सड़क से दिल्ली पहुंची भीनमाल कांग्रेस की लड़ाई , अब यह होगा पार्टी आलाकमान का अगला दांव...

जागरूक टाइम्स 1329 Jul 10, 2018

भीनमाल @ जागरूक टाइम्स

आगामी विधानसभा चुनावों में भीनमाल विधानसभा क्षेत्र से कंाग्रेस पार्टी में टिकट को लेकर उपजा विवाद दिनों-दिन बढ़ता जा रहा है। गत दिनों भीनमाल में आयोजित मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष व युकां प्रदेश महासचिव के बीच वर्चस्व को लेकर उपजा विवाद दिल्ली तक पहुंच गया है। युकां प्रदेश महासचिव ऊमसिंह राठौड़ समर्थकों ने मंगलवार को दूसरे दिन कांग्रेस कार्यालय के समक्ष संाकेतिक रूप से धरना देकर जालोर जिलाध्यक्ष के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की। राजनीतिक जानकारों का मानें तो विधानसभा चुनावों तक इसी तरह की गुटबाजी हावी रही तो इसका खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ सकता है। हालांकि इस मामले में पार्टी आलाकमान वरिष्ठ नेताओं से रायशुमारी करके किसी एक के खिलाफ कार्यवाही भी कर सकती है। या फिर चुनावी दौर की वजह से टिकट वितरण तक खामोशी भी अख्तियार कर सकती है।

दरअसल, गत 24 जून को स्थानीय क्षेमंकरी माता की तलहटी पर कांग्रेस पार्टी के मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम स्थल पर बैनर सहित मंच की अन्य व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीतसिंह व युकां प्रदेश महासचिव ऊमसिंह राठौड़ समर्थकों के बीच विवाद की स्थिति बन गई थी। प्रभारी सह सचिव विवेक बंसल सहित अन्य पदाधिकारियों के पहुंचने के बाद यह विवाद गरमा गया था। इस दौरान जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीतसिंह द्वारा कुछ कार्यकर्ताओं को बाहरी बताते हुए अनुशासन तोडऩे वालों के विरुद्ध कठोरता बरतने की कथित रूप से चेतावनी दी थी। जिससे नाराज ऊमसिंह राठौड़ समर्थकों ने नारेबाजी कर विरोध जताते हुए उनका अपमान करने का आरोप लगाया था। 

पहले समझाइश, फिर भी लड़ाई सड़क तक

विवाद बढ़ता देख प्रभारी सहसचिव ने मोर्चा सभंालकर दोनों पक्षों से समझाइश कर मामले को शांत किया था, लेकिन उसके बाद से दोनों गुटों की लडाई सड़क पर आ गई है। इसी बात को लेकर ऊमसिंह राठौड़ के समर्थन में पार्षद पुखराज विश्नोई, युंका लोकसभा अध्यक्ष आमसिंह परिहार व महासचिव सर्जनसिंह राठौड़ के नेतृत्व में करीब दो दर्जन लोगों ने सोमवार को दिल्ली में कंाग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत व प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट से मुलाकात कर जिलाध्यक्ष के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की मांग की। मंगलवार को इन लोगों ने कंाग्रेस कार्यालय के समक्ष सांकेतिक रूप से धरना देकर आक्रोश जाहिर किया। इस अवसर पर पंचायत समिति सदस्य रूपाराम विश्नोई, वरिष्ठ कांग्रेस नेता खंगाराराम जाट, हरदानसिंह, सालूराम विश्नोई, पूर्व सरपंच अजीतसिंह, बलवंतसिंह कावतरा, पन्नाराम राणा, पुरखाराम मेघवाल, मुगाराम प्रजापत, सांकलाराम देवासी, हितेश माली, भागीरथ पालड़ीया, ठाकरनाथ, रेशमाराम पायुआ व अशोक हरिजन सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे। 

कांग्रेस की राजनीति में भूचाल

इधर, ऊमसिंह राठौड़ समर्थकों द्वारा जिलाध्यक्ष का जगह-जगह विरोध व पार्टी हाईकमान से कारवाई की मांग से जालोर जिले में कंाग्रेस की राजनीति में भूचाल आ गया है। जिसको लेकर जालोर जिले में भाजपाई गदगद नजर आ रहे हैं। हालांकि गत दिनों कार्यकर्ताओं की नब्ज टटोलने व नाराजगी दूर करने आए ऊर्जामंत्री पुष्पेन्द्रसिंह राणावत को जालोर जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के आक्रोश का सामना करना पड़ा था। कई स्थानों पर रात्रि में तो कई जगह मुख्यालय की बजाय गांवों में बैठक का आयोजन करना पड़ा था। कुल मिलाकर दोनों ही पार्टी में टिकट के दावेदारों की लंबी फौज होने की वजह से विवाद तो है, लेकिन अभी तक भाजपा की लड़ाई बंद कमरे तक सीमित है, जबकि कंाग्रेस की लड़ाई सड़क तक पहुंच गई है।

यह है विवाद की वजह

भीनमाल विधानसभा से दो बार विधायक रहे चुके वर्तमान जिलाध्यक्ष डॉ. समरजीतसिंह इस बार कांग्रेस पार्टी से प्रबल दावेदार माने जाते हैं, लेकिन वर्ष 2008 में डॉ. समरजीतसिंह 20 हजार से अधिक मतों से हारने की वजह से वर्ष 2013 में पार्टी गाइडलाइन के आधार पर उनका टिकट काटकर आहोर विधानसभा क्षेत्र के चादंराई निवासी ऊमसिंह राठौड़ को मौका दिया गया था। हालांकि ऊमसिंह चुनाव में विधायक पूराराम चौधरी के सामने टिक नहीं पाए और 40 हजार से अधिक मतों से हार का सामना करना पड़ा था। अब आगामी विधानसभा चुनावों में दोनों ही नेता विधायक का चुनाव लडऩा चाहते हैं। इस बात को लेकर दोनों के बीच विवाद बना हुआ है।

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