स्कूल के लिए 57 साल पहले दान की थी जमीन, अब अरबों रुपए की सम्पत्ति हुई तो भूमाफिया की नीयत डोली...

जागरूक टाइम्स 5135 Jul 28, 2018

अल्लाह बख्श खान @ जागरूक टाइम्स

जालोर. जिले के आहोर उपखंड मुख्यालय पर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की अरबों रुपए की जमीन पर भूमाफिया की नजर डोलने लगी है। कहने को करीब 57 साल पहले भामाशाहों ने विद्यालय भवन बनवाकर यह जमीन राज्य सरकार को समर्पित कर दी थी। इसके बाद सरकार की ओर से इस जमीन पर छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, तहसीलदार अवास व प्राथमिक विद्यालय भी बनाए गए, लेकिन वर्तमान में मौके पर मौजूद करीब 35 बीघा जमीन की बाजार कीमत अरबों रुपयों में पहुंची तो कुछ भूमाफिया ने एक छदम संस्था का पंजीयन कर मालिकाना हक जमाना शुरू कर दिया। हैरानी की बात तो यह है कि सरकार को जमीन सुपुर्द करने वाले भामाशाहों में से एक भी एक व्यक्ति इस संस्था में शामिल नहीं है। ऐसे में आहोर में इन दिनों यह विवाद गहराता जा रहा है। कस्बे के छत्तीस कौम के लोग स्कूल बचाने की मुहिम में शामिल हो गए हैं।

दरअसल, विद्यालय शुरू होने के बाद 57 साल में आहोर उपखंड मुख्यालय के अलावा दूर-दराज के गांवों से भी हजारों विद्यार्थी शिक्षा अर्जित कर चुके हैं। निसंदेह तत्कालीन समय में भामाशाहों का मकसद शिक्षा को बढ़ावा देना था। इसी मकसद को पूरा करने के लिए उन्होंने ग्रामवासियों के आर्थिक सहयोग से विद्यालय भवन बनवाकर राज्य सरकार को समर्पित किया। इस दौरान विद्यालय विकास को लेकर समय-समय पर अभिभावकों व शिक्षकों के समन्वयक से शिक्षा समितियों का गठन भी होता रहा। बाद में वर्ष 2006 में जैन समाज पंच महाजनान शिक्षा समिति आहोर का गठन कर पंजीयन करवाया गया।

कार्यकारिणी में बारह लोगों को शामिल किया गया। साथ ही समिति के उद्देश्य में शिक्षा का प्रसार-प्रचार करना, समिति द्वारा निर्मित भवनों का रख-रखाव, भविष्य में विद्यालय में भवन निर्माण व जनपयोगी कार्य करने को शामिल किया गया। इसके लिए विद्यालय प्रशासन को भी भरोसे में लिया गया। कुछ साल तक तो ठीक रहा, लेकिन बाद में तत्कालीन सरपंच मोहनलाल बोहरा के कार्यकाल में शिक्षा समिति ने स्कूल की ओर से करवाए जा रहे कार्यों में समिति की सहमति का राग अलापते हुए दखल देना शुरू कर दिया। बाद में इन्हें जरिए नोटिस इस जमीन पर अपना मालिकाना हक भी जमाना शुरू कर दिया।

इसलिए डोल गई नीयत
शुरुआत में यहां 57 बीघा 10 बिस्वा जमीन थी। जिसमें से 15 बीघा जमीन में 90 आवासीय भूखंड काटकर बेचान किया गया। इस राशि को विद्यालय भवन निर्माण में लगाया गया था। इस तरह शेष 42 बीघा के करीब जमीन रही थी। बाद में वर्ष 1981 में तत्कालीन राजकीय माध्यमिक विद्यालय (वर्तमान में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय) के अधीन व कब्जासुदा जमीन की आहोर पटवारी की ओर से पैमाइश की गई। जिसमें मौके पर 35 बीघा 14 बिस्वा होना पाया गया।

