या किसी अन्य संस्थान व निकाय में भी हिस्सा नहीं ले पाएगी, के सवाल पर निगम अफसरों का कहना है कि टेंडर के लिए बनाए नियमों में इसे शामिल किया गया है। 

यह कहना है पार्षदों का

जिन वार्डों के काम निरस्त किए गए हैं, उन वार्डों के पार्षदों का कहना है कि निगम ने जो काम निरस्त किए है उसके लिए अल्पकालीन निविदाएं निकाली जाए। पार्षदों का कहना है कि अब अगर दुबारा टेंडर लगते हैं तो कब खुलेंगे और कब वर्कऑर्डर जारी होंगे। फिर ठेका फर्म काम शुरू करेगी या नहीं? इसलिए निगम को अल्पकालीन निविदाएं लगानी चाहिए ताकि चुनाव के पहले तक काम शुरू हो सकें।

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