राजस्थान का रण भेदने के लिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने रचा चक्रव्यूह

जागरूक टाइम्स 378 Nov 30, 2018

जयपुर । देश में पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम में मतदान के बाद पीएम मोदी और बीजेपी अध्यक्ष ने अपना पूरा फोकस राजस्थान और तेलंगाना चुनाव पर लगा दिया है। राजस्थान और तेलंगाना चुनाव धीरे-धीरे अपने चरम पर पहुंचने लगा है। पीएम मोदी और अमित शाह अच्छी तरह से जानते हैं कि तेलंगाना में उनकी पार्टी सरकार बनाने में सक्षम नहीं है, लेकिन त्रिकोणीय चुनाव में अगर ऐसी स्थिति बनी कि अगर किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिलता हैं तो बीजेपी चंद्रशेखर राव की टीआरएस को समर्थन देकर 2019 लोकसभा चुनाव से पहले एनडीए कुनबा बढ़ा सकती है।

पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में अगर बीजेपी को कांग्रेस से कहीं कड़ी टक्कर मिल रही है वहां इकलौता राज्य राजस्थान, ये बात बीजेपी के नेता खुले मंच से स्वीकार कर रहे हैं। राजस्थान की 33 जिलें हैं, जिनमें 200 विधानसभाएं हैं। लेकिन एक बार फिर बीजेपी को राजस्थान में सत्ता के शीर्ष पर पहुंचाने के लिए अमित शाह की चुनावी रणनीति का फोकस 22 जिलों की 120 विधानसभा सीटों पर हैं।

पीएम मोदी ने अबतक राजस्थान में सिर्फ 10 चुनावी रैलियां की हैं। पीएम मोदी की ये रैलियां अलवर, भीलवाड़ा, बेनेश्वर धाम, कोटा, नागौर और भरतपुर में हुई हैं। अपने विदेश दौरे से आने के बाद पीएम मोदी एक बार फिर राजस्थान के रण में कूदकर जोधपुर, हनुमानगढ़, सीकर और जयपुर में भी रैली करने वाले है। अंतिम दिनों में चुनावी माहौल को देखते हुए उनकी दो-तीन रैली बढ़ाई जा सकती है। अमित शाह की चुनावी रणनीति के तहत पीएम मोदी भले ही 10 चुनावी रैली कर रहे हैं, लेकिन इन रैलियों से बड़े मोदी इफेक्ट की उम्मीद है।

अमित शाह भी पीएम मोदी के साथ कंधे से कंधा मिलकर 12 जिले फलौदी, बाड़मेर, जालौर, सिरोही, डूंगरपुर, डीग-कुम्हेर, करौली, स.माधोपुर, खाजूवाला, नवलगढ़, सुजानगढ़ और रायसिंहनगर में चुनावी रैली कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अमित शाह की चुनावी रणनीति के फोकस में ये 22 जिले इसलिए हैं क्योंकि इन जिलों में केंद्र सरकार की गरीब कल्याण योजनाओं का खासा असर जमीन पर देखने को मिला है।

इसीकारण बीजेपी को 22 जिलों की 120 सीटों में लगभग 80 सीटें जीतने की उम्मीद है। मतलब साफ है कि पीएम मोदी और अमित शाह चुनावी अंक गणित में मोदी सरकार की गरीब कल्याण योजनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। पीएम मोदी और अमित शाह चुनाव होने से करीब एक साल पहले ही अपनी रणनीतियों को अंजाम देना शुरू कर देते हैं, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में भरपूर मिलता है। 

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