राजस्थान विश्वविद्यालय ने 13 साल में 18 अध्यक्ष दिए, लेकिन एक भी नहीं पहुंचा लोकसभा-विधानसभा

जागरूक टाइम्स 128 Aug 26, 2018

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान में इसी साल के अंत तक विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। अगले साल अप्रैल-मई में आम चुनाव भी प्रस्तावित हैं। राजस्थान में विधानसभा की 200 सीटें हैं, जबकि लोकसभा की 25 व राज्यसभा में 10 सीटें हैं। इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजस्थान में 31 अगस्त और 10 सितंबर को छात्रसंघ चुनाव होने जा रहे हैं। जिस तरह का ट्रेंड देखा गया है, उससे आसानी से कहा जा सकता है कि छात्रसंघ चुनाव के नतीजे राजस्थान विधानसभा चुनाव की हवा का रुख तय करने में कामयाब होंगे।

राजस्थान के सरकारी विश्वविद्यालयों में राजस्थान विश्वविद्यालय सबसे पुराना, प्रतिष्ठित और सबसे बड़ा विश्वविद्यालय है। एक समय ऐसा था, जब राजस्थान विश्वविद्यालय का छात्रसंघ अध्यक्ष राज्य के किसी मंत्री से कम रुतबा नहीं रखता था। राजस्थान विश्वविद्यालय की स्थापना आजादी के साथ ही, 1947 में हो गई थी। साल 1967 तक विश्वविद्यालय में एक बार भी छात्रसंघ चुनाव नहीं हुए। उसके बाद इस विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनावों की नींव रखी गई। वर्ष 1967 से लेकर अब तक राजस्थान विश्वविद्यालय 35 छात्रसंघ अध्यक्ष राज्य को दे चुका है। इन 50 वर्षों में राजस्थान विश्वविद्यालय से चुने गए छात्रसंघ अध्यक्ष बनने के बाद में न केवल राजस्थान विधानसभा तक पहुंचे, बल्कि कई पूर्व अध्यक्ष मंत्री भी बनें। तीन पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष वर्तमान सरकार में मंत्री हैं।

समय बदलता गया। आज हालात यह हो गए हैं कि बीते 18 साल में राजस्थान विश्वविद्यालय से चुने गए 13 अध्यक्षों में से एक भी अध्यक्ष राज्य विधानसभा या लोकसभा की सीढ़ी तक नहीं पहुंच पाया है। छात्रसंघ चुनाव जीतने के बाद विधानसभा तक पहुंचने वाले राजकुमार शर्मा आखिरी पूर्व अध्यक्ष हैं, जो कि साल 1999-2000 के दरमियान राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे। वह वर्तमान में भी राज्य विधानसभा में विधायक हैं। राजकुमार शर्मा लगातार दूसरी बार झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ से विधायक हैं।

वर्ष 2000-2001 के वक्त छात्रसंघ अध्यक्ष अशोक लाहोटी चुने गए थे, जो वर्तमान में जयपुर नगर निगम महापौर हैं। लाहोटी के काफी समय बाद उपाध्यक्ष बने कैलाश वर्मा वर्तमान में बगरू विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के विधायक हैं, और वह संसदीय सचिव होने के चलते राज्यमंत्री का दर्जा रखते हैं। लाहोटी के बाद चुने गए छात्रसंघ अध्यक्ष में से एक भी अध्यक्ष ऐसा नहीं है, जो विधायक या सांसद की कुर्सी तक पहुंच पाए हो। हालांकि, साल 2003-2004 के दौरान अध्यक्ष बने जितेंद्र मीणा वर्तमान में ST आयोग के अध्यक्ष होने के नाते राज्यमंत्री का दर्जा रखते हैं, लेकिन वह भी अब तक विधानसभा या लोकसभा का चुनाव नहीं लड़ पाए हैं।

ऐसा नहीं है कि राजस्थान विश्वविद्यालय या राजस्थान के दूसरे सरकारी विश्वविद्यालयों में से निकले छात्रसंघ अध्यक्ष कभी विधानसभा लोकसभा तक नहीं पहुंच पाए हैं, बल्कि कई ऐसे भी छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं, जो आज केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकार में मंत्री हैं और पूर्व में मुख्यमंत्री तक रह चुके हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जो कि जोधपुर विश्वविद्यालय छात्र राजनीति में सक्रिय थे। वह एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय संगठन महामंत्री तक पहुंचने में कामयाब हुए हैं। इसी तरह से कांग्रेस के नेता सीपी जोशी, जो कि उदयपुर विश्वविद्यालय की छात्र राजनीति के सिरमौर रहे हैं। वह कांग्रेस के अध्यक्ष से लेकर केंद्र में कैबिनेट मंत्री तक रहे हैं। कांग्रेस के ही रघु शर्मा केकड़ी से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में वह अजमेर लोकसभा से सांसद हैं। महेश जोशी राजस्थान विश्वविद्यालय से निकले हुए हैं। वह विधायक और सांसद भी रह चुके हैं। इसी तरह से कांग्रेस के एक पूर्व विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास, जो कि वर्तमान में कांग्रेस के जयपुर जिला अध्यक्ष हैं। वह भी 1992-1993 के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे। इसी तरह से नावां से पूर्व विधायक महेंद्र चौधरी भी राजस्थान विश्वविद्यालय में 1995-1996 के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

