जालोर में पुलिस सुरक्षा में रवाना की उदयपुर डिपो की बस, चालक ने कहा- उदयपुर डिपो में खड़ी करूंगा बस

जागरूक टाइम्स 799 Jul 27, 2018


- तीसरे दिन भी रही रोडवेज कर्मियों की हड़ताल, बस डिपो में ही पड़ी रही रोडवेज बसें
- तीसरे दिन भी बस स्टैण्ड रहे सूने, ग्रामीण इलाकों में हुई भारी समस्या
जालोर। जिले में शुक्रवार को भी रोडवेजकर्मियों की हड़ताल जारी रही। हालांकि रोडवेजकर्मियों ने पहले दो दिन की हड़ताल का ही ऐलान किया था, लेकिन शुक्रवार को भी रोडवेजकर्मी काम पर नहीं आए। जिससे लोगों को भारी समस्या का सामना करना पड़ा। हालांकि उदयपुर डिपो की एक बस नाकोडा से उदयपुर के लिए जा रही थी और सुबह जालोर पहुंची। नया बस स्टैंड पर सवारिया उतारते वक्त पुलिसकर्मी बस के पास आए और उनको हड़ताल के बारे में बताया तो चालक ने उदयपुर डिपो जाने का कहा। इधर रोडवेज कर्मियों ने जालोर डिपो में ही बस को खड़ी रखने की बात कही। बाद में चालक के नहीं मानने पर पुलिस सुरक्षा में उसे सर्किट हाउस तक छोडक़र उदयपुर के लिए रवाना किया गया।

गौरतलब है कि जालोर जिलेभर में शुक्रवार को बसें नहीं चलने यात्रियों को भारी समस्या हुई। ग्रामीण इलाकों में तो समस्या ने लोगों को परेशान कर दिया है। अस्पताल के आने के लिए भी गरीबों को टैक्सी कर आना पड़ रहा है। इधर कईजगहों पर निजी बस सहारा बन रही है, लेकिन यह सहारा ऊंट के मुंह में जीरे के समान था। निजी बसों का कम संचालन होने और भीड़ अधिक होने से लोगों को काफी परेशानी हुई। सातवां वेतनमान देने समेत कई मांगों को लेकर राजस्थान रोडवेज संयुक्त मोर्चा की ओर से चक्का जाम हड़ताल शुक्रवार को भी जारी रही। 

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रोडवेज कर्मियों ने पहले यह चक्का जाम दो दिन के लिए किया था, लेकिन शुक्रवार को भी बसों के पहिए थमे रहे। कर्मचारियों का धरना भी जारी रहा। वहीं रोडवेज कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए है। इस कारण गुरुवार रात बारह बजे शुरू होने वाली बसें शुरू नहीं हो सकी। शुक्रवार को बसें चलने की उम्मीद में कई यात्री बस स्टैंड पहुंच गए, लेकिन उन्हें निराशा ही हाथ लगी। रोडवेज की चक्का जाम हड़ताल के तीसरे दिन भी रोडवेज डिपो से एक भी बस नहीं निकली। हालांकि उदयपुर डिपो की एक बस नाकोडा से उदयपुर के लिए आई। हालांकि नया बस स्टैंड पर सवारिया उतारते वक्त पुलिसकर्मी बस के पास आए और उनको हड़ताल के बारे में बताया तो चालक ने उदयपुर डिपो जाने का कहा।

पुलिस सुरक्षा से बस अस्पताल चौराहे तक आई। वहीं रोडवेजकर्मी अस्पताल चौराहे पर खड़े थे और उन्होंने बस को रुकवा दिया और उनको आग्रह किया कि बस को जालोर डिपो में खड़ी कर दे। लेकिन बस का ड्राइवर नहीं माना और कहा कि उदयपुर डिपो की बस है तो में उदयपुर जा रहा हूं। उदयुपर डिपो में ही बस खड़ी कर लूंगा। इस पर पुलिस सुरक्षा में बस को सर्किट हाउस तक एस्कोर्ट करते हुए छोड़ा और बस को आगे के लिए रवाना किया। 

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हजारों यात्री हुए परेशान
रोडवेज की जालोर में बसें नहीं चली। पिछले तीन दिनों में हजारों यात्री प्रभावित हुए और लाखों का राजस्व नुकसान हुआ है। हड़ताल के दौरान शुक्रवार को भी जालोर डिपो में रोडवेज बसें पड़ी रखकर कर्मचारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। राजस्थान स्टेट रोडवेज एम्पलाइज एटक के पदाधिकारियों का कहना हैकि सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लाखों रुपए पेंशन और ग्रेच्युटी के बकाया है।

यह है रोडवेजकर्मियों की प्रमुख मांगें
सेवानिवृत रोडवेजकर्मियों को बकाया परिलाभ दिया जाए, करीब 4 हजार कर्मियों का 600 करोड़ रुपए बकाया है। पिछली दीपावली का बकाया बोनस/एक्स ग्रेसिया दिया जाए। लगातार तीन बार से बढ़ा डीए भी रोडवेजकर्मियों को नहीं मिला है। प्रदेश के सभी कर्मचारियों को 7वां वेतन आयोग का लाभ मिल चुका है, लेकिन रोडवेज में अभी तक 7वां वेतन आयोग लागू नहीं हुआ। इसे लागू किया जाए। रोडवेज में पिछले 4 बरसों में कोई भर्ती नहीं हुई। करीब 8 हजार खाली पद पड़े हैं, उन्हें भरा जाए। रोडवेज बेड़े के लिए नई बसों की खरीद होने के साथ ही अनुबंध पर चल रही बसों की संख्या कम की जाए।

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