कहने को यह जमीन वर्ष 1955 में महज 4400 रुपए में रजिस्ट्री करवाई गई थी, लेकिन वर्तमान में इसकी कीमत डीएलसी दर 1234 रुपए वर्गफीट के हिसाब से 21501216 प्रति बीघा (दो करोड़ पंद्रह लाख एक हजार दो सौ सोलह रुपए) होती है। इस तरह कुल 35 बीघा 14 बिस्वा जमीन की डीएलसी दर से कीमत करीब 76 करोड़ रुपए होती है, जबकि बाजार कीमत का आंकलन करें तो यह जमीन करीब पांच अरब रुपए की बताई जा रही है। खास बात यह है कि यह जमीन आहोर बस स्टैण्ड के सामने सुमेरपुर-जालोर हाईवे पर स्थित है। वर्तमान में यहां एक व्यावसायिक दुकान की कीमत भी अस्सी लाख से एक करोड़ रुपए तक है।
 

यह है स्कूल का इतिहास
दरअसल, जिस जमीन पर वर्तमान में स्कूल भवन स्थित है। वहां वर्ष 1955 तक गांगोतरा वाला बेरा के नाम से खसरा नम्बर 535, 536 व 537 में करीब 57 बीघा 10 बिस्वा कृषि भूमि स्थित थी। उस समय जैन समाज के पंच महाजनान के मुखिया विजयराज सहित अन्य लोगों ने 4400 रुपए में बेचान दस्तावेज के जरिए अपने नाम रजिस्ट्री करवाई गई। इसी साल तहसीलदार आहोर के आदेश पर इस जमीन को कृषि से आबादी भूमि में संपरिवर्तन किया गया। इसके बाद इसके मालिकान विजयराज वगैरा ने इस भूमि में से करीब 15 बीघा भूमि (वर्तमान में वर्धमान कॉलोनी से मामाजी मंदिर की गली तक) में 90 आवासीय भूखंड काटकर बेचान किया। इससे अर्जित धन व ग्रामवासियों के आर्थिक सहयोग से विद्यालय भवन का निर्माण किया गया।

तत्पश्चात वर्ष 1961 में यह स्कूल भवन व शेष जमीन को राजकीय विद्यालय के लिए राज्य सरकार को बतौर मालिकाना हक देते हुए समर्पित किया गया। तत्कालीन समय में राज्य सरकार की ओर से इस अधूरे भवन में 250 लोहे के छप्पर लगवाए गए। बाद में अपने मालिकाना हक का प्रयोग करते हुए राज्य सरकार ने समय-समय पर अध्यापकों के निवास के लिए तीन क्वार्टर, तहसीलदार निवास के लिए बंगला, छात्रावास तथा ग्राम पंचायत ने एक प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाया।

हालांकि प्राथमिक विद्यालय का अधूरा कार्य तत्कालीन आहोर नगरपालिका क्षेत्र के निवासी भामाशाह सांकलचंद के सहयोग से पूर्ण करवाया गया। इसके बाद भी सरकार की ओर से चार दीवारी, खेल मैदान के अलावा ग्यारहवें वित्त आयोग से उच्च प्राथमिक विद्यालय का निर्माण करवाया गया। वर्तमान में इस भूमि में उच्च माध्यमिक विद्यालय व उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित है। वहीं छात्रावास भवन में अस्थायी तौर पर राजकीय महाविद्यालय का संचालन किया जा रहा है। इसके अलावा तहसीलदार आवास व स्टाफ क्वार्टर भी मौजूद है।

सोशल मीडिया पर चली मुहिम
इधर, जैन समाज पंच महाजनानन शिक्षा समिति की ओर से कथित मालिकाना हक जताने वाले लालचंद जैन, पारसमल जैन व कानराज जैन ने अस्थायी यथास्थिति बना रखने के लिए स्कूल प्रशासन को नोटिस थमाया। इसके बाद कस्बेवासी आक्रोशित हो गए। कस्बेवासियों ने विद्यालय परिसर में ही बैठक आयोजित कर कानूनी रूप से हर जवाब देने की सहमति बनाई। इसके बाद विद्यालय के पूर्व छात्रों ने सोशल मीडिया पर विद्यालय बचाओ मुहिम शुरू कर दी। खास बात यह है कि इस मुहिम में लगातार लोग जुड़ते जा रहे हैं। आगामी दिनों में कस्बेवासियों की ओर से इस मामले में आपराधिक षड्यंत्र के तहत स्कूल की भूमि हड़पने का मामला दर्ज करवाने की तैयारी की जा रही है।

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