ट्यूबवेल लगवाने में लाखों रुपए खर्च, अब एक बूंद पानी नसीब नहीं

जागरूक टाइम्स 336 Jun 25, 2018

बागोड़ा @ जागरूक टाइम्स

आमजन को बुनियादी जरूरतें मुहैया करवाने के लिए सरकार की ओर से खर्च किया जाने वाला लाखों-करोड़ों का बजट कई मर्तबा जनप्रतिनिधियों की लापरवाही की भेंट चढ़ जाता है। कुछ ऐसा मामला कस्बे के नयाखेड़ा में सामने आया है। जहां ग्रामीणों को पेयजल किल्लत से निजात दिलाने के लिए लाखों की लागत से लगाया गया ट्यूबवेल इन दिनों धूल फांक रहा है।

ग्राम पंचायत की ओर से देखरेख के अभाव में इसके उपकरण जंग खा रहे हैं। वहीं बिजली का बिल जमा नहीं करने से खफा डिस्कॉम ने यहां लगा ट्रांसफॉर्मर ही वापस जमा कर दिया। ऐसे में अब ग्रामीणों को इस ट्यूबवेल एक बूंद पानी भी नसीब नहीं हो रहा है।

दरअसल, कस्बे के नयाखेड़ा में बीते कई सालों से पाइपलाइन पुरानी होने एवं अत्यधिक दूरी के कारण जलापूर्ति की समस्या बनी हुई थी। हाल यह था कि लोगों को एक मटकी पानी के लिए भी दूर-दूर तक भटकना पड़ता था। ऐसे में ग्रामीण पेयजल मिशन योजना के तहत तत्कालीन सरपंच सुकीदेवी कुम्हार के कार्यकाल में नयाखेड़ा आबादी के बीचोंबीच करीब साढ़े तीन लाख रुपए की लागत से ट्यूबवेल खुदवाकर डिस्कॉम से बिजली कनेक्शन लिया था। इसके बाद जलदाय विभाग की ओर से नियमित रूप से जलापूर्ति की जाने लगी। इससे ग्रामीणों को भी खासी राहत मिली थी।

एक साल में ही बिगड़ गई व्यवस्था

नयाखेड़ा बस्ती के ग्रामीणों की यह खुशी एक साल बाद ही काफूर हो गई। ग्रामीणों ने बताया कि गत पांच वर्षों से देखरेख व ग्राम पंचायत की कथित लापरवाही के चलते यह टयूबवेल नाकारा पड़ा है। आलम यह है कि इस नकारा टयूबवेल को फिर से शुरू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

कबाड़ होने लगे उपकरण

देखरेख के अभाव में लाखों की लागत से बने इस टयूबवेल की हालत यह है कि मोटर जंग खा रही है। वहीं विद्युत उपकरण कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। डिस्कॉम में ग्राम पंचायत की ओर से सरकार धन से डिमांड राशि भरने से ट्रासफार्मर तो मिल गया, लेकिन समय पर बिजली बिल जमा नहीं हो पाया। ऐसे में करीब डेढ़ साल पहले डिस्कॉम के अधिकारियों ने ट्रांसफॉर्मर यहां से हटाकर वापस जमा कर दिया।

टैंकरों से लाना पड़ रहा है पानी

ग्राम पंचायत की ओर से इसका रखरखाव नहीं किया जा रहा है। ऐसे में लाखों की लागत से ट्यूबवेल लगाने का क्या औचित्य है। आज भी बस्ती में पेयजल संकट बना हुआ है। ग्रामीणों को पांच सौ रुपए चुकाकर टैंकर पीने के पानी का जुगाड़ करना पड़ रहा है।

- जबरसिंह मुलोणी, ग्रामीण 

समस्या समाधान के प्रयास नहीं

इस टयूबवेल की दुर्दशा को लेकर कई बार पंचायत में प्रस्ताव लेकर उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन दिया जा चुका है। लेकिन समस्या समाधान के लिए काई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। ऐसे में ग्रामीण विकास के सरकार के दावे खोखले साबित हो रहे हैं। जलदाय विभाग की ओर से सात से दस दिन में एक बार जलापूर्ति की जा रही है। जिससे बस्ती के आधे घरों में ही पानी पहुंच पा रहा है।

-बरकत खान मोयला, वार्ड पंच

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