नहीं रहे भाजपा के 'घनश्याम', बांसुरी के हो गए 'श्याम'

जागरूक टाइम्स 401 Aug 6, 2018

- घनश्याम तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी को मिला बांसुरी का चुनाव चिह्न

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

नहीं रहे भाजपा के घनश्याम, बांसुरी के हो गए श्याम! जी हां! यह बात बिलकुल सही है। करीब 45 साल तक के राजनीतिक जीवन और 1982 में अस्तित्व में आई भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी आखिकार बीजेपी से अलग होकर बांसुरी के हो गए हैं। चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी 'भारत वाहिनी पार्टी' को 'बांसुरी' का चुनाव चिह्न अलॉट किया है। हालांकि, तिवाड़ी कोई एक माह पहले ही पार्टी से इस्तीफा दे चुके हैं, लेकिन उनकी पार्टी को चुनाव चिह्न मिलने के साथ ही उनका नई पार्टी के साथ आधिकारिक तौर पर जुड़ाव हो गया है।

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी से अलग होकर नई पार्टी बनाने वाले सांगानेर के विधायक घनश्याम तिवाड़ी की पार्टी को चुनाव आयोग ने चुनाव चिह्न अलॉट कर दिया है। आज उनकी पार्टी को चिह्न अलॉट होने के बाद अब वो पूरे दमखम के साथ अलग पार्टी के चुनाव चिन्ह के साथ मैदान में उतरेंगे।
घनश्याम तिवाड़ी इस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष हैं, जबकि उनके बेटे अखिलेश तिवाड़ी पार्टी के संस्थापक हैं। भारत वाहिनी पार्टी के नाम से रजिस्टर्ड हो चुकी पार्टी को चुनाव आयोग ने "बांसुरी" का चुनाव चिह्न अलॉट किया है। भारत वाहिनी पार्टी को चुनाव चिह्न लोड होने के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि घनश्याम तिवाड़ी 19 तारीख को सांगानेर विधानसभा से शुरू करने वाली अपने प्रदेश यात्रा पूरे दमखम से आरंभ करेंगे।

देखना यह होगा कि घनश्याम तिवाड़ी प्रदेश में अपनी नई पार्टी की 'बांसुरी' बजाने में कामयाब हो पाते हैं या पूर्व में साल 2013 के दौरान राजपा के टिकट पर प्रदेश में दमखम दिखाने वाले किरोड़ीलाल मीणा की तरह उनका भी राजनीतिक करियर खत्म होने की स्थिति की तरफ बढऩे का क्रम शुरू होता है। हालांकि, उन्होंने दावा किया था कि उनके द्वारा उनकी यात्रा का नाम 'राजस्थान गौरव यात्रा' रखा गया था, जिसको भारतीय जनता पार्टी ने चुरा लिया। इसको लेकर उन्होंने खुद मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और अपनी पुरानी पार्टी भारतीय जनता पार्टी पर तीखे हमले किए थे।

क्यों लिया तिवारी ने बांसुरी चुनाव चिह्न?

हालांकि, यह अलग तरह का विषय है। किंतु जब 'बांसुरी' शब्द को घनश्याम के साथ जोड़कर देखा जाता है, तो उसके बारे में जानना बेहद आवश्यक है। दरअसल, भगवान कृष्ण की सबसे प्रिय वस्तु थी बांसुरी, जो अभी भी उनकी प्रत्येक तस्वीर में दिखाई जाती है। घनश्याम भगवान कृष्ण का ही दूसरा नाम है। ऐसे में कहा जा रहा है कि घनश्याम तिवाड़ी के द्वारा खुद को भगवान कृष्ण के नाम के साथ जोड़कर उनकी सबसे प्रिय वस्तु बांसुरी को चुनाव चिह्न के रूप में लिया गया है।

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