जैसलमेर के हाॅस्पीटल का हाल बडा बेहाल

जागरूक टाइम्स 292 Jun 12, 2019

जैसलमेर : जैसलमेर के जवाहर अस्पताल की सफाई व्यवस्था के लिए जिम्मेदारों की ओर से भले ही सालाना आठ से दस लाख रूपए खर्च किए जा रहे हो, लेकिन यहां की सफाई व्यवस्था बदहाल है। यहां उपचार के लिए आने वाले रोगियों व उनके परिजनों के सांस लेना भी मुष्किल है। अस्पताल के वार्डो में बने शौचालय सफाई के अभाव में दुर्गंध मार रहे है।

जिला मुख्यालय स्थित जवाहर अस्पताल में गंभीर बीमारी से ग्रसित रोगियों व प्रसव के लिए भर्ती हो रही गर्भवती महिलाओं के लिए जवाहर अस्पताल सजा बन गया है। एक तो बीमारी का दंष और दूसरा वार्डो में फैली दुर्गन्ध यहां आने वालो के लिए भारी पड रही है। जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में सुविधाएं सामान्य अस्पताल जैसी भी नहीं है। स्वस्थ होने के लिए भर्ती रोगियों के साथ आए रिष्तेदार ही बीमार पडने लगे है।

शौचालयों की सफाई नहीं होने से यहां आने वाले रोगियों, प्रसूताओं व नवजात बच्चों में संक्रमण फैलने का खतरा मंडरा रहा है। भर्ती मरीजों के साथ आए रिष्तेदारों में भी साफ-सफाई के अभाव में संक्रामक रोग फैल रहे है। अस्पताल में उपचार करवाना रोगियों व प्रसूताओं के लिए किसी अभिषाप से कम नहीं है।
प्रसूता वार्ड के शौचालय साफ-सफाई के अभाव में डटे हुए होने से पानी से भरे पडे है। इससे प्रसूताएं व उनके साथ आने वाली दूसरी महिलाओं ने काॅटेज वार्ड को ही शौचालय बना दिया।

जिसकी सफाई नहीं होने से शौच की दुर्गंध से प्रसूता वार्ड व परिसर में खडा होना भी मुष्किल हो रहा है। अस्पताल में पूर्व में निर्मित शौचालयों का लेवल सही नहीं होने से समस्या आ रही है। नए शौचालय बनाने का कार्य मार्च महीने में शुरू भी करवाया था, लेकिन ठेकेदार खुदाई कर भाग गया, इससे नए शौचालय बनाने का कार्य शुरू होने से पहले ही ठप हो गया।

अस्पताल में नए शौचालयों का निर्माण करने के लिए नगरपरिषद की ओर से 40 लाख में ठेका दिया था, लेकिन ठेकेदार ने काम शुरू करने के कुछ दिन बाद ही काम छोड कर चला गया और अब तक काम करने के लिए नहीं लौटा। इससे भी जिम्मेदारों की दुविधा बढ गई है। अस्पताल की आपातकालीन यूनिट में बने चार शौचालयों को मेडिकल सामान रखने का स्टोर बना दिया।

जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए चिकित्सकों के 48 पदों में से 29 पद रिक्त चल रहे है, जिसमें रोगियों को सभी सुविधाएं नहीं मिल पा रही। अस्पताल में निःषुल्क दवा, जांच व जननी सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं लागू होने के बावजूद भी चिकित्सकों के अभाव में ये योजनाएं परवान नहीं चढ पा रही है।

जिले में वरिष्ठ विषेषज्ञ अस्थि का एक, षिषु का एक, औषधि का एक, कनिष्ठ विषेषज्ञ शल्य के दो, अस्थि का एक, नेत्र का एक, चर्म व रति का एक, विधि विज्ञान एक, दंत, ईएनटी, निष्चेतन एक, मनोरोग एक, चिकित्सा अधिकारी पीजी के आठ, चिकित्सा अधिकारी के आठ कुल 29 पद रिक्त चल रहे है।

वर्तमान में वरिष्ठ विषेषज्ञ शल्य, स्त्री-रोग, नेत्र विषेषज्ञ के एक-एक चिकित्सक कार्यरत है। इनके अलावा कनिष्ठ विषेषज्ञा शल्य, षिषु, स्त्री रोग, औषधि, रेडियोलोजी, पैथोलोजी, निष्चेतन के एक-एक चिकित्सक कार्य कर रहे है। अस्पताल में दो वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी, चिकित्सा अधिकारी, एक दंत चिकित्सा अधिकारी व एक औषधी नियंत्र अधिकारी कुल 19 चिकित्साधिकारी कार्य कर रहे है।

अस्पताल में सामान्य बीमारी के उपचार के लिए पांच चिकित्सक नियुक्त है। इनमें से चार चिकित्सक आपातकालीन यूनिट में दिन रात की ड्यूटी पर रहते है और एक चिकित्सक के भरोसे अस्पताल का आउटडोर रहता है। एक चिकित्सक दंत व एक महिलाओं के रोगों का उपचार करती है। चिकित्सक भी एक है, जिनमें से दो से तीन चिकित्सक साप्ताहिक अवकाष पर रहते है। आउटडोर में चिकित्सकीय व्यवस्थाएं चिकित्सकों के अभाव में लडखडाएं हुई है। अस्पताल में नर्सिंग कर्मियों के 120 पद स्वीकृत है, जिनमें से 59 पद लंबे समय से रिक्त चल रहे है। इससे भी रोगियों के उपचार में परेषानियों का सामना करना पडता है।

जिला मुख्यालय स्थित जवाहर अस्पताल के वार्डो व आॅपरेषन थियेटर की सफाई व्यवस्था एक स्वीपर के भरोसे होने से भी दिक्कतों का सामना करना पडता है। एक स्वीपर के भरोसे इतने बडे अस्पताल की सफाई नहीं हो पाने से समस्या आ रही है। जिले के सबसे बडे चिकित्सालय में सफाई व्यवस्था को लेकर उदासीनता बरती जा रही है। जिम्मेदारों ने सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखने के लिए आठ लाख रूपए की सालाना खर्च का ठेका दिया है, लेकिन ठेकेदार की ओर से लगाए गए सफाईकर्मी दिन में एक बार सफाई कर वहां से चले जाते है। ऐसे में राषि खर्च करने के बाद भी सफाई की व्यवस्था राम भरोसे ही है।



Leave a comment