एमडीएम अस्पताल के पीडियाट्रिक आईसीयू में गैस का रिसाव, एक बच्चे की मौत

जागरूक टाइम्स 104 Jul 31, 2018

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

मथुरादास माथुर अस्पताल के के पीडियाट्रिक आईसीयू में सोमवार देर रात फ्यूमिगेशन गैस रिसाव से हड़कम्प मच गया। आनन-फानन में वहां भर्ती बच्चों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट किया गया। इस दौरान एक बच्चे की मौत हो गई। हालांकि डॉक्टर बच्चे की मौत का कारण गैस रिसाव को नहीं मान रहे हैं। वे इस मामले से पल्ला झाडऩे की कोशिश कर रहे हैं। बच्चे की मौत के बाद रात को बच्चों के परिजनों ने हंगामा भी मचाया। मंगलवार दोपहर तक अस्पताल प्रशासन इस मामले में चुप्पी साधे बैठा था। 


प्राप्त जानकारी के अनुसार मथुरादास माथुर अस्पताल में सोमवार देर रात करीब दो बजे आईसीयू के फ्यूमिंग के लिए रखी रसायन की एक बोतल अलमारी से नीचे गिरकर टूट गई। यह बोतल कैसे गिरी इसका खुलासा नहीं हो सका है। बोतल के गिरने से उसमें रखा रसायन फैल गया। इसे साफ करने के लिए इस पर गीला पोछा लगाने के दौरान रसायन के पानी के सम्पर्क में आते ही गैस बनना शुरू हो गई। देखते ही देखते पूरे आईसीयू में तीव्र गंध के साथ गैस फैल गई। इससे पहले से गंभीर चल रहे बच्चों की तबीयत और बिगडऩे लगी। इस पर सभी परिजन अपने बच्चों को लेकर वार्ड से बाहर भागे। पूरे अस्पताल में सूचना फैलते ही अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में सभी बच्चों को निकट ही स्थित लू एवं तापघात वार्ड में ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अफरा-तफरी के बीच परिजन इधर-उधर भागते नजर आए। इस दौरान दो दिन से यहां भर्ती सुंदर नाम के एक बच्चे की मौत हो गई।

परिजनों ने मचाया हंगामा

घटना के बाद अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल मच गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों ने देर रात जमकर हंगामा मचाया। इस सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और तफ्तीश में जुट गई। बताया जा रहा है कि इस हादसे का पैमाना और भी ज्यादा बड़ा हो जाता यदि समय रहते बचाव के कदम उठाये नहीं जाते। आईसीयू वार्ड में 10 से 12 बैड लगे हुए थे, जिनमें बच्चों का इलाज चल रहा था। इनमें कुछ बच्चों को तो वेंटिलेटर पर रखा गया था। परिजनों के विरोध प्रदर्शन की संभावना के चलते एहतियात के तौर पर अस्पताल में पुलिस तैनात की गई है।


यह कहना है डॉक्टर का

शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रमोद शर्मा ने बताया कि सुंदर की स्थित पहले से बहुत गंभीर थी। उसकी मौत गैस के कारण नहीं हुई। अलबत्ता उसकी मौत गैस रिसाव के दौरान अवश्य हुई। वहीं सुंदर के परिजन उसका शव लेकर रात को ही गांव के लिए रवाना हो गए। आईसीयू में भर्ती अन्य बच्चों के परिजनों का आरोप है कि एक बच्चे की मौत गैस रिसाव के कारण हुई। अपनी गलती छिपाने के लिए अस्पताल प्रशासन ने रात को ही उसके परिजनों को शव के साथ यहां से रवाना करवा दिया।

ऐसे होता है फ्यूमिगेशन

किसी भी स्थान को संक्रमण से मुक्त करने के लिए विभिन्न तरह के रसायनों का प्रयोग कर गैस छोड़ी जाती है। इस स्थान को पूर्णतया बंद करने के बाद फ्यूमिगेशन किया जाता है ताकि इससे निकलने वाली हानिकारक गैस बाहर नहीं निकले। फ्यूमिगेशन के बाद इस स्थान को खुला रखा जाता है ताकि इसमें शुद्ध हवा प्रवेश कर सके। फ्यूमिगेशन के लिए फॉस्फीन, डाइक्लोरोप्रोपीन, मेथिल आइसोसाइनेट, सल्फ्यूरिक फ्लोराइड, लोडोफॉर्म जैसे रसायन काम में लिए जाते है। फ्यूमिगेशन अमूमन अस्पतालों में किया जाता है, ताकि वह पूर्णतया संक्रमण मुक्त रहें। यदि इन रसायनों का उपयोग सावधानी पूर्वक नहीं किया जाए तो यह मनुष्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते हैं।

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