बागी बिगाड़ सकते हैं संगठनों का चुनावी खेल

जागरूक टाइम्स 184 Aug 25, 2018

-हर बार की भांति इस मर्तबा भी अपनों से होगी लड़ाई

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान विश्वविद्यालय में चुनावी रणभूमि तैयार हो चुकी है। एबीवीपी और एनएसयूआई ने अपने अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए हैं। एबीवीपी ने अध्यक्ष के लिए राजपाल चौधरी को टिकट दिया है। इसके साथ ही महासचिव जैसे महत्वपूर्ण पद पर दिनेश चौधरी को मैदान में उतारा है। अनुराधा मीणा को उपाध्यक्ष और मीनल शर्मा को संयुक्त सचिव पद के लिए टिकट दिया गया है। इससे पहले पूरे एक दिन और एक रात मंथन करने के बाद एबीवीपी ने मजबूत माने जा रहे उम्मीदवार दिनेश चौधरी को मैनेज करने में कामयाबी हासिल भले ही कर ली हो, लेकिन इसके बावजूद अमित बड़बड़वाल द्वारा निर्दलीय ताल ठोकने के कारण संगठन के उम्मीदवार राजपाल चौधरी की राह आसान नहीं रह गई है।

इधर, एनएसयूआई ने भी देरा रात अपना पैनल घोषित कर दिया। अध्यक्ष पद के लिए रणवीर सिंघानिया को टिकट दिया गया है। महासचिव के लिए चेतन यादव, उपाध्यक्ष सोनल गुर्जर और संयुक्त सचिव पद पर नुमान खान को प्रत्याशी बनाया गया है। सभी उम्मीदवारों ने आज विवि में रैली के रूप में आकर ताकत दिखाने का प्रयास किया, लेकिन विवि और पुलिस प्रशासन की मुस्तैदी के चलते छात्रों की भीड़ को विवि परिसर के अंदर नहीं घुसने दिया गया है। सैकड़ों की संख्या में एक से बढकर एक लग्जरी गाड़ियों के साथ नामांकन पत्र दाखिल करने पहुंचे छात्रनेताओं के कारण जेएनएन मार्ग पर जाम की स्थिति बन गई। 

ताज़ा खबरों के लिए हमें फॉलो करे फेसबुक | इंस्टाग्राम  | ट्विटर 

बागी लेंगे संगठनों की परीक्षा

एबीवीपी में अध्यक्ष के दावेदार अमित बड़बड़वाल ने अपना पैनल बनाकर दावा ठोक दिया है। उनके साथ संध्या सुथार, नितिन शर्मा आ गए हैं। इधर, एनएसयूआई के महेश सामोता, उत्तम चौधरी, राहुल मीणा, महावीर गुर्जर और दुष्यंत राज चुंडावत ने बगावत कर दी है। चुंडावत ने तो बकायदा एनएसयूआई पर 65 लाख रुपए लेकर टिकट बेचने का आरोप तक लगाया है। इस बात को लेकर बागी छात्रनेताओं ने देर रात विवि के मुख्य द्वार पर प्रदर्शन किया। स्थिति बिगड़ने के कारण पुलिस को लाठियां बरसानी पड़ीं। इस मामले में कई छात्र नेताओं को हिरासत में लिया गया है। बगावत करने वाले छात्रनेताओं को छात्र संगठनों और टिकट पाने में कामयाब होने वाले छात्रों ने मनाने की शुरुआत कर दी है। संभावना है कि कई छात्र नेताओं को मनाकर वापस बिठा दिया गया जाएगा।

यह भी पढ़े : पत्रकार दुर्गसिंह राजपुरोहित को मिली जमानत, पत्रकारों, परिजनों सहित क्षेत्रवासियों ने मनाई खुशी

लिंगदोह कमेटी की सिफारिशें हवा में, विवि प्रशासन लाचार


भले ही विवि प्रशासन लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू करने का दावा कर रहा हो, लेकिन हकिकत यह है कि विवि प्रशासन की नाक के नीचे ही बड़ी मात्रा में पोस्टर-बैनर लगे हुए हैं। विवि परिसर और कॉलेजों में प्रशासन पोस्टर हटाने में नाकाम रहा है। महज 5 हजार रुपए में चुनाव जीतने का दावा करने वाले छात्रनेताओं के रोजाना लाखों रुपये खर्च हो रहे हैं। सैकड़ों गाड़ियां प्रचार और छात्रों को लाने-ले जाने में लगी हुई हैं। प्रोपर्टी डीलर, कारोबारी और रीयल स्टेट से जुड़े माफिया भी इस चुनाव में फाइनेंस कर रहे हैं। शराब माफिया का गठजोड़ यहां पर भी अपनी ताकत दिखाने में कामयाब हो रहा है।

