22 हजार करोड़ की प्रस्तावित योजनाओं को सीएम से बंधी बजट की उम्मीदें, कई घोषणाओं की संभावना

जागरूक टाइम्स 333 Aug 30, 2018

भीनमाल @ जागरूक टाइम्स

भीनमाल विधानसभा सहित जिले के विकास के लिए जन प्रतिनिधियों की पहल पर विभागीय अधिकारियों की ओर से तैयार करीब 22 हजार करोड़ की योजनाओंं को मुख्यमंत्री से बजट की मंजूरी का इंतजार है। सीएम के जालोर जिले में आगमन के दौरान यदि मंजूरी मिलती है तो भीनमाल विधानसभा सहित जालोर जिले के विकास की नई उम्मीदें जगेगी। जिसका फायदा आने वाले समय में भाजपा को मिलने की प्रबल संभावना है । सत्ताधारी दल की ओर से लाखों प्रयासों के बावजूद योजनाओं पर अमल नहीं होने की वजह से क्षेत्रवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सरकारी अनदेखी के चलते क्षेत्र का विकास ठप पडा है। जिसका खामियाजा क्षेत्रवासियों को भुगतना पड़ रहा है। योजनाओं की मंजूरी के लिए क्षेत्रवासियों द्वारा समय-समय पर धरना प्रदर्शन के माध्यम से सरकार व प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास भी किया गया, लेकिन सरकार के पास धन की कमी के चलते ये योजनाएं आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अब सीएम के भीनमाल विधानसभा सहित जालोर जिले में आगमन के दौरान बजट आवंटन को लेकर खासी उम्मीदें बनी हुई है। इन योजनाओं को लेकर सांसद व विधायक भी प्रयासरत है, लेकिन कितने सफल होते हंै यह आने वाला समय ही बताएगा। बजट में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की अग्नि परीक्षा भी होने वाली है।


1. माही-बजाज परियोजना : जालोर व बाड़मेर जिले की कायाकल्प करने के लिए वर्ष 1966 में राजस्थान व गुजरात सरकार के बीच समझौते पर सिंचाई विभाग राजस्थान की ओर से 16 नवंबर 1984 में क्षेत्र में एक वृत कार्यालय का सृजन कर सर्वे के दौरान 259 किलोमीटर टीमरुवा गांव (डूंगरपुर) से विशाला (सायला) तक सुरंग के जरिए करीब 3340 करोड़ की लागत से पानी लाना प्रस्तावित था। वर्तमान में यह परियोजना करीब 20 हजार करोड़ तक पहुंच गई है। यह परियोजना को मूर्त रूप देने के लिए मुख्य अभियंता माही-बजाज सागर प्रोजेक्ट बांसवाड़ा ने 28 फरवरी 2006 को माही बेसिन से लूनी बेसिन तक सर्वे व इन्वेस्टिगेशन के लिए एक करोड़ रुपए की निविदा आमंत्रित की गई। 30 जुलाई 2013 को तत्कालीन जालोर जिला कलेक्टर राजन विशाल ने राज्य सरकार को अद्र्धशासकीय पत्र लिखकर अमल की अनुशंषा की थी। 11 फरवरी 2015 को जिला मुख्यालय पर प्रभारी मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर की मौजूदगी में आयोजित जिला परिषद की बैठक में इस परियोजना पर अमल करवाने का प्रस्ताव लिया गया था। 23 फरवरी 2015 को तत्कालीन जिला कलेक्टर जितेंद्रकुमार सोनी ने पुन: अद्र्धशासकीय पत्र भेजकर उक्त परियोजना पर अमल की अनुशंषा की थी। 25 फरवरी 2015 को सीएम ने जल संसाधन मंत्री रामप्रताप चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन कर माही-बजाज परियोजना का विस्तृत अध्ययन करने, परियोजना की मंजूरी व कार्य पूर्ण होने तक खोसला कमेटी के निर्णयानुसार गुजरात राज्य के सीपू डेम से नहर के माध्यम से 40 टीएमसी व सरप्लस पानी राजस्थान को देने की वैकल्पिक व्यवस्था करने को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर सरकार को सौंपने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन आज दिन तक सीएम के आदेशों पर अमल नहीं हो पाया है।

