अब अनपढ़ लड़ सकेंगे पंचायत चुनाव

जागरूक टाइम्स 254 Feb 12, 2019

जयपुर (ईएमएस)। राज्य विधानसभा में राजस्थान पंचायती राज (संशोधन) विधेयक, 2019 ध्वनिमत से पारित कर दिया। इससे पहले ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री सचिन पायलट ने विधेयक को सदन में प्रस्तुत किया। इस विधेयक के पारित होने से अब अनपढ़ लोग भी पंचायत चुनाव लड़ सकेंगे। पहले शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता थी। इस दौरान प्रदेश में वर्ष जनवरी 2015 से दिसंबर वर्ष 2018 तक फर्जी शैक्षणिक प्रमाण पत्र लगाकर पंचायत चुनाव लडऩे के 692 मामले सामने आए थे।

सबसे ज्यादा फर्जी प्रमाण पत्रों के मामले अलवर से थे, यहां पर इस दौरान 62 मामले सामने आए।
दौसा में 48, जयपुर में 39 मामले, जालौर में 35, करौली में 33, भरतपुर में 30 झुंझुनूं में 29,जोधपुर में 28, नागौर में 26, सवाईमाधोपुर में 29, बाड़मेर में 27, फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिये पंचायत चुनाव लडऩे के मामले सामने आए थे। वहीं विधानसभा में विधेयक पर हुई बहस का जवाब देते हुए पायलट ने कहा कि वर्तमान सरकार समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास के लिए प्रतिबद्व है।

उन्होंने कहा कि पंचायती राज अधिनियम में पूर्व में किए गए प्रावधान ऐसे थे, जिनसे राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किए गए सरपंच भी चुनाव लडऩे के लिए अयोग्य घोषित हो गये थे। उन्होंने कहा कि शिक्षा के आधार पर समाज को दो श्रेणियों में नहीं बांटा जा सकता, इसलिए अधिनियम के प्रावधान संविधान की मूल भावना के विपरीत थे। पायलट ने बताया कि संवैधानिक संस्थाओं में शैक्षिक योग्यता की शुरूआत पहले ऊपर के स्तर से संसद और विधानसभा से होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि समावेशी विकास के लिए सरकार की यह कोशिश है कि वंचित लोगो को भी समान रूप से अवसर मिल सके।

उन्होंने कहा कि यह संशोधन जनचेतना तथा लोकतंत्र में आस्था बढ़ाने के लिए लाया गया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक से प्रत्येक जाति, श्रेणी, समाज तथा विशेष रूप से महिलाओं को लोकतान्त्रिक संस्थाओं में भाग लेने का अवसर मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि सरपंचों के पास आर्थिक निर्णय लेने के लिए प्रशासनिक मशीनरी उपलब्ध होती है इसलिए इस आधार पर शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता जरूरी नहीं है। इससे पहले सदन ने विधेयक को जनमत जानने के लिए परिचालित करने के संशोधन प्रस्ताव को ध्वनिमत से अस्वीकार कर दिया।


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