रक्षा बंधन : इस बार 11 घंटे 26 मिनट रहेगा राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

जागरूक टाइम्स 354 Aug 23, 2018

भीनमाल @ जागरूक टाइम्स

रक्षाबंधन का पर्व रविवार को मनाया जाएगा। इस दिन बहन अपने भाइयों को राखी बांधती हैं। इसके साथ ही उनकी लंबी उम्र की कामना करती है। इस बार रक्षाबंधन पर राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 11 घंटे 26 मिनट का है। 

शास्त्री प्रवीण त्रिवेदी ने बताया कि रक्षाबंधन के मौके पर अक्सर भद्रा काल में राखी नहीं बांधी जाती है, लेकिन इस साल भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो जाएगी। भाई-बहन के अटूट प्रेम का पर्व रक्षाबंधन का त्यौहार श्रावणी पूर्णिमा 26 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन पूर्णिमा तिथि शाम 5.27 तक होने से यह त्यौहार पूरे दिन मनाया जाएगा। शास्त्रानुसार रक्षाबंधन में भद्रा काल निषेध होता है, जो इस बार पूरे दिन नहीं है। चार वर्ष बाद ऐसा संयोग बन रहा हैं। शास्त्री ने बताया कि पिछले वर्ष राखी का त्यौहार भद्रा और ग्रहण होने के कारण बहुत ज्यादा सौभाग्यशाली नहीं माना गया था, लेकिन इस बार राखी ग्रहण से मुक्त है।

यह भी पढ़े : गौरव यात्रा के नाम पर आर्थिक अपराध कर रही सरकार : तिवाड़ी 

नहीं बनेगा बाधक धनिष्ठा पंचक

शास्त्री प्रवीण त्रिवेदी ने बताया कि रक्षा बंधन के दिन धनिष्ठा नक्षत्र होने के कारण पंचक रहेगा, लेकिन राखी बांधने में यह बाधक नहीं बनेगा। धनिष्ठा के तीसरे चरण से रेवती तक पंचक कहा जाता है। पंचक को लेकर भ्रांति यह है कि इसमें कोई भी कार्य नहीं करना चाहिए। हालांकि  पंचक में अशुभ कर्म वर्जित है, लेकिन शुभ कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं है। रखाबंधन पर्व के सिंह के सूर्य में आने से इसकी महत्ता और बढ़ गई है। प्रात: उठकर स्नान-ध्यान करके उज्ज्वल तथा शुद्ध वस्त्र धारण करें।

घर को साफ करके चावल के आटे का चौक पूरकर मिट्टी के छोटे से घड़े की स्थापना करें। चावल, कच्चे सूत का कपड़ा, सरसों व रोली को एक साथ मिलाए। फिर पूजा की थाली तैयार कर दीप जलाए। उसमे मिठाई रखें। इसके बाद भाई को पीढ़े पर बिठाए। भाई को पूर्वाभिमुख, पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बिठाये। बहन का मुह पश्चिम दिशा में होना चाहिए। इसके बाद भाई के माथे पर टीका लगाकर दाहिने हाथ पर रक्षासूत्र बांधे। आरती उतारे फिर भाई को मिठाई खिलाएं। 

यह भी पढ़े : सर्पदंश से घायल पांच लोग अस्पताल में भर्ती 

बहन यदि बड़ी हो तो आशीर्वाद दें और यदि छोटी हो तो बड़े भाई को प्रणाम कर आशीर्वाद ग्रहण करें। शास्त्री ने बताया कि इसे श्रावणी भी कहते हैं। इस दिन यजुर्वेदी द्विजों का उपाकर्म होता है। उत्सर्जन, स्नान-विधि, ऋषि तर्पणादि करके नवीन यज्ञोपवीत धारण किया जाता है। ब्राह्मणों का यह सर्वोपरि त्यौहार माना जाता है। ब्राह्मण अपने यजमानों को इस दिन राखी बांधते हैं।

ताज़ा खबरों के लिए हमें फॉलो करे फेसबुक | इंस्टाग्राम  | ट्विटर 

Leave a comment