आईआरएस अधिकारी ने फंदा लगाकर जान दी, आईएएस पति पर आरोप

जागरूक टाइम्स 266 Aug 7, 2018

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

जयपुर के राजस्व विभाग के जीएसटी विभाग में कार्यरत 35 वर्षीय महिला आईआरएस अधिकारी ने बीती देर रात फांसी के फंदे पर झूलकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। पुलिस को सुसाइड नोट बरामद हुआ है जिसमें उसने पति और सास पर प्रताड़ित करने के आरोप जड़े हैं।

जयपुर शहर पूर्व के पुलिस उपायुक्त गौरव यादव ने बताया कि सोमवार रात्रि लगभग 12 बजे बजाज नगर स्थित एजी कॉलोनी में रहने वाली आईआरएस अधिकारी बिन्नी शर्मा द्वारा फांसी लगाने की सूचना मिली थी। इस पर रात्रि में ही पुलिस की टीम को मौके पर भेज दिया गया और एफएसएल से जांच करवाई गई। इसके बाद शव को जयपुरिया अस्पताल की मोर्चरी में शिफ्ट करवाया गया। उन्होंने कहा कि मौके से अंग्रेजी में लिखा एक सुसाइड नोट बरामद हुआ है, जिसमें लिखा गया कि पति गुरमीत वालिया और उनकी मां ने खूब प्रताडित किया। इन दोनों ने उनका जीवन खराब कर दिया। इससे दुखी होकर ही वह यह कदम उठा रही है। उपायुक्त यादव ने कहा कि मृतका बिन्नी शर्मा के पति गुरमीत वालिया भी आईएएस अधिकारी हैं और चण्डीगढ़ में कार्यरत हैं।

मां के साथ रहती थी बिन्नी

यादव ने बताया कि मृतका बिन्नी अपनी मां और दो बच्चों के साथ यहां रहती थी। मिली जानकारी के अनुसार बिन्नी काफी समय से डिप्रेशन में भी रहती थी। पति और उसके बीच चल रही अनबन की बात भी प्रथम दृष्टया सामने आई है। पूरे मामले की जांच में पुलिस जुटी हुई है। यादव ने कहा कि बिन्नी शर्मा के पति आईएएस गुरमीत वालिया को सूचित कर दिया गया लेकिन अब तक वह जयपुर नहीं पहुंचे हैं। 

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क्या यही है आखिरी रास्ता?

इस घटनाक्रम के बाद फिर सवाल उठता है कि क्या खुदकुशी करना किसी समस्या का आखिरी उपाय है? ऐसा तो नहीं हो सकता, लेकिन फिर भी मामूली से मामूली व्यक्ति से लेकर शीर्षस्थ पद पर बैठे लोगों द्वारा ही यह कदम उठाना अपने आप में सोचने पर मजबूर करता है। यह समस्या मामूली नहीं है। इस ओर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, जिससे कि लोगों के मन से आत्महत्या जैसे विचार बिल्कुल ही निकल जाए। एक अध्ययन के अनुसार डिप्रेशन का कारण कम होती आत्मीयता है। आज सोशल मीडिया या व्हॉटसएप सहित अन्य माध्यमों से तो हमसें हजारों लोग जुड़े हुए हैं, लेकिन व्यक्तिगत रूप से कुछ ही लोगों से जुड़े रहते हैं। ऐसे दोस्त ही नहीं रखते जिनसे रोजाना मुलाकात करें या उनसे अपनी परेशानियां शेयर करें। जब परेशानियां बढ़ने लगती है तो व्यक्ति डिप्रेशन में चला जाता है और उसे यह दुनिया बुरी लगने लगती है। वह सुसाईड की ओर ही अपने कदम बढ़ाता है। यदि उस समय कोई हो जो उसकी सुन सके और उसे समझा सके तो वह ऐसा नहीं करेगा। 

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इसलिए डिजिटल रूप से लोगों से जुड़े रहे, लेकिन व्यक्तिगत रूप से भी लोगों के सम्पर्क में रहें और रोजाना कुछ समय ही सही ऐसे लोगों के साथ बिताएं। उनके साथ अपने मन के विचार और परेशानियां शेयर करें। शेयर करने से अवश्य ही समाधान निकलेंगे। जो बात आपको परेशान कर रही है, हो सकता है उसका समाधान आपका ही कोई मित्र निकाल सकें, तो शेयर करें और खुलकर जीएं।

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