दुर्गम पहाड़ी पार करने के बाद होते हैं बाबा राबडनाथ की तपोस्थली के दर्शन

जागरूक टाइम्स 187 Aug 24, 2018

जसवंतपुरा @ जागरूक टाइम्स

कस्बे से सटे लोहियाणागढ़ की पहाड़ी पर स्थित बाबा राबडनाथ की तपोस्थली श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केन्द्र है। यह वहीं जगह है जहां बाबा राबडनाथ ने तपस्या की थी। यहां आज भी उनकी तपोस्थली होने के चिन्ह और उनकी चरण पादुकाएं मौजूद है, जो अब लोगों के लिए श्रद्धा का केन्द्र है। सात किलोमीटर तक ऊंची पहाड़ी पर पैदल चढ़ाई का दुर्गम सफर तय करने के बावजूद श्रद्धालु यहां दर्शनार्थ और मन्नतों के लिए पहुंचते हंै। यह सिलसिला सालों से चला आ रहा है।


दरअसल, जसवंतपुरा क्षेत्र के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहाड़ी पर स्थित गुफा में बनी बाबा राबडनाथ तपस्या स्थली और चारण पादुका के दर्शनार्थ पहुंचते हैं। इस पवित्र स्थान पर कई बार साधु संत श्रावण मास में पूरे महीने तपस्या करते हैं। इस स्थल पर जाने के लिए तीन स्थानों पर झरनों के बहाव स्थल से गुजरना पडता है। जिसके बाद प्राचीन चामुण्डा माता मंदिर तक पहुंच सकते हंै। 

बुर्जगों का कहना है कि इस स्थल पर चामुण्डा माता ने भी रात्रि विश्राम किया था, इसके संकेत चिन्ह के रूप में देवल (चबूतरा) आज भी मौजूद है। उसके समीप ही पहाड़ की चट्टान पर बाबा राबडनाथ का तपोस्थली है। श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने में कोई कठिनाई ना हो इसके लिए इस दुर्गम पहाड़ी के रास्ते पर राबडनाथ के भक्तों ने कलर पेन्ट से संकेत चिन्ह बनाए हंै। ताकि श्रद्धालुओं को आसानी से तपोस्थली तक पहुंचने में मदद मिल सके। 

भक्तों की मनोकमना होती है पूर्ण

यह देवल वंशज के गुरु महाराज के रूप मेें विख्यात है और यहां सालभर श्रद्धालुओं की रेलमपेल लगी रहती है। वहीं श्रावण माह में यहां विषेष तौर पर श्रद्धालुओं द्वारा पूजा-अर्चना कर चूरमे का भोग लगाया जाता है। मान्यता है कि बाबा राबडनाथ की तपस्थली पर जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूर्ण होती है। इस दुर्गम पहाड़ी रास्ते पर कोई भी भक्त रास्ता भटक जाता है तो श्रद्धालुओं का मानना है कि बाबा राबडनाथ किसी वेश में उपस्थित होकर भटके श्रद्धालु की मदद करते हैं। ग्रामीणों का कहना है, कि यह क्षेत्र भालू बाहुल्य है, लेकिन यहां दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बाबा के प्रताप से आज तक किसी भी जानवर ने नुकसान नही पहुंचाया है।

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तपोस्थली पर मन को मिलती है शांति

राबडनाथ बाबा की गुफा के ऊपर विशाल चट््टान है। जिस पर बाबा के पदचिन्ह है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु इनकी पूजा अर्चना करते हंै। यह क्षेत्र दुर्गम है, लेकिन प्रकृति का अनुपम उपहार भी है। श्रावण मास में रिमझिम बारिश के दौरान इस क्षेत्र की छटा निराली और मनभावन हो जाती है। कल-कल करते बहते झरनों में श्रद्धालु स्नान करने के बाद बाबा के दर्शनाथ पवित्र स्थान पर पहुंचते हैं।

कभी कभार इस पवित्र स्थली के पास जंगली जीव जन्तु भी विचरण करते हुए देखकर मन को अपार शांति मिलती है। वर्तमान में शक्तिनाथ महाराज पूजा करते है। साथ ही भामाशाह ने यहां पर एक धर्मशाला का निर्माण करवाया गया है। और रोशनी के लिए सोलर लाइट लगवाई गई है, ताकि श्रद्धालुओं को रात्रि विश्राम में किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं झेलनी पड़े।

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