वीडियो देखे : सिरोही - ज़िन्दगी और मौत के बीच जुब्बेदा

प्रशासन के छूटे पसीने

विवि प्रशासन के अनुसार इस बार 22 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। गत बार करीब 24 वोटर थे। शोध छात्र प्रतिनिधि के तौर रामसिंह सामोता ने भी अपना नॉमिनेशन भरा है। हर बार की भांति इस मर्तबा भी करीब 40 से 50 प्रतिशत वोटिंग की संभावना है। विवि प्रशासन ने अपनी टीम तैनात कर रखी है। विवि के मुख्य द्वारा पुलिस प्रशासन ने भी कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए जाप्ता तैनात कर रखा है। एसपी, डीएसपी, तीन थानों के थानाधिकारियों सहित सैकड़ों की संख्या में पुलिसकर्मी पुलिस लाइन से बुला रखे हैं। मतदान में महज पांच दिन बचे हैं। 31 अगस्त को मतदान होना है, हालांकि मतगणना 11 सितंबर को होगी।

यह भी पढ़े : जालोर में पीएमओ को खिलाफ नारेबाजी  

इस बार भी चुनाव बैलेट पेपर से ही होंगे

राजस्थान विवि बीते दो साल से दावा कर रहा है कि अगले चुनाव में बैलेट पेपर की जगह ईवीएम से चुनाव करवाया जाएगा, लेकिन इस बार भी छात्रसंघ चुनाव बैलेट पेपर से ही होंगे। विवि प्रशासन ने निर्वाचन विभाग को मतपेटियों के पैसे जमा करवा दिए हैं और 28 अगस्त को मतपेटियां विवि पहुंच जाएंगी। जिनको अगले दिन विवि के विभागों, सेंटर, कॉलेज परिसर में भेज दिया जाएगा। जानकारी में आया है कि करीब 100 मतपेटियां मंगवाई गई हैं।

कार्यालय शुरू, लंगर और हॉस्टलर्स को पार्टियां

टिकट वितरण होने के साथ ही एबीवीपी और एनएसयूआई ने अपने-अपने चुनावी कार्यालय खोल दिए हैं। दोनों ही छात्र संगठनों के कार्यालय राजपार्क में खोले गए हैं, जो विवि परिसर के आधा किलोमीटर के दायरे में हैं। इनके अलावा छात्रनेताओं ने अपने-अपने अलग से कार्यालय भी खोल रखे हैं, जहां पर लंगर शुरू हो चुके हैं। हॉस्टल के छात्रों की आवभगत में तेजी आई है। उनके लिए पार्टियों, बीयर पिलाने की व्यवस्था, छात्राओं के लिए फिल्म दिखाने और उनको शॉपिंग करवाने के लिए भी छात्र नेता आॅफर कर रहे हैं। 

सबसे ज्यादा वोटर महारानी से

वोटर्स की बात की जाए तो सबसे अधिक वोटर महारानी कॉलेज में करीब 6800 हैं। इसी तरह से दूसरे नंबर पर 4200 के करीब राजस्थान कॉलेज में हैं। वाणिज्य महाविद्यालय और महाराजा कॉलेज में सबसे कम मतदाता हैं। करीब 300 मतदाता शोध के हैं। वोटिंग की बात की जाए तो सबसे ज्यादा राजस्थान कॉलेज के छात्र अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। महारानी कॉलेज में सबसे कम वोट पड़ते हैं।

यह भी पढ़े : दादर-बीकानेर ट्रेन अब प्रतिदिन चलेगी 

मंत्री-विधायक तक दिए हैं विवि ने

राजनीति की पहली सीढ़ी माने जाने वाले छात्र सियासत ने केवल उपद्रव या उदंडता ही नहीं दिखाई है, बल्कि इसी विवि ने प्रदेश को कई मंत्री-विधायक दिए हैं। विवि के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कालीचरण सराफ, राजेंद्र राठौड़, राजपाल सिंह शेखावत राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं। इसी तरह से हनुमान बेनीवाल, राजकुमार शर्मा, रामलाल शर्मा, कैलाश वर्मा भी इसी विवि के छात्रसंघ में विजेता रहे हैं। कई पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, महासचिव, उपाध्यक्ष और संयुक्त सचिव सांसद, विधायक और पार्षद के टिकट मांग रहे हैं।

यह भी पढ़े : राजस्थान में डीजीपी व पटना में आईजी करेंगे पत्रकार दुर्गसिंह मामले की जांच 

पार्टियां भी जुटी चुनाव जिताने में


छात्रसंघ चुनाव कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि चुनाव के लिए न केवल छात्र संगठन, बल्कि भाजपा और कांग्रेस भी जुटी हुई है। टिकट दिलाने और काटने में भी कई बड़े नेताओं ने पूरी जान झोंक दी है। विधायक, मंत्री, सांसद सभी को जिम्मेदारी सौंप दी गई है। भाजपा के लिए छात्रसंघ का चुनाव जीतना इसलिए भी ज्यादा जरूरी है, क्योंकि जयपुर जिले की 19 सीटों पर इस चुनाव को सीधा असर पड़ने वाला है। दोनों लोकसभा सीटें भी इस चुनाव से प्रभावित होती हैं।


Leave a comment