नौ जिले सूखे की चपेट में, पानी पर ताला लगाकर देना पड़ रहा है पहरा

जागरूक टाइम्स 352 Jun 6, 2019

चुरू (ईएमएस)। भीषण गर्मी से लोगों का जीना मुहाल हो गया है। प्रदेश के 9 जिले सूखे की चपेट में हैं। चुरू का तापमान इस साल 50 डिग्री से ज्यादा दर्ज किया जा चुका है। चुरू देश का सबसे गर्म शहर बन गया है। दुनिया के 15 सर्वाधिक गर्म शहरों की सूची में 8 शहर भारत के ही हैं। गर्मी की बढ़ रही भयावहता के चलते पानी की किल्लत भी तेजी से बढ़ रही है। राजस्थान के ये नौ जिले जैसलमेर, जालोर, बाड़मेर, जोधपुर, बीकानेर, हनुमानगढ़, नागौर, चूरू और पाली सूखे की चपेट में आ चुके हैं। इन जिलों में बोरवेल, नलकूप, कुएं, ताल और तलैये पूरी तरह से निपट चुके हैं। राजस्थान के इन नौ जिलों के 8 शहरों और 3,161 ढाणियों (गांव) में चार दिन में एक बार पानी मिल पा रहा है। इन शहरों, कस्बों और ढाणियों में पाइपलाइन और टैंकरों के जरिए 5 से 10 किमी दूर से पानी पहुंचाया जा रहा है।

प्रदेश के बांदीकुई, बलोतरा, डेगाना व गुलाबपुरा, सिवाना, समदरी, भीनमाल, जालोर ऐसे शहर-कस्बे हैं, जहां चार दिन में एक बार पानी आ रहा है। राजस्थान के 31 शहर और कस्बे ऐसे हैं, जहां तीन दिन में एक बार पानी मिल रहा है। इन शहरों में अजमेर, पुष्कर, मकराना, पाली, सिरोही, माउंट आबू भी शामिल हैं। राज्य के 60 कस्बे ऐसे हैं, जहां दो दिन में एक बार पानी मिल पाता है। राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के कई गांवों में पानी की चोरी रोकने के लिए ड्रम या पानी की हौज में पानी इक_ा करके उसे ताले में बंद करके रखते हैं। भीलवाड़ा के लोगों का कहना है कि यहां पानी के टैंकर 10-12 दिनों के अंतराल पर आते हैं। पानी का इस इलाके में भारी किल्लत है इसलिए यहां रात के समय में पानी चोरी की घटना को अंजाम दिया जाता है। ऐसे में इनके लिए पानी का महत्व सोने और चांदी से ज्यादा है। जोधपुर के जाजीवाल गांव में दो वर्षों से पानी का घोर संकट है। पानी की कमी के चलते इस गांव में अबतक 300 से ज्यादा जानवरों के प्राण पखेरू हो चुके हैं।

रणथम्भौर नेशनल पार्क में राजबाग पद्म तालाब समेत कई झीलों का पानी तीन-चौथाई खत्म हो चुका है। पानी के मारे रणथम्भौर के वन्य जीव-जंतु अपनी प्यास बुझाने के लिए आसपास के गांव और शहरों तक भटकते हुए पहुंच रहे हैं। रणथम्भौर नेशनल पार्क को 10 जोन में बांटा गया है। इनमें से महज 3 और 4 नंबर जोन में ही वन्यजीवों के लिये थोड़ा बहुत झीलों में पानी बचा रह गया है। इसके अलावा आठ जोन में विचरण करने वाले वन्यजीव पानी की समस्या से बुरी तरह त्रस्त हैं। वन विभाग जानवरों की प्यास बुझाने के इंतजामों का दावा तो कर रहे हैं, लेकिन सच यह है कि ये इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं।


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