आज साफ हो जाएगी छात्रसंघ चुनाव की तस्वीर

जागरूक टाइम्स 160 Aug 27, 2018

-स्क्रूटनी के बाद नाम वापसी का कार्यक्रम पूरा

- शाम को विवि प्रशासन चस्पा करेगा अंतिम सूची

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान विश्वविद्यालय और उसके संघटक कॉलेजों में 31 अगस्त को होने वाले छात्रसंघ चुनाव की आज तस्वीर साफ हो जाएगी। विश्वविद्यालय अपेक्स बॉडी के लिए कुल 5 पदों पर 55 आवेदन भरे गए। जिनमें से अध्यक्ष पद के लिए 18, उपाध्यक्ष पद के लिए 9, महासचिव पद के लिए 12, संयुक्त सचिव पद के लिए 11 और शोध प्रतिनिधि पद के लिए 5 आवेदन शामिल थे। आवेदनों की स्क्रूटनी के बाद दोपहर एक बजे विवि ने सूची प्रकाशित कर दी। छात्रनेताओं को शाम 3 बजे तक नाम वापस लेने का समय दिया गया। आज ही शाम को 5 बजे तक बीएसडब्ल्यू कार्यालय मैदान में रहने वाले अंतिम प्रत्याशियों की सूची चस्पा करेगा।

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इधर, बागियों को मनाने का सिलसिला लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा। एबीवीपी के अध्यक्ष पद पर राजपाल चौधरी, महासचिव के लिए दिनेश चौधरी, उपाध्यक्ष पर अनुराधा मीणा और संयुक्त सचिव के लिए मीनल शर्मा मैदान में हैं। इसी तरह से एनएसयूआई के अध्यक्ष पद पर रणवीर सिंघानिया, महासचिव चेतन यादव, उपाध्यक्ष सोनम गुर्जर और संयुक्त सचिव के लिए नुमान खान को उतारा गया है। एबीवीपी के अमित बड़बड़वाल ने बागी होकर अध्यक्ष का पर्चा दाखिल किया था। इसके साथ ही संध्या सुथार और नितिन शर्मा ने महासचिव के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल किया था। संगठन इनको मनाने में जुटा हुआ है।

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दूसरी तरफ एनएसयूआई अपने बागियों से जूझता रहा। एनएसयूआई से बागी होकर महेश सामोता, उत्तम चौधरी, विनोद जाखड़ और दुष्यंत राज चुंडावत अध्यक्ष के लिए मैदान में हैं। इसी तरह से महावीर गुर्जर, नीरज मीणा और राहुल मीणा ने भी महासचिव के लिए ताल ठोक रखी है। खबर लिखे जाने तक इनके नाम वापसी का काम जारी था। संभावना जताई जा रही है कि एबीवीपी के बजाए एनएसयूआई को बागी नेता ज्यादा परेशान करेंगे। 

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सरकार के लिए नाक का सवाल है यह चुनाव

अब तक के ट्रेंड के अनुसार देखा जाए तो राजस्थान विवि में जिस संगठन का पैनल जीतता है, उसी संगठन की पार्टी के द्वारा राज्य में सरकार बनाई जाती है। बीते दो साल से एबीवीपी अपने बागियों, अंकित धायल और पवन यादव से हार रही है। उससे पहले दो साल तक लगातार एनएसयूआई के अनिल चौपड़ा और सतवरी चौधरी ने बाजी मारी थी। साल 2013 में, जब राज्य में भाजपा की सरकार बनी थी, तब एबीवीपी के कानाराम जाट अध्यक्ष पद पर जीतने में कामयाब हुए थे। साल 2012 में एबीवीपी के राजेश मीणा ने चुनाव जीता था। उससे पहले 2011 में निर्दलीय प्रभा चौधरी ने बाजी मारी ओर साल 2010 में एबीवीपी के मनीष यादव ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया था। वर्ष 2005 से 2009 तक चुनाव बंद रहे थे।

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