जिस पिता की उंगली पकड़कर बड़े हुए उसके बुढ़ापे की लाठी जरूर बनना - पटेल

जागरूक टाइम्स 853 Jun 17, 2019

रानीवाड़ा। जालोर-सिरोही सांसद देवजी पटेल ने पितृ दिवस के अवसर पर क्षैत्र वासियों को शुभकानाएं देते हुए कहा कि पितृ दिवस मनाने की सार्थकता तभी मनानी जायेगी जब हम सभी अपने पिता का सम्मान करें तथा उनकी दी हुई सीख पर चलकर उच्च शिखर को प्राप्त करें। जिस पिता की उंगली पकड़कर बड़े हुए उसका हाथ थामकर उसके बुढ़ापे की लाठी बनना मत भूलना तभी तो हम हैप्पी फादर्स डे कह पायेंगे। किसी भी संतान की प्रथम गुरू के रूप में माता का स्थान सर्वोच्च माना गया हैं, दया, क्षमा, सह्रदयता, स्रैह जैसे उच्च गुण संतान के द्वारा ममतामयी माँ से ग्रहण किये जाते हैं।

परन्तु जीवन की सफलता व उच्च शिखर प्राप्त करने में संतान को सबसे ज्यादा सहयोग व हिम्मत पिता के द्वारा दी जाती रही हैं। डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी, अभिनेता, राजनेता, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, समाज सेवी आदि बनाने में पिता की भूमिका सर्वविदित है, जिसने भी पिता की सीख को जीवन में उतार लिया वह कर्तव्य निष्ठा, ईमानदारी, समर्पण, अनुशासन जैसे गुणों को आत्मसात करते हुए जीवन में उच्च शिखर को प्राप्त कर लेता हैं तथा संसार में अपना लोहा मनवाने में कामयाब रहता हैं।

पटेल ने बताया कि उन्होंने अपने पिता से कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ना, जीवन में अनुशासन बनाये रखना, ईमानदारी और सह्रदयता को संजोये रखना, सामाजिक सद्भाव रखते हुए मानव मात्र के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नही करना जैसे गुण विरासत में प्राप्त किये। उसी का परिणाम हैं कि पटेल को आज जन-जन विश्वास व स्रैह प्राप्त हैं। पटेल ने बताया कि नाम से जिनके मेरा जीवन जुड़ा, मैंने जिन्हे ईश्वर माना, आँखे मेरी झुक जाती है उनके सम्मान में, ऐसे मेरे पूजनीय पिताजी को प्रणाम करता हुं साथ ही सभी पिताओ को भी मेरा नमन।

पिताजी भले ही साक्षर हो पर संसार का दुर्लभ और महत्वपूर्ण ज्ञान हमें पिताजी से ही प्राप्त होता है। पटेल ने पितृ दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहाकि एक उम्र गुजरती है जिसके साए में, जो आंसू पीकर भी हमारे लिए मुस्कुराता है, जो धूप में तपता है रातों में जागता है, मगर हमारी ख्वाहिशों से समझौता नहीं करता, हमारी खुशी के लिए जो हर दुख सहन कर लेता है, वहीं तो पिता कहलाता है। पटेल ने बताया कि फादर्स डे पर उन्होंने अपने अग्रज मफतलाल पटेल एवं अनुज रमेश पटेल, नरेश पटेल के साथ अपने पिता मासिंगाराम जी पटेल को गुलदस्ता भेंटकर जीवन की सफलता के लिए आर्शीवाद प्राप्त किया।

फादर्स डे की शुरुआत - फादर्स डे की शुरुआत बीसवीं सदी के प्रारंभ में पिताधर्म तथा पुरुषों द्वारा परवरिश का सम्मान करने के लिये मातृ दिवस के पूरक उत्सव के रूप में हुई, यह हमारे पूर्वजों की स्मृति और उनके सम्मान में भी मनाया जाता है। फादर्स डे को विश्व में विभिन तारीखों पर मनाते है जिसमें उपहार देना, पिता के लिये विशेष भोज एवं पारिवारिक गतिविधियाँ शामिल हैं। आम धारणा के विपरीत, वास्तव में फादर्स डे सबसे पहले पश्चिम वर्जीनिया के फेयरमोंट में 5 जुलाई 1908 को मनाया गया था। 6 दिसम्बर 1907 को मोनोंगाह, पश्चिम वर्जीनिया में एक खान दुर्घटना में मारे गए 210 पिताओं के सम्मान में इस विशेष दिवस का आयोजन श्रीमती ग्रेस गोल्डन क्लेटन ने किया था। प्रथम फादर्स डे चर्च आज भी सेन्ट्रल यूनाइटेड मेथोडिस्ट चर्च के नाम से फेयरमोंट में मौजूद है।



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