वर्तमान केंद्र सरकार व राज्य सरकार में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी में भी कई पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सक्रिय हैं। नरेंद्र मोदी सरकार में कृषि राज्य मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, जो कि जोधपुर से ही लोकसभा सांसद हैं, वह जोधपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे हैं। इसी तरह से मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक कालीचरण सराफ, जो कि वर्तमान में चिकित्सा मंत्री हैं। सराफ भी राजस्थान विश्वविद्यालय में 1974 से 1975 के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष थे। ठीक इसी भांति मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सरकार में उद्योग मंत्री राजपाल सिंह शेखावत भी 1980-1981 के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे। राजेंद्र राठौड़, जो कि राज्य सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, वह भी 1978-1979 में छात्रसंघ अध्यक्ष रह चुके हैं। अशोक लाहोटी, जो कि वर्तमान में जयपुर नगर निगम के मेयर हैं, वह साल 2000-2001 के दौरान छात्र संघ अध्यक्ष थे। इसी तरह भाजपा के वर्तमान में प्रदेश प्रवक्ता सतीश पूनिया भी छात्र राजनीति से हुए नेता हैं। चोमू विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक रामलाल शर्मा राजस्थान विश्वविद्यालय में महासचिव रह चुके हैं। राज्य एसटी आयोग के उपाध्यक्ष जितेंद्र मीणा भी साल 2003-2004 के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

ऐसा नहीं है कि केवल भारतीय जनता पार्टी या कांग्रेस के नेता ही राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष रहे हैं, बल्कि छात्रसंघ अध्यक्ष रहने के बाद राजनीति की सीढ़ियां चढ़ते हुए हनुमान बेनीवाल लगातार तीसरी बार विधायक हैं। वह एक बार भाजपा के टिकट पर विधायक बने थे। बेनीवाल राजस्थान विश्वविद्यालय में 1997-98 के दौरान छात्रसंघ अध्यक्ष थे। वह वर्तमान में खींवसर से निर्दलीय विधायक हैं। इसी तरह से उनके बाद चुने गए रणवीर सिंह गुढ़ा एक बार विधायक रह चुके हैं। राजकुमार शर्मा नवलगढ़ से लगातार दूसरी बार विधायक हैं, वह 1999-2000 के दौरान राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

राजस्थान विश्वविद्यालय से अब तक यह रहे हैं छात्रसंघ अध्यक्ष

1967 - आदर्श किशोर सक्सेना

1968  - ज्ञान सिंह चौधरी

1969  - हुकम सिंह

1970  - भरत पवार

1971 और 1972 में चुनाव नहीं हुए

1973  - विजय प्रभाकर

1973  - विमल चौधरी

1974  - कालीचरण सराफ

1975 से 1977 में चुनाव नहीं हुए

1978  - राजेंद्र राठौड़

1979  - महेश जोशी

1980  - राजपाल सिंह शेखावत

1981  - रघु शर्मा

1982 से 1985 तक चुनाव बन्द रहे

1986  - चंद्र शेखर

1987 में चुनाव नहीं हुए

1989  - प्रणवेंद्र शर्मा

1991  - अखिल शुक्ला

1992  - प्रताप सिंह खाचरियावास

1993  - जितेंद्र श्रीमाली

1994  - सोमेंद्र शर्मा

1995  - महेंद्र चौधरी

1996  - श्याम शर्मा

1997  - हनुमान बेनीवाल

1998  - रणवीर सिंह गुढ़ा

1999  - राजकुमार शर्मा

2000  - अशोक लाहोटी

2001  - नरेंद्र सिंह शेखावत

2002  - पुष्पेंद्र भारद्वाज

2003  - जितेंद्र मीणा

2004  - राजपाल शर्मा

2005 से 2009 तक चुनाव बन्द रहे

2010  - मनीष यादव

2011  - प्रभा चौधरी

2012  - राजेश मीणा

2013  - कानाराम जाट

2014  - अनिल चोपड़ा

2015  - सतवीर चौधरी

2016  - अंकित धायल

2017  - पवन यादव

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