समर्थन मूल्य घोषणा मोदी सरकार का नया जुमला : पूर्व सांसद चौधरी

जागरूक टाइम्स 334 Jul 5, 2018

- बोले- चार वर्ष बाद घोषणा, वो भी आने वाली सरकार के भरोसे

बाड़मेर @ जागरूक टाइम्स

एआईसीसी सचिव एवं पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने केन्द्रीय केबिनेट द्वारा आगामी वर्ष के लिए खरीफ की 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की मंजूरी देने को लागत पर पचास प्रतिशत मुनाफे की जुमलेबाजी बताया है। पूर्व सांसद ने कहा कि वर्ष 2014 में चुनावों के समय भारतीय जनता पार्टी एवं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों को उनकी फसल की लागत का पचास प्रतिशत मुनाफा न्यूनतम समर्थन मूल्य के रूप मे देने का वादा किया था, लेकिन चुनावों के चार वर्ष से अधिक समय बाद भी किसान को न तो समर्थन मूल्य मिला है, न ही कर्ज से मुक्ति मिली और ना उसकी मेहनत और परिश्रम की कीमत। यहां तक कि खाद, कीटनाशक दवाइयां, बिजली व डीजल की कीमतों में भी कमी नहीं हुई।

पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से बुधवार को घोषित समर्थन मूल्य किसानों को लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफे की घोषणा को कहीं भी पूरा नहीं कर रहा है। राजस्थान में बहुतायत में होने वाली फसल मूंग का उदाहरण लिया जाए तो 5700 रुपए लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफा कुल 8550 रुपए समर्थन मूल्य होना चाहिए, लेकिन 6975 रुपए तय किया गया है। पूर्व सांसद ने कहा कि सरकार ने वर्ष 2017-18 के लिए कृषि लागत एवं मूल्य आयोग की सिफारिशों को वर्ष 2018-19 के लिए लागू करने की स्वीकृति दी है। जबकि पिछले एक साल में कृषि कार्यों की लागत में भारी वृद्धि हुई है। इस तरह सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है। उन्होंने कहा कि सरकार एक तरफ किसानों के मजदूरी व परिश्रम, खाद बीज, मशीनरी, सिंचाई, जमीन का किराया आदि सबको कृषि लागत में मानकर उसके ऊपर मुनाफा देने का वादा करती है, लेकिन कैबिनेट की नई घोषणा से किसानों के लिए ये सब मोदीजी के जुमले ही नजर आ रहे हैं।

एआईसीसी सचिव हरीश चौधरी ने कहा कि मई 2014 में डीजल की कीमत 56.71 रुपए प्रति लीटर थी और अब ये लगभग 14 रुपए बढ़कर 70 रुपए से उपर हो गई है। खाद की कीमते पिछले छह माह में पचीस प्रतिशत तक बढ़ गई है। इसके अलावा कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले खाद, दवाइयों से लेकर ट्रैक्टर पर देश के इतिहास में पहली बार मोदी सरकार ने टैक्स लगा दिए हैं। इस तरह कृषि लागत लगातार बढ़ती जा रही है। पूर्व सांसद हरीश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सही में मंशा किसानों को लागत एवं पचास प्रतिशत मुनाफा देने की होती तो पिछले चार वर्षों में देश के किसानों को उनकी मेहनत के 20 हजार करोड़ रुपए मिल जाते। 

पूर्व सांसद ने कहा कि केन्द्र सरकार ने चार वर्ष तक किसानों के लिए कुछ नहीं किया और ना ही चुनावी वादों पर अमल किया और अब बड़े राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों एवं दस माह में लोकसभा चुनाव को देखते हुए समर्थन मूल्य की स्वीकृति दी है और ये नई घोषित कीमतें भी अगली सरकार द्वारा दी जाएगी। क्योंकि खरीफ 2019 की फसलें बाजार में आने तक देश में आम चुनाव हो जाएंगे और नई सरकार आ जाएगी। ऐसे में सरकार का यह कदम किसानों को बरगलाने के लिए सोची समझी रणनीति के तहत लिया गया प्रतीत हो रहा है।

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