नौ साल से जंजीरों में जकड़ी है जिंदगी, खुले आसमां तले हो रहा गुजारा

जागरूक टाइम्स 640 Jul 26, 2018

- आर्थिक तंगी से चलते नहीं हो पा रहा पचपन वर्षीय हड़मतसिंह का इलाज

रिड़मलदान राव @ जागरूक टाइम्स

बागोड़ा. उपखंड क्षेत्र के देवदा का गोलियां गांव में गत नौ साल से एक पचपन वर्षीय मानसिक विक्षिप्त पशुओं से भी बदतर जिंदगी जी रहा है। जंजीरों में जकड़े इस अधेड़ का इलाज सिर्फ इसलिए नहीं हो पा रहा है कि उसके परिवार की माली हालत ठीक नहीं है। बावजूद इसके इलाज के लिए प्रशासन से लेकर जनप्रतिनिधि कोई भी आगे नहीं आ रहा है। ऐसे में कमजोर वर्ग को चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए सरकार की ओर से संचालित की जा रही योजनाएं भी महज ढकोसला साबित हो रही है। 

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दरअसल, मोरसीम ग्राम पंचायत के देवदा का गोलियां गाव से दौ किलोमीटर दूर लुणवा ग्रेवल सड़क मार्ग पर राठौड़ों की ढाणी स्थित है। यहां पचपन वर्षीय हड़मतसिंह पुत्र चैनसिंह राजपूत नौ वर्ष से खुले आसमान तले एक खूंटे से जंजीर मे बंधा हुआ है। पशुओं से भी बदतर जिंदगी जी रहे इस शख्स देख हर किसी की दिल पसीज जाता है, लेकिन शासन-प्रशासन ने कभी इसकी सुध नहीं ली। 

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मुम्बई में करता था नौकरी

परिवार के किशोरसिंह ने बताया कि पन्द्रह साल पहले हड़मतसिह मुंबई मे नौकरी करता था। जिससे वह पत्नी व बच्चों का गुजारा आसानी से करता था, लेकिन उसके बाद ईश्वर ने ऐसा कहर बरपाया की उसे नौ साल से जंजीर मे बांधना मजबूरी हो गया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद जोधपुर मथुरादास माथुर अस्पताल में तीन-चार बार इलाज भी करवाया। जिससे उसका दिमागी संतुलन ठीक भी हुआ था, लेकिन अब आर्थिक हालात ऐसे नहीं है कि उसका आगे उपचार करवा सके।

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एक कपड़े में लिपटा बदन, मिट्टी बनी बिछौना

जागरूक टाइम्स प्रतिनिधि जब ढाणी में पहुंचा, तो खुले आसमान के तले एक कपड़े लिपटे बदन के साथ मिट्टी से सने शरीर में हड़मतसिंह नजर आया। जैसे उसका फोटो लेना चाहा, वह पागलों सी हरकत करने लगा। उसके भाई ने बताया कि कुछ ही वर्ष पहले एक पुत्री की शादी कर उसे ससुराल विदा कर दिया। अब परिवार में उसका भाई मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण जंजीरों से बंधा है और भाभी गृहस्थी संभाल रही है। आर्थिक स्थिति के चलते घर खर्च चलाना तक मुश्किल हो गया है। ऐसे में इलाज भी करवाए तो करवाए कैसे। 

ना बीपीएल की सुविधा और ना ही चिकित्सा सुविधा

परिवार के लोगों से बताया कि सरकारी इमदाद के नाम पर नौ साल में किसी प्रशासनिक अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने सुध नहीं ली। जिस पर आर्थिक स्थिति डावांडोल होने के बावजूद आज तक बीपीएल में भी परिवार को शामिल नहीं किया गया। आज तक इस परिवार को किसी तरह की सरकारी सुविधा ही मुहैया नहीं हो पाई है।

आवासीय सहायता स्वीकृत हुई है

हड़मतसिंह की आर्थिक स्थिति कमजोर होने व मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कारण परिवार के लिए पीएम आवास योजना के तहत सहायता स्वीकृति के लिए सूची भेजी थी। वरीयता के आधार पर चयन हो गया है। जल्द ही उनके परिवार को सहायता राशि मुहैया करवाई जाएगी।

-श्रीमती सुबादेवी मेघवाल, सरपंच, मोरसीम

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