भीनमाल के सांवीदर की 80 वर्षिय बुजुर्ग विधवा महिला को डावल में मिला सहारा, जाने बुजुर्ग महिला की दां

जागरूक टाइम्स 75 May 24, 2018
सांचौर : वर्तमान समय में सोशल मीडिया पर लोग ज्यादातर बिना मतलब की पोस्टें भेजना, एक -दुसरों को निचे दिखाने की कोशिश व बहसबाजी करना सहित विभिन्न तरह से दुरूपयोग किया जा रहा है व कलयुग में अब मानवता भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। अगर सड़क दुर्घटना के दौरान घायल सड़क पर तड़पता है पास में से सैकड़ो वाहन फर्राटा मारते हुए गुजर जाते है लेकिन मदद के लिए बहुत ही कम लोग आगे आ रहे है। ऐसे में लोगों में अब मानवता मरती नजर आ रही है। दूसरी तरफ डावल ग्रामीणों का वाट्सअप ग्रुप डावल विकास परिषद के लोगों ने एक मानवता के नाते ऐसा कार्य कर बाकि के लोगों में एक अनोखी ताकत भरने का प्रयास किया है व सोशल मीडिया पर सामाजिक सरोकार का अनोखा उदाहरण पेश कर मिशाल कायम की है। वहीं दुसरे लोगों को उनके कार्य से सिख मिलती है। जालोर जिले के भीनमाल तहसिल के पास स्थित सावीदर गांव का एक परिवार अपने जीवन यापन करने के लिए 1995 में गांव को छोड़कर उपखंड क्षेत्र के डावल ग्राम पहूंचकर एक गोचर भूमि में पेड़ के निचे आशियाना बनाकर अपना गुजारा करने लग गई। यहां बुजुर्ग महिला के पति व दो बेटियों के साथ गांव के गोंचर भूमि में रहने लग गई। जिसके बाद उसकी पति की मौत हो गई। एवं उनके दोनों बेटियां ससुराल चल गई व महिला की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं था। धीरे-धीरे गांवो के घरों में घुमकर अपना पेट भर रही थी। लेकिन फिर एक और दुख का पड़ा टूट पड़ा की महिला के दोनों आंखो की रोशनी चली गई। ना ही महिला को कोई सरकारी मदद मिली। ऐसे में उनके हालात दिनोंदिन खराब होते जा रहे थे। जिसके बाद यह जानकारी अध्यापक गोपालङ्क्षसह व मोहनलाल पंवार को हुई तो उन्होंने 2005 महिला के आंखो का ऑपरेशन करवाकर मदद की। अपना चलना फिरना बंद, जिंदगी का अंतिम पड़ाव आज भी अकेला महसुस नहीं कर रही है आंखो की रोशनी वापिस आई तब तक उम्र ढ़ल जाने के बाद पैरों ने काम करना बंद कर दिया। फिर भी डावल के ग्रामीणों ने खाने पीने की तमाम व्यवस्थाएं संभाली। एवं परिवार के सदस्यों की तरह सेवा करने में लगे हुए है। बुजुर्ग महिला अब चल नहीं सकती है। ऐसे में खुद बारिश से बचने के लिए कुछ नहीं कर सकती है। इस वर्ष मानसून की शुरूआत हुई तो वॉटसअप पर बने गु्रप डावल विकास परिषद में एक ग्रामीण ने बुजुर्ग महिला के लिए टीन शेड बनाने का विचार रखा। जिसपर डावल निवासी महेन्द्र पुनिया ने आगे आते हुए महिला के लिए टीन शेड बनाने के लिए संपूर्ण खर्चो वहन कर मानवता का परिचय दिया। एवं आस - पास में रह रहे पुरूषों के साथ - साथ महिला भी टीन शेड तैयार करवाने के लिए हाथ बढाया। वहीं बुजुर्ग महिला ने ग्रामीणों का ईस तरह का प्यार देखकर खुशी से आंखों से आंसू छलक पड़े। वहीं ग्रामीणों ने आगे भी ईस तरह मदद करने का आश्वासन दिया है। विधवा बुजुर्ग महिला डावल में निवास करने के बाद ग्राम पंचायत व ग्रामीणों की सहमति से बड़ी मुश्किल से उनके यहां के दस्तावेज बनाकर पेंशन शुरू करवाई गई थी। जो उनको डावल पोस्ट ऑफिस से मिल रही थी। उसके बाद सरकार द्वारा निकाली गई योजना भामाशाह योजना शुरू हुई तो वों भी मिलना बंद हो गई। ना तो बुजुर्ग के भामाशाह कार्ड बन पाया एवं ना ही बैंक खाता खुला जिसकी वजह से उनको पेंशन भी नहीं मिल रही है। 1995 के दौरान अपना गांव छोड़कर जीवन यापन करने डावल पहूंची जहां ग्रामीणों ने गोचर भूमि में निवास की इजाजत दी। जिसके महिला के जीवन में संकट दर संगट आने लगें। लेकि न आस – पास के ग्रामीणों ने असहाय की स्थिती देखते हुए उसकी हर जरूरत को पूरी की और परिवार के सदस्य के रूप में व्यवहार किया जा रहा है। मोहनलाल पंवार ग्रामीण, गणपतलाल साहू डावल विकास परिषद समूह संचालक।

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