2. नर्मदा परियोजना ईआर प्रोजेक्ट : करीब 60 हजार की आबादी वाले भीनमाल शहर सहित 307 गांवों व करीब 1000 से अधिक ढाणियों में 2041 की आबादी को आधार बनाकर फ्लोराइडमुक्त पेयजल उपलब्ध करवाने के लिए 5 अगस्त 2013 को करीब 372.70 करोड़ रुपए मंजूर कर प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई। 24 सितंबर 2013 को कार्यादेश के साथ ही यह कार्य सितंबर 2016 में पूर्ण करने की सीमा निर्धारित की गई, जिसमें पालड़ी सोलंकीयान में करीब 70 हैक्टेयर भू-भाग में डिग्गी(आरडब्ल्यूआर) निर्माण के अलावा डीगांव, क्षेमंकरी माता मंदिर भीनमाल व रामसीन में ब्रेक-अप पोइंट (इंटर मिडियट बूस्टिंग स्टेशन) तथा करीब 144 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाना प्रस्तावित है। इस परियोजना में तीन वर्षों में मात्र 105 करोड़ का ही बजट आवंटित होने के कारण अब तक मात्र 25 प्रतिशत ही कार्य पूर्ण हो पाया है। बजट के अभाव में यह कार्य धीमी गति से चल रहा है। ऐसी स्थिति में मौजूद सरकार के कार्यकाल में फ्लोराइडमुक्त पानी नसीब होना मुश्किल ही नजर आ रहा है।

3. उच्च जलाशय व पाइपलाइन की योजना : राज्य सरकार की ओर से 372.70 करोड़ की मंजूर नर्मदा परियोजना ईआर प्रोजेक्ट के तहत पालड़ी सोलंकीयान से रामसीन वाया भीनमाल तक पाइपलाइन के जरिए पानी पहुंचाना, पालड़ी में डिग्गी और खारा, भीनमाल व रामसीन में पंपिंग स्टेशन का निर्माण करवाना प्रस्तावित है, लेकिन इस पाइपलाइन से भीनमाल शहर, 307 गांवों व करीब 1000 ढाणियों के लिए चार-चार लाख लीटर की प्रस्तावित ईएसआर (उच्च जलाशय) व करीब 1910 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाने के लिए विभाग की ओर से करीब एक वर्ष पूर्व 533 करोड़ की योजना बनाकर मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजी गई थी, लेकिन बजट के अभाव में यह योजना जयपुर मुख्यालय पर अटकी हुई है। योजना के तहत 12 स्थानों पर पंपिंग स्टेशन प्रस्तावित है, जिसके माध्यम से उच्च जलाशयों तक पानी पहुंचाया जाएगा। इसके बाद उच्च जलाशय से गांवों व ढाणियों में पानी की आपूर्ति हो पाएगी।


4. सिवरेज परियोजना : भीनमाल नगरपालिका क्षेत्र में गत वर्ष केंद्र व राज्य सरकार की ओर से संयुक्त रूप से संचालित लघु एवं मध्यम कस्बों में आधारभूत सुविधाओं के निर्माण कार्यक्रम के तहत अरबन इंफ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट और स्मॉल एंड मीडियम टाउन यूआईडीएसएसएमटी योजना के तहत भीनमाल शहर में गंदे व वर्षा के पानी की निकासी के लिए नगरपालिका की ओर से तैयार 160 करोड़ 40 लाख 59 हजार का प्रस्ताव वित्तीय मंजूरी के लिए राज्य सरकार को भेजा गया, लेकिन बजट के अभाव में यह परियोजना पर अब तक मंजूरी नहीं हो सकी।


5. सार्वजनिक निर्माण विभाग के 200 करोड़ के प्रस्ताव अटके : भीनमाल शहर में यातायात की समस्या के स्थाई निराकरण के लिए क्षेत्रीय सांसद देवजी पटेल, भीनमाल विधायक पूराराम चौधरी व रानीवाड़ा विधायक नारायणसिंह देवल की मांग पर भीनमाल शहर के चारों तरफ रिंग रोड, कोड़ी नदी पर ऑवर ब्रिज, भीनमाल-सुंधा माता सडक़ डामरीकरण के निर्माण को लेकर सानिवि की ओर से तैयार 200 करोड़ के प्रस्ताव करीब दो वर्ष से अटके पड़े हैं।


