रानीवाड़ा : दशामाता की स्थापना आज, दस दिन रहेगी धमचक

जागरूक टाइम्स 134 Jul 20, 2020

हरियाली अमावस्या पर स्थापना के साथ होगी पूजा अर्चना

रानीवाड़ा। कहते है कि जब मनुष्य की दशा ठीक होती है तब उसके सब कार्य अनुकूल होते हैं लेकिन जब यह प्रतिकूल होती है तो कई प्रकार की तकलीफे झेलनी पड जाती है, इसी दशा को दशा माता कहा जाता है। हर वर्ष की भाँति हरियाली अमावस्या से दस दिन तक चलने वाले दशा मॉ के व्रत आज सोमवार से प्रारंम्भ हो रहे है, दस दिन तक दशा माता की पूजा-अर्चना के साथ रात्रि को गरबो की धमचक रहेगी। दस दिवसीय चलने वाले दशा मॉ के व्रत को लेकर रविवार को महिलाओं ने दशा माँ की प्रतिमा व पुजा श्रृगार की सामग्री की जमकर खरीददारी की। आज सोमवार से प्रारंम्भ हो रहे दशा माता के व्रत को लेकर लोगों मे उत्साह का माहोल है, मां के प्र्रति लोगों की आस्था भी बढ़ रही है। नौ दिन तक कस्बे समेत आस-पास के क्षेत्रों में दशा माता के गरबों की धूम भी शुरू होगी, तदरूप नौ दिन तक रात्री मे कस्बे सहित आस-पास के गांवो में गरबों का आयोजन होगा।

शाम को महिला श्रद्धालुओं की ओर से दशा माता की पूजा अर्चना कर गरबें खेले जाते है। महिलाएं दशा माता की नौ दिन पूजा अर्चना कर सुख समृद्धि की कामना कर परिवार की खुशहाली को लेकर दशा माता के उपवास भी रखती है। दसवें दिन प्रतिमाओं के विर्सजन के साथ दशा मां महोत्सव का समापन होगा। राजस्थान और गुजरात प्रांत में दशामाता व्रत पूजा का विशेष विधान है, सौभाग्यवती महिलाएं ये व्रत अपने पति की दीर्घ आयु की कामना के लिए, और कुंवारी कन्याएं मन पसन्द वर प्राप्त करने के लिए रखती है प्रातरू जल्दी उठकर आटे से मां के पूजन के लिए विभिन्न गहने और विविध सामग्री बनायी जाकर शाम को विधि विधान के साथ पूजा की जाती है।

हरियाली अमावस्या को होगी दशा माता की स्थापना - हरियाली अमावस्या पर सोमवार को घरों में धूमधाम से दशा माता की स्थापना की जाएगी। इसके लिए बाजार में दशा माता की कई आकर्षक प्रतिमाएं बिक्री के लिए लाई गई हैं। रविवार को महिलाओं और युवतियों ने ये प्रतिमाएं और श्रृंगार सामग्री खरीदी। दशा माता का यह पर्व दस दिन तक चलेगा। इस दौरान सौभाग्य की कामना के लिए महिलाएं व्रत रखेंगी। व्रत के अंतिम दिन ढोल ढमाकों के साथ प्रतिमा को तालाब या पानी से भरे बांध में धूमधाम से विसर्जित किया जाता हैं। दशामाता का यह पर्व मुख्य रुप से गुजरात में मनाया जाता है। सीमावर्ती क्षेत्र होने के कारण जालोर जिले के सांचोर, रानीवाड़ा, सिरोही के रेवदर, आबुरोड़, बाड़मेर के सीमावर्ती ईलाकों में पिछले करीब एक दशक से इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है। कई जगहों पर गरबा का भी आयोजन होता है। रानीवाड़ा तहसील के जाखड़ी गांव में दशा माता का मंदिर हैं। जहां भक्तगण दर्शनार्थ जाते हैं।

पूजन विधि - नौ सूत का कच्चा धागा एवं एक सूत व्रत करने वाली के आंचल से बनाकर उसमें गांठ लगाकर दिन भर व्रत रखने के बाद शाम को मां की पूजा की जाती है। नौ दिन के व्रत तक तो शाम को पूजन होता है। दसवें दिन के व्रत में दोपहर के पहले ही पूजन कर लिया जाता है। जिस दिन दशा माता का व्रत हो उस दिन पूजा ना होने तक किसी मेहमान का स्वागत तक नही किया जाता। एक नोंक वाले पान पर चंदन से दशा माता की मूर्ति बनाई जाती है। इस प्रकार दस दिन तक विधि-विधान पूर्वक पूजन करने से दशा माता प्रसन्न होती हैं तथा अपने भक्तों की हर मनोकामना पूरी करती हैं।

माता की मूर्तियों की हुई खरीदारी - रानीवाड़ा हरियाली अमावस्या से शुरू होने वाले दशा माता के दस दिवसीय पर्व को लेकर कस्बे में दशा माता की मूर्तियों की जमकर खरीदारी हुई। महिलाएं दशा माता की मूर्तियां शुभ मुहूर्त में घर लेकर आई, जिसकी सोमवार को विधि विधान के साथ स्थापना की जाएगी। पर्व को लेकर कस्बे समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं-बालिकाओं में काफी उत्साह बना हुआ हैं। महिलाएं दस दिनों तक उपवास रखकर दशा माता की आराधना में लीन रहेगी।


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