सांचौर: ग्रामीणों ने साढ़े चार साल में बचाई आठ सौ हिरणों की जान

जागरूक टाइम्स 257 Mar 13, 2019

सांचौर। वन्य जीवों के संरक्षण को लेकर वन विभाग महज खानापूर्ति कर कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। जिसकी बदौलत शहर में प्रतिदिन इलाज व संरक्षण के अभाव में औसतन तीन हिरणों की मौत प्रतिदिन हो रही है। विभाग के पास इलाज व घायल हिरणों के रखरखाव के लिए कुछ नहीं है। धमाणा गोलिया स्थित अमृतादेवी उद्यान में ग्रामीणों ने अपने स्तर पर शिकारी कुत्तों व विभिन्न हादसों में घायल हिरणों के लिए व्यवस्था कर मिसाल कायम कर पिछले साढ़े चार साल में करीब आठ सौ हिरणों की जान बचाई है।

जिसमें विभिन्न हादसों में शिकार करीब तीन सौ हिरण इलाज के बाद उक्त उद्यान में विचरण कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर क्षेत्र मेंं वन्य जीवों के संरक्षण के लिए विभाग द्वारा कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से क्षेत्र में वन्य जीवों की तादाद तेजी से घट रही है। शिकारी कुत्तों व शिकारियों द्वारा मौका पाकर वन्य जीवों का शिकार किया जाता है। वन विभाग द्वारा वन्य जीवों के संरक्षण के लिए न तो गश्त की जाती है और न ही अस्थाई चौकी का निर्माण किया जा रहा है।

जिससे हिरणों के शिकार को लेकर घटनाओं में बढ़ोतरी हो रही है। क्षेत्र में हर रोज कई वन्य जीव नीलगाय, हिरण, खरगोश, मोर, बंदर सहित वन्य जीव हादसे का शिकार हो रहे हैं। जिसमें मुख्य रूप से सड़क हादसा, श्वानों द्वारा हमला, विद्युत करंट सहित कई प्रकार से घायल होने के मामले में सामने आ रहे हैं। वहीं दुसरी ओर हिरण बिश्नोई समाज के धार्मिक आस्था से जुड़ा होने की बदौलत अधिकांश बार शिकार की वारदात के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो जाती है। जिसके बावजूद विभाग द्वारा उक्त मामले में गंभीरता की बजाय हल्के में लिया जाता है।

चंदा उगाह से करते हिरणों का इलाज
धमाणा का गोलिया स्थित अमृतादेवी उद्यान में ग्रामीणों के संरक्षण से करीब तीन सौ हिरण स्वच्छंद हिरण विचरण कर रहे हैं। जो विभिन्न सड़क हादसों व श्वानों के हमले में घायल हो गए हैं। इस दौरान ग्रामीणों द्वारा घायल हिरणों के इलाज के लिए ग्रामीणों द्वारा अस्थाई तौर पर की गई व्यवस्था के लिए इलाज का खर्च ग्रामीणों द्वारा चन्दा उगाही कर अपने स्तर से किया जा रहा है। वन विभाग को कई बार अवगत करवाने के बावजूद कोई कार्यवाहीं नहीं होने से घायल वन्य जीवों को बचाने को लेकर ग्रामीणों द्वारा अपने स्तर पर व्यवस्था की जा रही है। जिसमें ग्रामीणों ने अपने स्तर पर एक निजी पशु कम्पाउंडर को भी लगा रखा है, जो घायल हिरणों का इलाज करते हैं।

रेक्सयू सेन्टर नहीं होने से परेशानी
क्षेत्र में हादसे के शिकार वन्य जीव रेक्सयू सेन्टर के अभाव में दम तौड़ देते हैं। कई बार वन्य जीव प्रेमियों द्वारा सड़क हादसे के शिकार वन्य जीव को लेकर पहले इलाज के लिए घूमते हैं। ईलाज के बाद रखने की व्यवस्था नहीं होने से परेशानी रहती है।

जिससे कई बार वन्य जीव प्रेमी हादसे के शिकार वन्य जीवों को घरों में रखकर पालन पोषण करते हैं। वन विभाग द्वारा क्षेत्र में सुविधा नहीं होने को लेकर वन पालक पाबूसिंह ने बताया कि रेक्सयू सेंन्टर के अभाव में यहां नहीं रख पाते हैं एवं उन्होंने वन प्रेमियों से आग्रह किया कि वन्य जीव के छोटे बच्चों को श्वानों के हमले से शिकार होने से मां से छुड़ाकर नहीं लाएं एवं वहां ही उसकी सुरक्षा रखे। सांचौर व चितलवाना उपखंड क्षेत्र में रेक्सयू सेंटर नहीं होने एव वन्य जीव ज्यादा संख्या में हादसे व शिकार होने के मामले सामने आ रहे हैं।

प्राकृतिक स्वच्छंद विचरण करते हिरण
अमृता देवी उद्यान में संरक्षण में विचरण कर रहे हिरणों के लिए ग्रामीणों द्वारा हरा व सूखा चारा लाकर खिलाया जाता है। वहीं उद्यान में बीमार व छोटे हिरण के बच्चों को गाय का दूध पिलाया जाता है।  

इनका कहना है
उद्यान में पर्यावरण के साथ-साथ वन्य संरक्षण का कार्य भी किया जा रहा है। जिसके तहत घायल हिरणों की सुरक्षा व इलाज ग्रामीणों द्वारा चंदा उगाही कर किया जा रहा है। वन विभाग से कई बार मांग करने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। विभाग को सांचौर क्षेत्र में रेस्क्यू सेंटर जल्दी खोलना चाहिए। - सुजाराम पंवार, अध्यक्ष अमृता देवी स्मृति जन सेवा संस्थान

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