जिसका मेवाड़-वागड़ में डंका, उसी की सूबे में सरकार

जागरूक टाइम्स 171 Aug 27, 2018

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान की सत्ता अगर किसी पार्टी को हासिल करनी है तो उसे मेवाड़-वागड़ का महासंग्राम जीतना पहले जरूरी होगा। पिछले चार चुनाव परिणामों का ट्रेंड देखे तो मेवाड़-वागड़ में जिसने 20 या उससे ज्यदा सीटें हासिल की है, उसी ने सूबे में सरकार बनाई है। लिहाजा, चुनावी बिगुल कांग्रेस ने इसी सियासी फेक्टर और ट्रेंड को ध्यान में रखते हुए मेवाड़-वागड़ से बजाया। ऐसे में सांवलिया जी में कांग्रेस की पहली ही संकल्प सभा में जुटी भीड़ से पार्टी में सत्ता वापसी की उम्मीदें जगने लगी है।

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विधानसभा चुनाव को लेकर राजस्थान का अब सियासी पारा परवना चढ़ने लगा है। आरोप- प्रत्यारोप के साथ मैदान में भी चुनावी तैयारियां तेज कर दी हैं। भाजपा जहां सत्ता बरकरार रखने के लिए राजस्थान गौरव यात्रा निकाल रही है तो वहीं सत्ता परिवर्तन के लिए कांग्रेस संकल्प रैलियां कर रही है। दोनों पार्टियों की खास और एक कॉमन बात है कि भाजपा और कांग्रेस ने मेवाड़-वागड़ की धरती को चुनावी प्रचार के श्रीगणेश के लिए चुना। 

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क्योंकि दोनों दल अच्छी तरह से वाकिफ है कि राज में रहना है या आना है तो मेवाड़ जीतना जरूरी है। क्योंकि पिछले चार चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो यह बात साफ हो जाती है कि जिसने इस संभाग में 20 या इससे ज्यादा सीटें हासिल की है उसकी सत्ता आई है। लिहाजा, कांग्रेस ने मेवाड़ के चितौड़गढ़ के सांवलिया में इसी सोच के साथ संकल्प रैली का आगाज किया। पहली रैली में जुटी भीड़ से कांग्रेस नेता अब खुलकर मेवाड़-वागड़ में रिकॉर्ड तोड़ जीत का दावा इस बार जता रहे हैं।

मेवाड़-वागड़ का महासंग्राम इसलिए यकीनन सियासी नजरिए से काफी अहम है। इस अंचल में उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चितौड़गढ़ और राजसमंद सहित कुल छह जिले आते हैं। इनमें से 8 सीटें सबसे ज्यादा उदयपुर की है और सबसे कम 2 सीट प्रतापगढ़ में है। अन्य चार जिलों में 4 से 5 विधानसभा सीटें आती हैं। यानि कुल 28 सीटें आती है। 

एक नजर पिछले चार चुनाव परिणाम पर

वर्ष         सीटें     भाजपा      कांग्रेस        अन्य
1998     30        04            23            03
2003     30        21            07            02
2008     28        06            20            02
2013     28        25            02            01

...तो खतरे की घंटी

अगर यह ट्रेंड इस बार भी बरकरार रहता है तो जाहिर सी बात है कि भाजपा के लिए खतरे की घंटी है। लिहाजा, भाजपा ने राजस्थान गौरव यात्रा के तहत यहां खूब माहौल बनाने की कोशिश की। काउंटर में कांग्रेस ने संकल्प रैली का आगाज यहीं से कर दिया। अब देखना होगा कि यह ट्रेंड बरकार रहता है या फिर कुछ नहीं कहानी सामने आती है।

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