बागोड़ा : सौंदर्यकरण की उम्मीद में रंगत खोने लगा खेतलाजी आदर्श तालाब

जागरूक टाइम्स 161 Jul 20, 2020

रिड़मलदान राव बागोड़ा। उपखंड क्षेत्र में सबसे बड़ा माना जाने वाला कस्बे का आदर्श खेतलाजी तालाब जनप्रतिनिधियों व प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के चलते कई वर्षो से बदहाल है। कहने को इस तालाब की खुदाई में लाखों रुपए श्रम के तौर पर मनरेगा योजना में खर्च किए जा चुके है। लेकिन धरातल पर यह तालाब अब भी उपेक्षा का शिकार है। कस्बे के भीनमाल सड़क मार्ग पर स्थित काला गौरा क्षैत्रपाल मंदिर के पीछे स्थित खेतलाजी तालाब उपखंड क्षेत्र के तालाबों में सबसे बड़ा है।इसके लिए लाखों रुपए खर्च कर मॉडल तालाब बनाने की अनुशंसा जाहिर की, लेकिन आज तक इसका सौन्दर्य नहीं निखर पा रहा है। मनरेगा योजना में कस्बे के पच्चासों परिवारों ने जोबकार्ड बनवा लिए, लेकिन हकीकत यह है कि यहां श्रम के तौर पर नाम मात्र के लोग ही काम पर चले है ओर इस वक्त खुदाई कार्य बंद है।

जनभागीदारी से बदलेगी सूरत
वर्षों से कायाकल्प की बाट जोह रहे खेतलाजी तालाब को अब उपखंड अधिकारी श्रीमती मृदुला शेखावत व सहायक प्रशासनिक अधिकारी संजय बोहरा ने मॉडल तालाब के रूप में विकसित करने का सपना जनसहभागिता से संजोया है, यदी ग्रामवासियों, व्यापारियों व स्कूलों के छात्रों के साथ साथ शिक्षक वर्ग की श्रमदान करने मे रुची हो तो निखार लाने में देर नही लगेगी और इससे ग्राम पंचायत की आमजनी भी बढ़ेगी। भामाशाहों से भी सहयोग लेकर इस तालाब का कायाकल्प किया जा सकता है। वहीं यह पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित हो सकता है।

इससे ग्राम पंचायत को भी हर साल लाखों की आमदनी होगी। हालांकि इस तालाब को संवारने के लिए पूर्व में ग्राम पंचायत की ओर से अकाल राहत एंव मनरेगा योजना में खुदाई कार्य श्रमिकों से करवाया गया है। बारिश के दिनों में यहां सुराणा, तिलोड़ा व दादाल गांव से बरसाती पानी की आवक होने के कारण यह तालाब पानी से लबालब हो जाता है, लेकिन तालाब से मिट्टी के अत्यधिक खनन व पैंदे की सूरत बिगडऩे से यहां पानी का लम्बे समय तक ठहराव नहीं हो पा रहा है। जबकि दशक भर पहले इसमें बरसाती पानी का एक साल तक ठहराव रहता था। तालाब की सूरत संवरने से पशुओं के लिए भी पेयजल की किल्लत बड़ी हद तक समाप्त हो जाएगी।

बढ़ेगा रोजगार व आमदनी
मॉडल तालाब से मत्स्य पालन उद्योग को बढ़ावा दिया जा सकता है। जिससे राजस्व बढऩे के साथ ही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। यहां पर नौकायन भी शुरू किया जा सकता है। वहीं गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र व कच्च भुज से आने वाले क्षैत्रपाल देवस्थान के श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगा। इसके अलावा स्थानीय लोगों के लिए यहां दो पल सुकून से बिताने के लिए पर्यटन स्थल के तौर पर भी विकसित हो सकता है लेकिन इसके लिए जनसहभागिता जरुरी है।

बबलों व कचरे से बदहाल तालाब
प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की अनदेखी के चलते कई साल से खेतलाजी आदर्श तालाब बदहाली के आसू बहा रहा है। बबलों के पनपते से आसपास निवासरत लोग शौच जाने के उपयोग में आ रही है और तो और घरों का कुड़ा कचरा भी यहा डालकर स्वच्छ भारत अभियान का खुलेआम मखौल उडा रहे है।


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