जिसने भी खाई वो हो गया यलों खजुर का दिवाना

जागरूक टाइम्स 77 May 24, 2018
बागोड़ा : ईन दिनो उपखंड के नया चैनपुरा व नवापुरा में कृषि उद्यानिक विभाग की योजना मे बोई खजुर की पैदावार किसानों को लुभाने लगी है। कृषि की नई-नई तकनिकी ईजाद होने से कम पानी मे अच्छी आमदनी होने से यहा खजुर व अनार की खेती की ओर किसानो का रूझान बढने लगा है। बागोड़ा क्षैत्र में खजुर की खेती किसानो के लिए कम खर्च मे अच्छी पैदावार व मुनाफा ज्यादा होने तथा कम नुकशान की वजह से कृषको की स्थिति में सुधार होने लगा है। यहा की खजुर जिसने भी एक बार चख ली वो उसको बार-बार खाने का दिवाना होकर रह जाता है। पीले कलर में बडे आकार की पकी खजुर राह चलते लोगो का घ्याान बरबस खिच लेती है ओर उसे खरीदे बिना नही रह पाता है। उपखंड मुख्यालय से मात्र आठ किलोमीटर दूर नया चैनपुरा निवासी किसान देसुदेवी पत्नि वेनाराम कलबी ने बताया कि उसके खेत मे जिला उद्यानिक विभाग की ओर से चार वर्ष पहले खजुर की खेती की ओर रूझान बढने से उसने करीब तीन बिघा ऐरिया की भूमि पर 78 पौधे लगाए थे। जो अब खजुर देने लगे है ईस पौधो से देसुदेवी ने अब तक पैतीस सौ किलो खजुर को बाजार में बैच कर करीब दौ लाख 35 हजार रूपए की आमदनी ले चुकी है। कलबी बताती है कि खजुर वेरायटी की बुहाई के पांच वे साल से 10 से बीस फरवरी के बीच के लिए पुठे निकलने शुरू हो जाते है ओर पुठा फटने के तीसरे दिन तक उससे मिले खजुर के पुठे पर पाउडर का स्प्रे करना पड़ता है ओर उसके बाद फ्रुट बनने शुरू हो जाते है। खजुर के एक गुच्छे मे करीब पांच किलो फ्रुटिंग पहली साल से मिलने लगती है ओर प्रत्येक पौधे के अंदाजन दस से लेकर अटठारह गुच्छे लगते है। जब ये गुच्छे तीन माह के करीबन हो जाए तो बर्ड सेफ्टी के लिए इन पर पांलीथिन की बेग लगानी होती है ताकि फ्रृट को कोई नुकशान न हो पाए। एक हेक्टेयर भूमि मे एक सौ 56 पौधे लगते है। सरकारी अनुदान मिलने से किसानो की हालत अब सुधरी जा रही है। कुड़ा ध्वेसा, नादिया, चैनपुरा, रंगाला व नवापुरा मे खजुर के अलावा किसान अनार की पैदावार लेने मे खास रूची दिखाने लगे है। पांच से अच्ची साल तक मिलती है पैदावार ये पौधे 5 साल की उम्र से फ्रुटींग देने लगते है जो निरन्तर 80 वर्षो तक निरन्तर व फल का एवरेज बढता ही जाता है। फल लगने के तीसरे वर्ष कम से कम 40 किलोग्राम से शुरू होकर करीब साढे तीन सौ किलो प्रत्येक पौधा खजुर की पैदावार देते है। ब्राही वेरायटी की खजुर का कलर पीला होने पर इसकी तुड़ाई शुरू करनी होती है। यहा पर पनपी इन पिली खजुरो कि खासियत यह है कि ये बडे आकार व गिरी से भरी खाने मे स्वादिष्ठ होने से जो भी इनको एक बार चख ले तो उसके बिना रह नही पाता है। मंडी का अभाव जाना होता भीनमाल उपखंड मुख्यालय व आस-पास के गावों मे कृषि मंडी का अभाव होने से किसानो को कई परेशानियों से गुजरना पड़ रहा है। यहा से खजुर व अन्य पैदावार बचने 43 किलोमीटर दूर भीनमाल जाना पडता है जो घाटे का सौदा होता है वहा आडतिये 50 से लेकर 60 रूपए के भाव से खरीद कर होलसेल मे ग्राहको को बेचते है। बागोड़ा क्षैत्र मे रिटेलर सौ रूपए किलो खजुर बेचने से मुनाफा हो जाता है। मुख्यमंत्री के हाथो सम्मान पा चुकी है देशु देवी वर्ष 2015-16 मे नया चैनपुरा निवासी किसान देसुदेवी कलबी जिला की टांपर किसान होने से मुख्यमंत्री वसुंधरा के हाथो टांपर किसान का अवार्ड व पच्चीस हजार रूपए से सम्मानित हो चुकी है। मंत्री भी कर चुके है अवलोकन तत्कालिन जिला कलेक्टर डा. जितेन्द्र कुमार सोनी ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन में सरंक्षित खेती के तहत देसु देवी के यहा 22 सितम्बर 2015 कोजिले मे पहली बार राजकीय अनुदान से 4 हजार वर्गमीटर में स्थापित ग्रीन हाउस में खीरे की फसल को देखकर गद-गद हुए थे। वही ग्रीन हाउस का अवलोकन करने पूर्व पंचायत राज्य मंत्री सुरेन्द्र गोयल भी 23 अक्टूंबर को नया चैनपुरा मे प्रगतीशील किसान के यहा आए थे उस दोरान उन्होने ग्रीन हाउस के पास बोई मिर्ची का अवलोकन किया तो मिर्ची की फसल गोयल के मन को भा गई थी। बूंद-बूंद पानी से पौधो कि सिचाई रेतीले धोरे पर फसल पनपाने के लिए जहा मेड-क्यारो से सिचाई जो मुश्किल होती थी, लेकिन एक दशक से राज्य सरकार एंव कृषि उद्यानिकी विभाग की योजना स ेअब बूंद-बूंद सिचाई पद्धति से पौधो की सिचाई की जाती है जिसमे पानी का अपव्वय नही होने के साथ साथ कृषक निर्धारित समय तक दूसरे काम मे हाथ बटा सकता है। खेत मे ही बरसात के पानी को साल भर सहजने के लिए भूमिगत होज बना होने से सालभर सिचाई के काम आ रहा है। देसु देवी बताती हैिकवे अब अनार के 25 सौ पौधे लगाने की तैयारी कर रही हैं। खेत मेब नी है वर्मी कोम्पोस्ट इकाई टांपर देसु देवी कलबी के खेत में वर्मी कोम्पोस्ट के लिए इकाई भी बनी हुई है। जिसमें अलीया नाम की खाद तैयार की जाती है। सिचाई के लिए सोलर सेट जो तीन हांसपांवर का होने से सिचाई मे उपयोगी साबित हो रहा है। पशु-पालन के साथ-साथ आधुनिक कृषि यन्त्रों में काफी रूची रखती है।

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