राजस्थान में चुनाव घोषित होते ही सोशल मीडिया पर छिड़ी जंग, भाजपा-कांग्रेस ने बनाई रणनीति

जागरूक टाइम्स 358 Oct 9, 2018

जयपुर । चुनाव तिथियां घोषित होने के बाद राजस्थान में सियासी पारा चढ़ गया है। विभिन्न राजनीतिक दल मतदाताओं को लुभाने में जुट गए हैं। एक और रैलियों और जनसभाओं के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर भी जंग छिड़ी हुई है। फेसबुक, ट्विटर समेत अन्य सोशल साइट्स पर राजनैतिक दल आक्रामक अभियान चला रहे हैं। राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा की बात करें तो पार्टी ने 51 हजार बूथों में से प्रत्येक पर 1-1 आईटी कार्यकर्ता तैनात किया है। इनकी निगरानी के लिए मंडल स्तर पर 10 लोगों की टीम बनाई गई है। इसके अलावा जिला स्तर और राज्य स्तर पर अलग सोशल मीडिया टीमें कार्य कर रही हैं।

यह भी पढ़े : निजी अस्पताल की लापरवाही से पिता ने खोया इकलौता पुत्र 

राजस्थान में भाजपा के सोशल मीडिया प्रभारी हिरेन्द्र कौशिक के मुताबिक अकेले भाजपा के व्हाट्सएप नेटवर्क से 14.5 लाख लोग जुड़े हुए हैं। प्रत्येक जिले का अपना फेसबुक पेज भी है। सिर्फ कोटा में 1.5 लाख लोग भाजपा के फेसबुक पेज से जुड़े हुए हैं। वहीं ट्विटर पर भाजपा से 1.35 लाख लोग जुड़े हुए हैं। यूट्यूब और अन्य साइट पर भी कैंपेन चलाया जा रहा है। राजस्थान में सत्ता की चाभी हासिल करने के लिए जोर-शोर से प्रयास में लगी कांग्रेस की बात करें तो पार्टी ने पिछले चुनावों से सबक लिया है और सोशल मीडिया पर खास ध्यान दे रही है।

यह भी पढ़े : जालोर में सुथार समाज है पुलिस की कार्यवाही से नाराज, आखिर क्यों...   

हाल ही में प्रोजेक्ट 'शक्ति' लॉन्च किया है और इसके जरिए करीब 8 लाख युवाओं को अपने साथ जोड़ा है। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की मीडिया प्रभारी डॉक्टर अर्चना शर्मा कहती हैं कि पिछली बार चुनाव के दौरान हम लोग सोशल मीडिया पर सक्रिय नहीं थे, लेकिन इस बार हमने इसे सशक्त माध्यम के तौर पर लिया है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्रबंधन के लिए एक टीम का भी गठन किया है। दूसरी तरफ, दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी भी इस बार राजस्थान में अपना भाग्य आजमाने की तैयारी में है। पार्टी के मुताबिक प्रत्येक उम्मीदवार की कैंपेनिंग के लिए एक सोशल मीडिया मैनेजर को रखा जाएगा। पिछले विधानसभा चुनाव के मुकाबले राजस्थान में इस बार मतदाताओं की संख्या में करीब 67.53 लाख की बढ़ोतरी हुई है। इसमें युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा है और राजनैतिक दल युवाओं के वोट को 'टर्निंग प्वाइंट' मान रहे हैं। इसलिए सोशल मीडिया और ज्यादा जोर है।

Leave a comment