नहरों की मिट्टी बनी पानी की आवक में बाधा

जागरूक टाइम्स 135 Apr 23, 2019

जैसलमेर : मोहनगढ के नहरी क्षेत्र में इन दिनों रबी की फसलों की बिजाई का दौर शुरू हो गया है, लेकिन नहर विभाग की उदासीनता के चलते नहरों से रेत नहीं निकालने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पूरा पानी नहीं मिल रहा है। नहरों में भरी मिट्टी पानी को आगे बढने ही नहीं दे रही। नहरों के अंतिम छोर पर बैठे किसानों को बिल्कुल ही पानी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान परेषान व चिन्तित नजर आ रहे है।

किसानों द्वारा समय समय पर नहर विभाग के उच्च अधिकारियों को इस संबंध में सूचना भी दी गई। उसके बावजूद कोई कार्यवाहीं नहीं की जा रही है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड रहा है। नहरों से मिट्टी नहीं निकलने के कारण किसानों के अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

मोहनगढ के नहरी क्षेत्र में गर्मी के मौसम में चली आंधियों व पानी में आ रही मिट्टी की वजह से नहरों में मिट्टी का जमाव है। हर साल नहर विभाग की ओर से ठेके देकर यह मिट्टी निकलवाई जाती है। इस बार कई स्थानों पर तो नहर विभाग ने ठेके भी नहीं किए। कई स्थानों पर ठेके होने के बावजूद अभी तक नहरों से ठेकेदारों की ओर से मिट्टी व रेत नहीं निकलवाई गई है।

जिसकी वजह से किसानों को सिंचाई के लिए पूरा पानी नहीं मिल रहा है। मोहनगढ के नहरी क्षेत्र में एमजीडी, एमजीएम, जेजेडब्ल्यू, बीडी, पीडी, क्यू आर एम, डीडब्ल्यूएम, एलकेएम, सीएचएम, जीटीडी सहित अन्य कई चकों में नहरों से रेत नहीं निकाली जा रहीं है, जिसका सीधा असर रबी की फसलों की बिजाई पर पड रहा है।

मोहनगढ के नहरी क्षेत्र में नहरों से रेत नहीं निकालने के कारण किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। किसानों ने इस संबंध में नहर विभाग के उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपे है। ज्ञापन में बताया कि ठेकेदारों की ओर से नहरों से पूरी तरह से मिट्टी नहीं निकाली जा रही है। कई स्थानों पर नहरों में मिट्टी को बिल्कुल ही नहीं निकाला।

रेत निकालने के लिए मजदूरों का उपयोग लेना था, लेकिन ठेकेदारों की ओर से जेसीबी मषीन से रेत निकाली गई, जिसके कारण पूरी तरह से मिट्टी निकली नहीं और नहर को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। जहां पर भी छोटी नहरों पर पुल बने हुए है। उन स्थानों पर पुल के नीचे से रेत नहीं निकाली गई है। ऐसे में नहरों में पानी पुल के नीचे से आगे नहीं जा पा रहा है। नहर के भरने से नहर के टूटने की आषंका बनी रहती है।


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