राजस्थान जीत के लिए जातिगत समीकरण साधने फिर आ रहे हैं अमित शाह

जागरूक टाइम्स 816 Aug 29, 2018

जयपुर @ जागरूक टाइम्स

राजस्थान की राजनीति में जाति के आधार पर चुनाव होना कोई नई बात नहीं है। सर्वविदित है कि राज्य में जातिगत आधार पर ही टिकट वितरण किया जाता रहा है। अब भी भविष्य इन चीजों से अछूता रहेगा, इसकी संभावना न के बराबर है। कहा जा सकता है कि जातिगत आधार ही है, जिनके कारण आरक्षित सीटों के अलावा सभी पार्टियां टिकट वितरण करती हैं। प्रदेश में जातियों की बात करें तो जाट, ब्राह्मण, राजपूत, मीणा, गुर्जर प्रमुख हैं। इनको साधना हर पार्टी के लिए बेहद जरूरी है। जातियों को साधने के लिए भाजपा के चाणक्य, यानि अध्यक्ष अमित शाह राजस्थान आ रहे हैं।

इसी साल के अंत तक होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए राजस्थान भाजपा को मजबूती प्रदान करने के लिए भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह एक बार फिर से प्रदेश दौरे पर आने वाले हैं। 6 सितम्बर को शाह का नागौर और उदयपुर दौरा हो सकता है। नागौर को राजस्थान में जाट राजनीति का हेडक्वार्टर कहा जाता है। ऐसे में नागौर में अमित शाह विराट किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर सकते हैं। यही वह जिला है, जहां पर जाटों के सहारे कांग्रेस सत्ता वापसी के लिए प्रयासरत है। यही वह जिला है, जहां से थर्ड फ्रंट की संभावनाओं को बल मिलने की सर्वाधिक संभावना है। और यही वह जिला है, जहां से प्रदेश के एकमात्र 4 बार एक लाख से ज्यादा लोगों की बड़ी रैलियां कर सर्वाधिक दम दिखाने वाले हनुमान बेनिवाल अपनी मजबूत पकड़ रखते हैं।

उत्तर भारत की हिन्दी बैल्ट के तीन राज्यों मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार है। यहां बीजेपी सरकार के निर्माण के बाद लोकसभा चुनावों में भी बीजेपी को विराट सफलता मिली। राजस्थान की तो 25 की 25 सीटें बीजेपी की झोली में गई। लिहाजा, राजस्थान के चुनाव बीजेपी के लिये सर्वाधिक महत्वपूर्ण है। इसलिए बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने राजस्थान पर पैनी नजरें गढ़ा दी है। जाट, ब्राह्मण, राजपूत जैसी बड़ी जातियों को जोड़कर देखा जाए तो यह आबादी करीब 30 प्रतिश पर पहुंच जाती है। ऐसे में इनको साधना सभी पार्टियों के लिए अत्यंत आवश्यक है।

इससे पहले मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा का चारभुजा से आगाज के अवसर पर भी शाह राजस्थान आए थे। अमित शाह और वो भी जाट पॉलिटिकल हेडक्वार्टर कहे जाने वाले नागौर क्षेत्र में, वैसे तो यह कुछ अजीब लगता है, लेकिन यहीं से पश्चिमी राजस्थान की राजनीति की शुरुआत होगी। इसमें भी कोई दो राय नहीं है कि राजपूत समाज का एक बड़ा वर्ग भाजपा से नाखुश चल रहा है। नागौर, अजमेर से सटे दूसरे जिलों में राजपूत समाज की अच्छी-खासी जनसंख्या है। बताया जा रहा है कि 6 और 7 सितम्बर को शाह का नागौर का दौरा होगा, वो यहां पर प्रस्तावित किसानों के विराट सम्मेलन को संबोधित कर सकते हैं। किसानों के इस सम्मलेन के बहाने शाह जाटों के अलावा मेघवाल, मीणा, गुर्जर, माली जैसी किसान जातियों को भी साधने का काम करेंगे।

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बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की राजस्थान गौरव यात्रा के जोधपुर में कथित तौर पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं द्वारा की गई पत्थरबाजी के घटनाक्रम के बाद अब अमित शाह का यह संभावित दौरा खास रहने वाला है। उनके दौरे से राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी को मजबूती मिलेगी। उनके दौरे से भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उत्साह का संचार होगा, जिससे आने वाले चुनावों में पार्टी की मजबूती और कार्यकर्ताओं की चुस्ती से सीएम वसंधुरा राजे की अगुवाई में भाजपा को एक बार फिर बड़ी जीत हासिल करने में सफलता हासिल हो सकती है।

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यह है अमित शाह का राजस्थान प्रवास

– सितम्बर के पहले या दूसरे हफ्ते में दौरा संभव।
– नागौर में किसान सम्मेलन को सम्बोधित कर सकते हैं।
– किसान सम्मेलन में नागौर, अजमेर, जोधपुर के किसान आएंगे।
– यहां पर व आसपास जाट समाज बहुलता में है।
– यह जिला शुरू से ही राजनीति का बड़ा गढ़ रहा है, खासकर जाट राजनीति का।
– नागौर इसलिए खास, क्योंकि यहीं से पंचायती राज सिस्टम का पूरे देश में आगाज हुआ था।
– यहीं से पंचायती राजे की तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु ने आधारशिला रखी थी।
– अमित शाह भी ऐतिहासिक धरती से किसानों को संबोधित कर सकते हैं।
– नागौर जिले से ही किसान वर्ग के बीच अच्छा संदेश जाता है।
– यहीं जमीन किसान नेता बलदेव राम मिर्धा व नाथू राम मिर्धा की धरती रही है।
– इसके बाद अमित शाह अपने प्रदेश दौरे में मारवाड़ को भी मेवाड़ की तरह साधने आ सकते हैं।
– मेवाड़ से राजस्थान गौरव यात्रा शुरू हो चुकी है।

शाह क्यों आ रहे हैं राजस्थान

– बीजेपी राजस्थान की विधानसभा चुनाव की रणनीति जांचने।
– राजस्थान गौरव यात्रा की प्रगति देखने।
– जाट राजनीति की टोह लेने।
– राजपूत समाज की बात सुनने और समझने।
– चुनावों को लेकर भाजपा कार्यकर्ताओं को मार्गदर्शन देने।
– बार-बार आकर बीजेपी कार्यकर्ता में जोश भरने

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