धुडाराम ने पत्नि को ट्रक चलाकर कराई थी पढाई, नोकरी लगते ही छोड दिया पति को

जागरूक टाइम्स 88 May 24, 2018
रानीवाड़ा निकटवर्ती कोटड़ा निवासी धुडाराम विश्रोई ने न्यायायिक मजिस्टे्रट में एक इस्तगासा दायर कर अपने भरण पोषण, दवाई खर्चा, एवं साथ रहने को लेकर इस्तागासा पेश किया। प्रार्थी धुडाराम ने इस्तगासा में बताया कि हमारी शादी बचपन में विश्रोई रीति रिवाज सें धूमधाम से सम्पन हुई थी, उस वक्त धुडाराम ट्रक चलाने का व्यवसाय करता था ठीक ठाक आमदनी होती थी और अपनी पत्नि की पढाई करवाने हेतु भीनमाल में निवास करता था, धुडाराम ने अपनी पत्नि को पहले एस. टी. सी. पूर्ण करवायी तथा बाद में बीएड करवाई इस दरम्यान पटवारी परीक्षा भी दिलवाई जिससें पहले पटवारी परीक्षा मे रामेश्वरी पत्नि धुडाराम का चयन हो गया था। कुछ दिनों तक टैनिंग करने के बाद रामेश्वरी का चयन आर. पी. एस. सी. की तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती परीक्षा में चयन हो गया और वह ग्राम मगरीवाडा तहसील रेवदर जिला सिरोही में तृतीय श्रेणी के अध्यापक के पद पर चयन होने सें सिरोही जिले में नौकरी करने चली गयी। धुडाराम ने बताया कि मेरी पत्नि के भाई गणपत,मलाराम,कालूराम व चाचा किशनाराम,हरिराम द्वारा रामेश्वरी पर गलत रूप से नाजायत दावाब बनाकर धुडाराम सें रोज रोज अवैध रकम की मांगणी कर रामेश्वरी द्वारा करवा करवा धुडाराम के नाम की जमीन भी उसके नाम करवा कर उसे ऊंचे दामो में बैचकर सारी रकम रामेश्वरी के भाईयों व चाचाओं ने हडफ कर दी और धुडाराम को HIV जैसी जान लेवा बीमारी सें संक्रमित करवाकर मरवाने के आपराधिक षंडयंत्र रचवाकर रामेश्वरी को सिखा बरगलाकर धुडाराम सें आये दिन लडाई टंटा फसाद करवा करवा कर धुडाराम व रामेश्वरी को अलग कर दिया, इतने में उनको दया नही आई तो उन लोगो ने NDPS द्वारा प्रतिबंधित डोडा पोस्त का सामान मेरी ट्रक में चौरी छिपे रखवा कर पुलिस से सेटींग करके मुझे धोखे मे रख कर मुझे बताया की यह उडद की दाल के कट्टे को सिरोही सें घर जाते वक्त मेरी ट्रक मे रखकर ले जाने का झूठा आश्वासन देकर मेरे विरूध NDPS ACT के झूठे मुकदमे में मुझे बरलूट पुलिस थाने में मुकदमा बनवाकर फंसा कर जिला काराग्रह सिरोही मे बंदी बनवा दिया। मैने पुलिस को बहुत बार अनुसंधान मे यह माल स्ंवय का नही हे मलाराम का होना बताया परन्तु उसकी पहूंच ऊपर तक होने सें मेरी एक नही सुनी तथा मुझे जैल पंहुचा दिया। धुडाराम को एच आई वी पोजेटिव संक्रमित कर गंभीर मृत्युकारित रोग का रोगी भी रामेश्वरी ने स्वंय के पूर्व संक्रमण की जानकारी मुझसें धोखे से छिपाकर मुझसें मुकलावा विवाह करके मुझे संक्रमित कर दिया तथा मुझे मारने हेतु जेल में ही छोड कर खुद आराम सें मगरीवाडा सिरोही में तृतीय श्रेणी की अध्यापिका बनकर मौज कर रही हैं। मेरे घर वालो की दिन बदिन आर्थिक हालात बिना किसी काम धंधे व कमाई के गिरती गयी। जैल व NDPS कोर्ट के कैस में प्रार्थी का खर्चा करके पेशी पर पेशी चलते आर्थिक दिवालियापन हो गया। धुडाराम के आय का सभी जरिये व स्त्रो खत्म हो गये जिससें स्वंय के जीवीकोपार्जन का भयकर संकट पैदा हो गया तथा धुडाराम की माता मीरा देवी जो एक वृद्ध अवस्था में अपने जवान पुत्र को एचआईवी पोजेटिव रोग की जानकारी होने से वह सदमे सें बीमार रहने लगी तथा वृद्ध माता की सेवा करने वाला उसका पुत्र धुडाराम सिरोही काराग्रह मे बंद हो गया और रामेश्वरी देवी मगरीवाडा नौकरी पर चली गई और पीछे देखभाल करने वाला कोई नही होने सें मां मीरा देवी की मृत्यु हो गयी। धुडाराम ज्यादा बीमार रहने पर धुडाराम के भाई द्वारा अपनी जमीन अन्य फायनैसर को बैचान करके प्राण घातक बीमारी एचआईवी पोजेटीव के संक्रमित