पत्नी की हत्या के आरोपी को आजीवन कारावास की सजा

जागरूक टाइम्स 509 Nov 17, 2018

- हाईकोर्ट ने सरकार की अपील को 27 साल बाद किया मंजूर

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान हाईकोर्ट खंडपीठ ने पत्नी के हत्या के आरोपी पति को ट्रायल कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के खिलाफ सरकार की अपील को 27 साल बाद मंजूर करते हुए उसे आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिए है। 

जस्टिस निर्मलजीत कौर व जस्टिस विनीत कुमार माथुर की खंडपीठ ने राज्य सरकार की अपील को मंजूर करते हुए आरोपी पति शिवराम को आजीवन कारावास की सजा के आदेश दिए है। हाईकोर्ट में उपराजकीय अधिवक्ता चन्द्रशेखर ओझा ने पैरवी करते हुए बताया कि आरोपी शिवराम ने अपनी पत्नी बीना को 30 नवम्बर 1988 को जला दिया था और उपचार के दौरान 19 दिसम्बर 1988 को बीना की मौत हो गई। सदर बाजार थाने में आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर शिवराम के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश किया गया। ट्रायल के बाद जिला एवं सेशन न्यायालय जोधपुर द्वारा दो नवम्बर 1991 को आरोपी शिवराम को बरी कर दिया था। जिला न्यायालय द्वारा आरोपी शिवराम को बरी किए जाने पर राज्य सरकार की ओर से राजस्थान हाईकोर्ट में अपील पेश की गई। करीब 27 साल तक अपील पर सुनवाई के बाद आखिरकार ट्रायल कोर्ट के फैसले को बदलते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए शिवराम को आजीवन कारावास की सजा के आदेश पारित करते हुए जेल भेजने का आदेश दिया है।

विद्युत विभाग में तकनीकी सहायक भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका में अहम आदेश

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट जस्टिस केएस अहलूवालिया ने विद्युत विभाग में तकनीकी सहायक भर्ती को चुनौती देने वाली याचिका में अहम आदेश दिया है। जस्टिस ने जेवीवीएनएल को 15 दिन में इस आशय का विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए है कि पहले से चयनित अभ्यर्थियों के चयन को चुनौती दी गई है। वही उनका चयन इस याचिका के अधीन रखा गया है। चयनित अभ्यर्थी इस मामले में कोर्ट में अपना पक्ष रख सकेगा। कोर्ट ने रजिस्ट्रार न्यायिक से इस याचिका व इसके लिए विभाग के जवाब को हाईकोर्ट के अधिकृत वेबसाइट पर अपलोड करने को भी कहा है। इससे अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने में मदद मिलेगी। कोर्ट ने यह आदेश जितेंद्र व 14 अन्य की ओर से दायर याचिका की सुनवाई में दिए।

याचिकाकतार्ओं की ओर से अधिवक्ता भवानीसिंह तंवर व ओमप्रकाश ने पक्ष रखा है। हाईकोर्ट ने याचिका की अगली सुनवाई 10 जनवरी 2019 को होगी। अधिवक्ता तंवर ने बताया कि जेवीवीएनएल द्वारा मनमाने तरीके से भर्ती प्रक्रिया के नियमो की अवहेलना की गई तथा विज्ञप्ति की शर्तो के विपरित व अभ्यर्थियों को 18 तरह के अलग अलग प्रश्न पत्र हल करने के दिए गए । उनका एक परिणाम निकाल कर एक सम्मिलित मैरिट सूची बना दी गई जो कि भर्ती प्रक्रिया के मूल सिद्धान्तों के खिलाफ है।

चितौडग़ढ़ के खानधारकों की अर्जी मंजूर

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट खंडपीठ में चितौडग़ढ़ क्षेत्र में माइनिंग के बाद स्लरी डंपिंग की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

सीजे प्रदीप नन्द्राजोग व जस्टिस पीएस भाटी की खंडपीठ में मामले से सम्बंधित खान धारकों ने अप्रार्थी पक्षकार बनाने की अर्जी पेश की। हाईकोर्ट ने अर्जी को स्वीकार कर लिया है। याचिकाकर्ता लीला शंकर सिंह की ओर से अधिवक्ता राजवेंद्र सारस्वत ने आवेदनों पर जवाब देने के लिए हाईकोर्ट से समय मांगा। जिस पर खंडपीठ ने चार सप्ताह बाद सुनवाई के आदेश दिए है।

एमडीएसयू के कुलपति की नियुक्ति पर रोक बढ़ाई

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट खंडपीठ में अजमेर के एमडीएसयू के नवनियुक्त वीसी आरपी सिंह की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता द्वारा कोर्ट से समय मांगे जाने पर कोर्ट ने 28 नवम्बर तक का समय दिया है। तब तक आरपी सिंह की वीसी के रूप में कार्य करने पर अंतरिम रोक जारी रहेगी।

सीजे प्रदीप नन्दराजोग व डॉ जस्टिस पीएस भाटी की खंण्ड पीठ ने मामले की सुनवाई 28 नवम्बर को करने आदेश दिए है। याचिकाकर्ता लक्ष्मीनारायण बैरवा की याचिका में समय देने से पहले सीजे ने खंण्डपीठ में मौजूद राज्य सरकार के महाधिवक्ता एनएम लोढा से पूछा कि आपने एेसे व्यक्ति को कैसे वीसी बना दिया। इसका कोई जवाब नहीं दिए जाने पर याचिकाकर्ता को 28 नवम्बर तक का समय दिया गया है। अब इस मामले में 28 नवम्बर को सुनवाई होगी।

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