महापौर ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप, आरोपों के खिलाफ एकजुट हुए निगमकर्मी

जागरूक टाइम्स 104 Jun 28, 2018

- एसीबी को पत्र लिखने का मामला

- निगमकर्मियों ने बैठक कर अवैध निर्माणों को सीज करने का लिया फैसला

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

महापौर घनश्याम ओझा की ओर से भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को पत्र लिखकर नगर निगम में भ्रष्टाचार व्याप्त होने का खुलासा करने के बाद बवाल मच गया है। महापौर द्वारा निगम कर्मचारियों पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब देने के लिए उन्होंने एक बैठक की और अवैध व नियम विरूद्ध निर्माणों को सीज करने का फैसला लिया। 

दरअसल, महापौर घनश्याम ओझा शहर में व्याप्त अतिक्रमण और अवैध निर्माणों को लेकर यू नोट और कार्यालय आदेश जारी करने के बाद भी उनकी पालना नहीं होने से से काफी परेशान चल रहे थे। हाल ही में उन्होंने इस संंबंध में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को एक पत्र भी लिखा, जिसमें उन्होंने खुलासा किया कि बिना लेनदेन के निगम में कोई काम नहीं होता और इस कारण जहां जनता परेशान हो रही है वहीं जन प्रतिनिधि बेलगाम हो रहे हैं। निगम में भ्रष्टाचार फैलता जा रहा है। इस पत्र का खुलासा होने के बाद निगम कर्मचारी भी एकजुट हो गए और अपने ऊपर लगाए आरोपों को लेकर काफी आक्रोशित हुए। इस घटनाक्रम के बाद नगर निगम में कार्यरत कर्मचारियों की विभिन्न संगठनों और यूनियन के पदाधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर और बाद में संयुक्त रूप से मीटिंग भी की। 

जनप्रतिनिधि नहीं करते देते सीज कार्यवाही

कर्मचारी संगठनों ने बताया कि अवैध निर्माण और अतिक्रमणों को लेकर हर बार निगम के कर्मचारियों पर ही जिम्मेदारी आंकी जाती है, जबकि वास्तविकता यह है कि जब निगम कर्मचारी नियम विरुद्ध निर्माण को रोकने या अतिक्रमण को हटाने जाते हैं तो कोई न कोई जनप्रतिनिधि उनके पक्ष में आ जाता है और कर्मचारियों के खिलाफ ही कार्यवाही करता है। इसको लेकर अब बैठक में कर्मचारियों ने ऐसे अवैध निर्माण और अतिक्रमणों के खिलाफ कार्यवाही करने का मानस बनाया।

एसीबी को पत्र में यह कहा था महापौर ने

महापौर ओझा ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को लिखे पत्र में नगर निगम तथा कार्मिकों की कार्य प्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने लिखा कि पूरे शहर में निर्माण कार्य हो रहे हैं। हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में आवासीय मकानों में अवैध रूप से वाणिज्यिक गतिविधियां बिना किसी की इजाजत से चल रही हैं। नगर निगम में बिना पैसे दिए कोई कामकाज नहीं होता है। ऐसा टॉप से बॉटम तक हो रहा है। हाउसिंग बोर्ड के सैकड़ों मकानों में बिना इजाजत कमर्शियल निर्माण हो रहे हं,ै जबकि निगम तो एकल खिड़की से टाइप डिजाइन की अनुमति देता है। बिना कर्मचारी-अफसरों की मिलीभगत यह संभव नहीं है। इसलिए जांच की जाए। महापौर की शिकायत पर एसीबी मुख्यालय ने परिवाद दर्ज कर लिया है। अब ब्यूरो की स्पेशल यूनिट ने निगम-हाउसिंग बोर्ड से जवाब-तलब भी शुरू कर दिया है। निगम ने दो हजार मकानों की सूची दी है, जिन्हें निर्माण की अनुमति दी थी। एसीबी वहां हुए कमर्शियल निर्माण की जांच कर अफसर-कर्मचारियों के भ्रष्टाचार की पोल खोलेगी।

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