जोधपुर जिले की 315 स्कूलें एक शिक्षक के भरोसे

जागरूक टाइम्स 130 Aug 5, 2018

- घंटी बजाने से लेकर पोषाहार व दूध पिलाने तक की जिम्मेदारी

- सबसे अधिक स्कूल बाप पंचायत समिति में

जोधपुर @ जागरूक टाइम्स

जिले में सरकारी स्कूलों के नामाकंन बढ़ाने का शिक्षकों पर बेजा दबाव डालने वाले शिक्षा निदेशक ने यहां की 315 स्कूलों में एकल टीचर लगा रखा है। जो स्कूल का ताला खोलने, पोषाहार व दूध वितरित करने व उसका हिसाब रखने के अलावा घंटी बजाने से लेकर प्राइमरी स्कूल की कक्षा एक से पांच तक का शिक्षण कार्य करने पर मजबूर है। ऐसे में उन तमाम स्कूलों में शिक्षण कार्य कैसे होता होगा, यह सहज ही अदांजा लगाया जा सकता है। सवाल यह है कि आखिर बच्चों का शैक्षिक सत्र कैसे निकलता होगा।

जिले की 315 स्कूलें एक ही शिक्षक के भरोसे संचालित की जा रही हैं। सबसे अधिक ऐसे स्कूल बाप पंचायत समिति के हैं। यहां 75 स्कूलों में एक ही शिक्षक है। तिंवरी ब्लॉक में 12, शेरगढ़ में 28, शेखाला में 19, पीपाड़ शहर की 3, फलोदी की 31, ओसियां की 23, मंडोर की 8, लूणी की 11, लोहावट की 17, जोधपुर शहर की 13, देचू की 17, बिलाड़ा की 5, भोपालगढ़ की 7, बापिनी की 22, बालेसर की 13 ओर बावड़ी की 5 स्कूलें शामिल हैं, जहां एक अध्यापक ही तैनात है। जिले के ही नहीं पूरे प्रदेश के भी हालात ये ही है। प्रदेश की सरकारी विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के दावे खोखले दिखाई देने लगे हैंं। हर वर्ष की तरह सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने का अभियान जोर शोर से चल रहा है, लेकिन स्कूलों में अध्यापक ही नहीं तो बच्चों को पढ़ाएगा कौन? ये ही प्रश्न पूछ गांवों के लोग एक से अधिक टीचर वाली स्कूलों में अपने बच्चों को भेजने लगे हैं। ऐसे में बालिका शिक्षा की तो धज्जियां ही उड़ रही हैंं। वे एकल टीचर वाली स्कूलों में जाकर हाथ लगाकर व पोषाहार खासतौर रही है।

किसी के पास जवाब नहीं

प्रारंभिक शिक्षा विभाग के आकंड़े पर गौर करें तो प्रदेश में 7689 स्कूलों में एकल टीचर है, जबकि यहां पर पहली से पांचवीं तक की कक्षाएं लगती हैंं। 100-50 बच्चे भी अगर आते हैं तो एक साथ बच्चों को एक ही अध्यापक कैसे पढ़ाएगा इसका जवाब शिक्षा अधिकारियों के पास भी नहीं है। हालत ये है कि बच्चों को पढ़ाने के अलावा स्कूल शाला प्रधान की जिम्मेदारी भी एकल टीचर पर आन पड़ी है। इसके अलावा पोषाहार पर सरकार का ज्यादा जोर रहता है। स्कूल में पोषाहार समय पर सही तरीके से मिले वह काम भी शिक्षकों को ही करना होता है। विशेषज्ञों व शिक्षक नेताओं की मानें तो प्रदेशभर में एक लाख 5 हजार 379 स्कूल संचालित हो रहे हैं।इन पर 4 लाख 97 हजार 300 शिक्षक कार्यरत है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर स्कूल को 5-5 शिक्षक दे सकती है। एक-एक शिक्षक वाली स्कूलों को छोड़ दे तो बाकी स्कूलों में उसे 3 से 5 यानी 97690 शिक्षक लगे हैं, जो शहरों में जमे बैठे हैं। ऐसी व्यवस्था की नहीं जा रही।

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