गर्मी की दस्तक के साथ ही पीलू की बहार

जागरूक टाइम्स 282 May 25, 2019

भीनमाल । बागोडा एवं भीनमाल उपखण्ड क्षेत्र में गर्मी की दस्तक के साथ ही इन दिनों मारवाड़ में जाळ के पेड़ पीलू से लदके नजर आ रहे हैं। पश्चिमी राजस्थान के धोरों में जहां गर्मी के मौसम में पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ता है, वही इस मौसम में मारवाड़ के मेवे के नाम से पीलू प्रसिद्ध है । बागोडा एवं भीनमाल क्षेत्र में गर्मी की दस्तक के साथ ही इन दिनों जाळ के पेड़ पीलू से लदके नजर आ रहे हैं । पश्चिमी राजस्थान के धोरों में जहां गर्मी के मौसम में पानी के लिए लोगों को तरसना पड़ता है और पेड़ पौधे भी सूखने के कगार पर पहुंच जाते हैं। लेकिन गर्मी बढऩे के साथ ही जाळ के पेड़ शीतल छांव का अहसास दिलाने के साथ ही पीलू भी देते है। इन दिनों जाळ के पेड़ों पर पीलू की बहार आई हुई है। पीलू इकट्ठा करने के लिए जाळ के पेड़ों पर बच्चों की भीड़ नजर आने लगी है।

पीलू की सीजन कहे जाने वाले इस मौसम में पीलू इकट्ठा करना ग्रामीण क्षेत्र में किसी त्योहार से कम नहीं है। पीलू के लिए लोगों को अप्रेल-जून का इंतजार रहता है। गर्मी के मौसम में मारवाड़ का मेवा कहा जाना वाला पीलू गर्मी से राहत दिलाता है। पीलू को एकत्र करने के लिए अल सवेरे से ही किशोर-किशोरियों के साथ ही परिवार के अन्य लोग खेतों एवं जगलो की ओर रुख करते है। ये जाळ पर चढ़कर पीळू को लोटे में भरकर एकत्र करते है। पीलू एकत्रित करने के लोटे को भी एक विशेष प्रकार की गांठ लगाकर बांधा जाता है।जिसे लोटा गांठ कहते है। जाळ के पेड़ पर पीलू प्रारंभ में हरे रंग व पकने की अवस्था में पीले रंग के हो जाते है। गर्मी के मौसम में पीलू का सेवन बहुत ही लाभकारी माना गया है। क्षेत्र के बागोडा, धुम्बडीयाँ, नरसाणा, सेवडी, जेरण, जुंजाणी, वाड़ा भाड़वी, पूनासा सहित ग्रामीण क्षेत्र के कई गांवों मेें जाळ के वृक्ष पीलू से लदके नजर आ रहे हैं।

सावचेती जरुरी
मारवाड़ में गर्मी के मौसम में आमतौर पर जाल का पेड़ ही हरा भरा रहता है। इन पेड़ में कोटर भी होती है। कोटर में कई बार विषैले जीव-जंतु घुस जाते है। ऐसे में पीलू एकत्रित करने के लिए पेड़ पर चढऩे के दौरान विषैले जीव जंतुओं के काटने का डर रहता है। वहीं इन दिनों हवा चलनी भी शुरू हो गई है। ऐसे में पेड़ पर पीलू इकट्ठा करते समय डाल का एक हाथ से पकड़कर खड़ा होना भी खतरे से खाली नहीं है । पेड़ की डाली का सहारा लेकर भी पीलू इक्कठे करते हैं ।

लोटा व केतली में करते हैं एकत्रित
गांवों में चरागाह व खेतों की माठ पर जाल के पेड़ दूर से पीलू से लदे नजर आते है। गर्मी के मौसम में पीलू को सेहत के लिए अच्छा माना गया है। बुजुर्ग कहते है कि गर्मी के मौसम में पीलू खाने से लू नहीं लगती है। पीलू का स्वाद भी मीठा होता है। पीलू एकत्रित करने के लिए लोटा या केतली पर रस्सी से गांठ देकर उसे कमर पर बांधते है। फिर जाल पर चढ़कर या नीचे खड़े रहकर दोनों हाथों से पीलू इक्कठे कर लोटे में डालते है। तेज हवा चलने पर पीलू झड़ जाते है। ऐसे में ग्रामीण जाळ के पेड़ के नीचे चादर बिछाकर पीलू एकत्रित करते है।

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