रोगी धुडाराम को कई बार NDPS ACT के मुकदमे मे पैरोल पर कई बार छुडवा छुडवा कर विभिन्न अस्पतालों में आखों का, पेट का, कानो का, स्वांस का, एचआईवी पोजेटिव रोग का जगह - जगह अलग - अलग डॉक्टरों से इलाज करवाया है जिसका कर्जा व खर्चा बहुत हो गया हैं। हिन्दु विवाह पद्धति में यह नियम। हिन्दु विवाह पद्धति मे एक पति यदि शारिरीक रूप सें सक्षम दमखम वाला तथा रोजगार प्राप्त व्यक्ति होने पर अपने नाबालिंग बच्चों व विवाहित पत्नि व वृद्ध माता पिता के भरण पोषण गुजारा भत्ता देने तथा रोटी कपडा व मकान की सुविधा देने का दायित्व होता हैं उसी प्रकार विवाहित पत्नि का यदि वह सक्षम एवं आय के मजबूत स्त्रोत युुक्त, रोजगार युुक्त सुविधा का उपयोग कर रही है तो उसे मानवता के चलते अपने बीमार एचआईवी पोजेटिव संक्रमण युक्त विवाहित बैरोजगार पति के जीवन रक्षण हेतु विभिन्न डॉक्टरों के अस्पतालों का दवाई खर्चा लालन पालन मरणासन हालत में देखभाल करने का उत्तरदायित्व हिन्दु विवाह के सप्तपदी के वक्त साथफैरा मे दिये वचनों की पालना में करना निहायत ही आवश्यक होता हैं ऐसा करने हेतु वह हिन्दु विवाह अधिनियम के प्रावधानों सें हिन्दु विवाह के तहत विवाहित पत्नि का उत्तरदायित्व बनता हैं जिसका निर्वहन रामेश्वरी देवी द्वारा नही किया जा रहा हैं। धुडाराम को NDPS ACT में 2011 सें विचाराधीन कैदी के तहत बंदी रहते हुए कभी भी जिला काराग्रह सिरोही मिलने तक नही गई जिसका सबूत जिला काराग्रह सिरोही के केदी के सगे संबंधियों के मिलने के रजिस्टर सें प्रमाणित हैं कृषि भूमि में हक मांगा। धुडाराम की कृषि भूमि मे नोश्रल हक पति के जीवन काल में ही चाहिए परन्तु बीमार एचआईवी पोजेटिव पति का इलाज करवाना पंसन्द नही हैं यह सक्षम है प्रार्थी के अच्छे दिनो के वक्त पति के खर्चे हर्जे से पढ लिखकर सक्षम एवं रोजगार दिलवाकर अध्यापिता बनाने के बाद अब पति को मरने हेतु छोड दिया जबकि उसका जीवन रक्षक दवाई खर्चा प्रतिमाह लगभग 15-20000/- का खर्चा आता हैं। धुडाराम के जैल जाते ही कोर्ट में भरण पोषण का किया मुकदमा। रामेश्वरी देवी ने धुडाराम के जैल मे रहते समय ही दिनांक 2.8.2013 को कोर्ट इस्तगासा सें धारा 498ए,323,406 आईपीसी का झूठा मुकदमा कर प्रार्थी एवं उसके भाई व भाभी के विरूद्ध न्यायालय हाजा से थाने मे दर्ज करवाया जिसमें स्वंय रामेश्वरी देवी के पुलिस बयानों में विवाह के 4 माह पश्चात प्रार्थी NDPS ACT के प्रकरण में बरलूट थाने में बंदी हो गये थे तथा अभी सें जिला काराग्रह सिरोही में विचाराधीन बंदी के रूप में काराग्रह मे बंद रहते हुए भी यातनाये देने की के झूठे आरोप लगाकर पुलिस से मिलावट कर गलत फंसा कर चालान अन्तर्गत धारा 498ए,323 आईपीसी का न्यायालय हाजा के समक्ष प्रस्तुत करवा दिया हैं। धुडाराम ने अपने भाई की पुत्री को लिया गोद। धुडाराम ने अपनी भविष्य के जीवनयापन एवं देखभाल हेतु छोटे भाई सदाराम की पुत्री प्रियंका कुमारी को गोद पुत्री की हैसियत सें गोद लिया हैं जिसका गोदनामा पंजीयन करवाने हेतु उप पंजीयक कार्यालय रानीवाड़ा में प्रस्तुत किया हैं धुडाराम ने बनवाये जैवर भी रामेश्वरी देवी के कब्जे में। धुडाराम ने बताया की मेरे द्वारा सोने चांदी के विवाह के समय दिये दागिने हें उन्हे रामेश्वरी देवी द्वारा लाटाए नही जा रहे अगर वह दागिने लोटाये जाए तो वह एचआईवी पोजेटीव रोग के गंभीर संक्रमित धुडाराम को वापस लोटाया जाए तो वह बैचान कर अपना ईलाज करवा सके। रामेश्वरी देवी की सैलेरी 53 हजार रामेश्वरी देवी प्रतिमाह 53 हजार रूपयें सरकार वहन करती हैं क्योकि वह एक तृतीय श्रेणी की अध्यापक सिरोही में होने सें।

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