मधुर आवज से बनाया मुकाम सरिता खारवाल

जागरूक टाइम्स 511 May 24, 2018
सुराणा : पचपदरा खार की नगरी से निकली कोयल की आवाज की धनी जिसको देशी भजनों और लोक गीतों की महारत हासिल की जिन्होने बनाबनी के गीतों के माध्यम से आज भी भारत के हर शहर में सरिता खारवाल ने अपनी सुमधुर गायकी से एक विश्ििष्ट मुकाम बना चुकी है। इन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में भजनों के माध्यम से पुरे भारत में नाम कमाया हे राजस्थान ही नहीं बल्कि राजस्थान के बहार भी अपनी आवाज का लोहा मनवाया हे इन्हें राजस्थान की स्वर कोकिला कहे तो भी कोई अति सोकती की बात नहीं ये एक सरल स्वभाव के धनि है। हाल ही में सुराणा के वीर विक्रमसिंह दहिया के शुटिंग में अपनी मधुर आवाज से गाय गाथा के दौरान उन्होंने ने उनके गायकी व उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। सरिता खारवाल ने बताया कि राजस्थान के जालोर जिले समेत कई जिलों में अपनी मधुर आवाज में प्रस्तुति दे चुकी है। आवाज के दम पर श्रोताओं के दिलों पर छाप छोड़ी है। राजस्थान के साथ -साथ साउथ में हैदराबाद व् मद्रास में भी भजनों के बड़े कार्यक्रम में प्रस्तुति दे चुकी है। उनके गाए भजनों व गीतों की सीडी भी बनी है। खारवाल ने बताया कि सुराणा में बधेनाथ व भगवान सुर्यनारायण की प्राण प्रतिष्ठा में भजनों की प्रस्तुति दी थी। उसके बाद मुझे क्षेत्र में दादाजी बावसी के नाम से प्रसिद्ध वीर विक्रम सिंह की गाथा की प्रस्तुति देने का अवसर मिला इस में अपने आपको सौभाग्य समझ रही हूँ। रतनसिंह दहिया ने बताया की हाल ही में केसरियां बालम गीत के यूटयूब पर दो लाख ९७ हजार लोगों ने इसे देखा गया है।

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