पोषाहार घोटाला : सरकारी योजनाओं के पचास लाख रुपए प्रतिमाह हजम कर रहा था गिरोह

जागरूक टाइम्स 288 Aug 1, 2018

- महिला उपनिदेशक सहित चारों आरोपी एक दिन के पीसी रिमाण्ड पर

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

अजमेर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की ओर से नागौर जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में किए गए भण्डाफोड़ में पचास लाख रुपए हर महीने गिरोह द्वारा हजम करने की बात सामने आई है। बुधवार को महिला उपनिदेशक और तीन ठेकेदारों को एसीबी की विशेष अदालत में पेश किया गया। जहां से उन्हें एक-एक दिन के पीसी रिमाण्ड पर सौंपा गया है।

अजमेर एसीबी के पुलिस अधीक्षक कैलाशचन्द्र बिश्नोई ने बताया कि मंगलवार को गिरफ्तार किए गए चारों आरोपियों से जब गहन पूछताछ की गई तो सामने आया कि वह केवल पोषाहार में ही नहीं, बल्कि विभाग की सभी परियोजनाओं में घपला कर रहे थे। हर माह लगभग पचास लाख रुपए की राशि महिला एवं बाल विकास विभाग की उपनिदेशक, अधिकारी-कर्मचारी और ठेकेदार हजम कर रहे थे। इसे हजम करने के लिए फर्जी स्वयं सहायता समूह भी खोले गए थे, जो कि ठेकेदारों द्वारा ही संचालित किया जाता।

हरिसिंह है दूसरा उपनिदेशक

एसपी बिश्नोई ने कहा कि जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदार हरिसिंह को विभाग का दूसरा उपनिदेशक कहा जाता था। वह पूरे विभाग को अपने अनुसार चलाता और विभाग के कार्मिकों को 25 प्रतिशत कमीशन बांट देता। जिससे कि कोई भी उसकी शिकायत नहीं करता। उन्होंने कहा कि अधिकांश बिल हरिसिंह के घर पर ही तैयार होते और विभाग का अधिकारी तुरंत उसे पास कर देता। 

छह माह से सप्लाई नहीं

एसपी बिश्नोई की मानें तो कई ऐसे सेंटर्स भी है, जहां पिछले छह माह में एक बार भी खाद्य सामग्री नहीं पहुंची। जिन लाभान्वितों को यह सामग्री मिलनी थी, उन्हें कोई बहाना बनाकर चलता कर दिया जाता था और इस सामग्री की रकम का 25 प्रतिशत विभाग और बाकि का ठेकेदार जीम जाते थे। 

गर्भवती महिलाओं व बच्चों की भी योजनाएं

एसपी बिश्नोई ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग में गर्भवती महिलाओं, 7 साल तक के बच्चों, आंगनबाड़ी पर आने वाले बच्चों के लिए विभिन्न परियोजनाएं चलाकर पौष्टिक आहार उपलब्ध करवाया जाता है। नागौर में यह पूरा गिरोह इन वंचितों को लाभ पहुंचाने की बजाय खुद ही चांदी कूटने में लगा हुआ था। आज चारों को अदालत में पेश कर तीन दिन के रिमाण्ड की मांग की गई, लेकिन न्यायाधीश ने एक दिन का रिमाण्ड स्वीकृत किया। गुरुवार को पुन: रिमाण्ड मांगा जाएगा। बिश्नोई ने कहा कि विभाग के सीडीपीओ सहित कई अन्य लोग भी संदेह के दायरे में है। जिनकी भूमिका सामने आते ही गिरफ्तारियां होंगी। 

मंत्री जी का खास है ठेकेदार!

एसीबी के हत्थे चढ़े गिरोह में शामिल एक ठेकेदार राज्य सरकार के एक मंत्री जी का काफी नजदीकी बताया जा रहा है। फिलहाल एसीबी को मंत्री जी का मामले में हाथ होना सामने नहीं आया है। फिर भी बारिकी से इसकी जांच में स्वयं एसपी कैलाशचन्द्र बिश्नोई जुट गए हैं।

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