ढाई करोड़ में सड़क का निर्माण, दस दिन में ही उधडऩे लगा डामर

जागरूक टाइम्स 1547 Aug 24, 2018

- सडक़ निर्माण में डामर की गुणवत्ता पर सवाल, गड्ढों से अटने लगी करोड़ों की सड़क

बागोड़ा @ जागरूक टाइम्स

सालों से बदहाल का दंश झेल रही वाटेरा-राऊता सड़क से आखिरकार क्षेत्रवासियों को उस समय राहत मिली जब सार्वजनिक निर्माण विभाग ने इस सड़क मार्ग के लिए दो करोड़ 42 लाख का बजट पारित किया। सड़क निर्माण शुरू होने पर ग्रामीणों को भी लगा की उनको परेशानी से निजात मिल गई, लेकिन उनकी यह उम्मीदें दस दिन में ही काफूर होने लग गई है। सड़क निर्माण को महज दस दिन ही गुजरे है कि अब इसका डामर उधडऩा शुरू हो गया। ऐसे में रोड में घटिया सामग्री के उपयोग एवं गुणवत्ता को लेकर भी सवालियां निशान लगने लगे हैं। वहीं ग्रामीण भी सड़क के टिकाऊपन को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।

यह भी पढ़े : अल्लाह और अमरीका के बीच नाक की लड़ाई में फंसा तुर्की 

दरअसल, उपखंड मुख्यालय से बाड़मेर सरहद तक बनने वाली इस सड़क के लिए सरकार की ओर से दो करोड बयालीस लाख रुपए का बजट स्वीकृत हुआ है। जिनमें प्रति किलोमीटर करीब बाइस लाख रुपए की लागत का अनुमान है। ग्यारह किमी तक बनने वाली यह सड़क बाड़मेर सरहद से तीन किमी जालोर जिले में अधूरी रहेगी। सरकार द्वारा स्वीकृत करोड़ों रुपए का फायदा राहगीरों व वाहन चालकों को मिलना मुश्किल ही लग रहा है। ऐसे में सरकारी धन से निर्धारित मापदंडों के सड़क नहीं बनने से इसके दुरुपयोग की आशंका सताने लगी है। अधिकारी एवं ठेकेदारों की मिलीभगत के चलते यह सडक़ आगे बन रही है तो पीछे टूटने लगी है। ऐसे में यह सड़क अपने गारंटी पीरियड तक कैसे टीक पाएगी इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।

सड़क निर्माण को लेकर ग्रामीणों एवं स्थानीय बाशिंदों ने आरोप लगाया है कि जो डामर सड़क निर्माण के दस दिनों बाद ही क्षतिग्रस्त हो जाए तो गुणवत्ता में खरी नहीं उतर सकती है। करीब दस दिन पहले बागोड़ा महादेव मंदिर से लेकर नया चैनपुरा गांव तक करोड़ों की लागत से सड़क का डामरीकरण किया गया है, लेकिन डामर की गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखने एवं निर्धारित मापदंडों को दरकिनार रखने से कई जगह से यह सड़क अभी से उधडऩे लगी है। जो सड़क की गुणवत्ता पर सवालिया निशान पैदा कर रही है। इस संबंध में सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता तेजाराम विश्नोई से जानकारी करने पर उन्होंने भी स्वीकार किया की सड़क बीच में से कई जगह टूटी हुई है, लेकिन वो बारिश से क्षतिग्रस्त हुई है। उसे पुन: ठेकेदार से मरम्मत करवाई जाएगी।


जबकि इस नवीन निर्माणाधीन सड़क के बनने के महज दस दिनों मे इतनी जोर की बारिश भी नहीं हो पाई है। पांच दिन पहले महज शाम के वक्त एक बार बारिश हुई है। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि ठेकेदार पर कार्रवाई की जगह अधिकारी ठेकेदार का बचाव करते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब बागोड़ा से चैनपुरा तक छह किमी डामर सड़क का निर्माण हो चुका है और दस दिनों में ही यह डामर उखडऩे लगा है। तो यह मुख्य जालोर-गुड़ामालानी सड़क मार्ग होने से यहां प्रतिदिन सैकड़ों भारी व हल्के वाहनों की आवाजाही होती है, जिसमें माइंस के पत्थरों से भरे ट्रबों गुजरते हंै। ऐसे में यह डामर सड़क सालों तो क्या कुछ महीने ही नहीं टिक पाएगी। 

यह भी पढ़े : गौरव यात्रा के नाम पर आर्थिक अपराध कर रही सरकार : तिवाड़ी

नही है सूचना बोर्ड

करोड़ों रुपए की लागत से निर्माणाधीन इस सड़क के निर्माण में उपयोग में ली जाने वाली सामग्री की निर्धारित मात्रा व मटेरियल से संबंधित सूचना बोर्ड तक उपलब्ध नहीं है। ऐसे में गुणवता की जानकारी आमजन को मुहैया तक नहीं हो रही है।

इनका कहना है 

सड़क निर्माण में डामर की मात्रा कम होने से दस दिनों में ही सड़क से डामर उखडऩे लगा है ओर उसकी जगह सड़क गड्ढों में तब्दील हो रही है। ऐसे सरकार के करोड़ों रुपए के बजट का समुचित फायदा मिलना मुश्किल है। इसके हाल देख कर नहीं लगता कि यह सड़क तीन साल के गारंटी पीरियड तक टिक पाएगी।

- जबरसिंह चौहान उपसरपंच प्रतिनिधि बागोड़ा

मरम्मत करवाएंगे

हमें शिकायत मिली थी कि बागोड़ा चैनपुरा के बीच सड़क निर्माण के बाद डामर उखलकर गड्ढे होने लगे हैं। जिसकी जांच करने में खुद मौके पर गया था। सड़क कुछ जगह बारिश की वजह से टूटी है। उसे पुन ठेकेदार से ठीक करवा दी जाएगी और अभी तो सड़क का निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ है। 

- तेजाराम विश्नोई, सहायक अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग, भीनमाल

ताज़ा खबरों के लिए हमें फॉलो करे फेसबुक | इंस्टाग्राम  | ट्विटर

Leave a comment