जालोर में इस कुरीति के खिलाफ आवाज गूंजी

जागरूक टाइम्स 387 Nov 15, 2018

जालोर। विधिक सेवा सप्ताह के तहत विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन गुरुवार को जालोर-राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालोर की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं जिला न्यायाधीश आर.पी. सोनी के निर्देशन में गुरूवार को जीएनएम ट्रेनिंग सेंटर, सामान्य चिकित्सालय जालोर में विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। 

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जालोर के सचिव नरेन्द्रसिंह (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) ने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप है। इस कुरीति को मिटाने के लिए हम सब को आगे आने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह संज्ञेय व गैर जमानती अपराध है। बाल विवाह रोकथाम के लिए उपखंड मजिस्ट्रेट को बाल विवाह निषेश अधिकारी बनाया गया है। बाल विवाह करवाने वालों, करवाने में शामिल होने वालों को 2 साल तक की कैद या एक लाख रूपये तक का जुर्माना या दोनों सजाए दी जा सकती है। इस दौरान उन्होंने मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्तियों के अधिकारों की भी विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्ति मनोचिकित्सालयों में भर्ती होने और उपचार प्राप्त करने का अधिकारी है, उन्होंने बताया कि अधिनियम की धारा 23 के अनुसार मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्ति की सुरक्षा के लिए कार्यवाही करने के लिए संबंधित क्षेत्र के थानाधिकारी, पुलिसकर्मी उत्तरदायी है। इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों के अधिकारों, महिलाओं के अधिकारों की भी जानकारी दी। कार्यक्रम के दौरान नरेन्द्रसिंह ने विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से चलाये जा रहे कार्यक्रमों भी विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान पीएमओ डॉ एसपी शर्मा, नर्सिंग ट्रेनिंग सेंटर की प्रिसिपल श्रीमती निमि डी फ्रांसिस, टीचिंग स्टाफ शिव कुमार दवे ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ बीएल मावलिया, नर्सिंग सुप्रिडेंट नारायण सोलंकी, वीना तेतरवाल, प्रेम परिहार, पवन ओझा के अलावा कई नर्सिंग स्टूडेंट उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान बाल विवाह प्रतिषेध कानून, मानसिक रूप से अस्वस्थ्य व्यक्तियों के अधिकार सहित अन्य कानूनों व योजनाओं की जानकारी देने वाले पंपलेट का वितरण किया गया।

Leave a comment