6. डिस्कॉम की 50 करोड़ की योजनाओं को वित्तीय मंजूरी का इंतजार : भीनमाल उपखंड क्षेत्र में विद्युत तंत्र को मजबूत बनाने के लिए भीनमाल डिस्कॉम की ओर से सुंधामाता, जेरण फाटा,खोखा व मोदरान में 132 केवी जीएसएस और थूर, कावाखेडा, खेडा-बोरटा, 72 जिनालय के पास भीनमाल, सेरणा, गजीपुरा, पूनक,तवाव, उचमत व सिणधरा सहित एक दर्जन से अधिक प्रस्तावित 33 केवी जीएसएस वित्तीय मंजूरी के अभाव में दो वर्ष से अटके पड़े हैं।

7. पंचायत समिति में 100 करोड़ के प्रस्ताव अटके : सागी नदी सहित भीनमाल उपखंड क्षेत्र में पंचायत समिति की ओर से तैयार 100 करोड़ के प्रस्ताव वित्तीय मंजूरी के अभाव में अटके पड़े हैं।

8. कॉलेज में रिक्त पदों से शिक्षण व्यवस्था चौपट : जिले के दूसरे बड़े राजकीय पीजी कॉलेज भीनमाल में गत 20 वर्षो से करीब डेढ दर्जन रिक्त पदों के चलते कॉलेज में अध्ययनरत 2 हजार से अधिक छात्र-छात्राओं का भविष्य अंधकार में डूबता नजर आ रहा है। छात्रों की ओर से बार-बार धरना प्रदर्शन व ज्ञापन के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।

9. कन्या महाविद्यालय की दरकार : जालोर जिले के दूसरे बडे शहर भीनमाल में शहर के अलावा बागोड़ा, रानीवाड़ा व जसवंतपुरा उपखंड क्षेत्र के विद्यार्थी अध्ययन के लिए आते हैं, लेकिन कन्या महाविद्यालय के अभाव में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की छात्राओं को कन्या महाविद्यालय की सुविधा उपलब्ध नहीं होने की वजह से परिजनों के दवाब में उच्च शिक्षा से वंचित होना पड़ता है। कन्या महाविद्यालय को लेकर क्षेत्रवासियों द्वारा लंबे समय से मांग की जा रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों की कमजोर पैरवी के चलते कन्या महाविद्यालय की सुविधा से वंचित होना पड़ रहा है।

10. राजकीय अस्पताल को उपग्रेड का इंतजार : भीनमाल उपखंड मुख्यालय पर दानदाता द्वारा करीब 35 वर्ष पूर्व निर्मित राजकीय अस्पताल को सौ बेड में उपग्रेड करवाने के लिए क्षेत्रवासियों द्वारा पिछले लंबे समय मांग की जा रही है। वर्तमान में मरीजों की बढ़ती तादाद की तुलना में अस्पताल में सुविधाओं का टोटा होने की वजह से मरीजों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। आपातकाल में मरीजों को इलाज नहीं मिलने की वजह से जान गंवानी पड़ती है।

11.भीनमाल व रानीवाड़ा में जीरा प्रोसेसिंग युनिट का इंतजार : देश का सबसे अधिक जीरा जालोर जिले में पैदा होता है। किसानों को जीरों का अधिक दाम उपलब्ध करवाने के लिए गत 17 जून 2016 को वंसुधरा सरकार के छह मंत्रियों, सांसद व जिले के विधायकों की मौजूदगी में स्थानीय क्षेंमकरी माता की तलहटी पर आयोजित जिला स्तरीय बूथ सम्मेलन में सहकारिता मंत्री अजयसिंह किल्क ने भीनमाल व रानीवाड़ा उपखंड मुख्यालय पर शीघ्र जीरा प्रोसेसिंग युनिट लगाने की घोषणा की थी, लेकिन दो वर्ष गुजर जाने के बावजूद मंत्री की घोषणा पर अमल नहीं हुआ।

12. ए श्रेणी आर्युवेदिक अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा : भीनमाल उपखंड मुख्यालय पर ए श्रेणी आर्युवेदिक अस्पताल का विशाल भवन बना हुआ है। वर्तमान में मरीजों का रुझान आर्युवेदिक इलाज की तरफ बढ़ा है, लेकिन क्षेत्रवासियों को अस्पताल का लाभ नहीं मिल रहा है।

Leave a comment