दुनिया में पहली बार हुई 7 महीने की बच्ची के पित्ताशय की सर्जरी

जागरूक टाइम्स 125 Sep 16, 2019

जयपुर (ईएमएस)। राजस्थान के जयपुर में डॉक्टरों ने एक सात महीने की बच्ची जान बचाई है। बच्ची के पित्ताशय की थैली में स्टोन और कॉमन बिल डक्ट (सीबीडी) की समस्या थी। बच्ची की यह सर्जरी जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल में की गई। इस दौरान बच्ची की पित्ताशय की थैली को सर्जरी करके हटाया गया। इस पर डॉक्टरों का दावा है कि दुनिया में यह पहला केस है जिसमें सबसे कम उम्र की बच्ची के पित्ताशय की सर्जरी की गई है। डॉक्टरों ने इस सर्जरी को वर्ल्ड रेकॉर्ड में शामिल कराने के लिए भी आवेदन किया है। बताया गया ‎कि बच्ची ईशानी का ऑपरेशन के बाद से वह अब पूरी तरह से ठीक है।

डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची को पेट में तेज दर्द, बुखार और दस्त की समस्या थी। पंद्रह दिन पहले उसे एसएमएस अस्पताल लाया गया। यहां जांच के बाद उसके पित्ताशय में स्टोन और सीबीडी की समस्या का पता चला। डॉक्टरों ने बच्ची की जान बचाने के लिए तुरंत उसका ऑपरेशन करने का फैसला किया। इसके अलावा डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची की हालत गंभीर थी क्योंकि उसके सीबीडी में एक पत्थर फंस गया था जो पित्त के रस के लिए यकृत से एलिमेंटरी कैनाल तक पहुंचने का एक मार्ग होता है। शिशुओं के लिए मशीनों की अनुपलब्धता के कारण शुरू में डॉक्टर सीबीडी पथरी निकालने में विफल रहे। ‎जिससे सीबीडी और इसके पित्त का रस एलिमेंटरी नली में जाने के बजाय पेट में जा रहा था जिससे पेट में संक्रमण फैल गया था। इसके बाद डॉक्टरों ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए पथरी निकालने का फैसला किया।

सर्जरी विभाग के प्रफेसर डॉ. जीवन कांकरिया ने बताया कि सबसे बड़ी चुनौती बच्ची को बेहोश करना था क्योंकि शिशुओं में सर्जरी के लिए कार्बन डाइऑक्साइड पेट में पंप हो जाता है जो बच्चे के दिल के लिए खतरा बन सकता है। इस तरह के एक छोटे से गुहा में लैप्रोस्कोपिक उपकरण के साथ काम करना मुश्किल होता है। उन्होंने आगे बताया ‎कि बिना खून की कमी के 90 मिनट में पित्ताशय की थैली को हटा दिया गया। सीबीडी में लगभग 10 से 12 छोटे स्टोन और लगभग 10 मिमी का एक स्टोन भी हटा दिया गया। उन्होंने सीबीडी के छेद को भी भरा। चूंकि सर्जरी में जोखिम बहुत ज्यादा था इसलिए डॉक्टरों ने नई तकनीक- आईसीजी डाई (इंडोसायनिन ग्रीन डाई) का इस्तेमाल किया। डॉक्टरों ने पीडियाट्रिक रोगियों में एक नई इमेजिंग प्रक्रिया का भी इस्तेमाल किया, जो पित्ताशय की थैली (स्टोन्स के साथ) के दौरान हरे फ्लोरोसेंट रंग से सीबीडी में रोशनी करता है, जिससे सर्जन को बिना चोट पहुंचाए आसानी से उसको को देखा जा सकता है। डॉ. कांकरिया ने बताया कि हमने आईसीजी को इंजेक्ट किया और इसने भी सटीक तरीके से सर्जरी करने में हमारी मदद की।


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