पश्चिमी सरहद के दरवाजे खुले, पाकिस्तानी रेंजर्स ने रेशमा के लिए पढ़ी दुआ

जागरूक टाइम्स 1928 Jul 31, 2018

- पहली बार विशेष परिस्थति में खुले पश्चिमी सरहद के दरवाजे

- पहली बार जसवंतसिंह गए थे हिंगलाज यात्रा 

- दूसरी बार रेशमा के शव के भारत लाने के लिए सीमा द्वार खोले गए 

दुर्गसिंह राजपुरोहित @ जागरूक टाइम्स

बाड़मेर. पश्चिमी सरहद पर भारत के अंतिम रेलवे स्टेशन मुनाबाव में अभूतपूर्व घटना दर्ज हुई। जब भारतीय नागरिक के लिए दोनों देशों की सरकार ने सरहद के दरवाजे खोल दिए। दरअसल, बाड़मेर जिले के गडरारोड तहसील के अगासडी निवासी 65 वर्षीय रेशमा अपने बेटे व 4 अन्य सदस्यों के साथ पाक में अपने रिश्तेदारों से मिलने गई थी। जहां 24 जुलाई को रेशमा को सामान्य बुखार आया और 25 जुलाई की दोपहर को रेशमा का इंतकाल हो गया। दूरभाष के माध्यम से बाड़मेर रहवासी रेशमा के परिजनों को उसकी मौत की खबर ज्योंही पहुंची। तब से परिजनो का बुरा हाल था वहीं रेशमा के शव को भारत कैसे मंगवाया जाए ये भी उनके लिए बड़ी परेशानी की वजह बना हुआ था।

जिसके बार परिजनो ने पूर्व सांसद और शिव के विधायक कर्नल मानवेन्द्रसिंह जसोल व बाड़मेर जिला कलक्टर शिव प्रसाद मदन नकाते से मामले को लेकर मदद करने की गुहार लगाई थी। मीडिया ने इस मामले को गंभीरता से लेकर प्रकाशित किया वहीं जिला कलक्टर सहित शिव विधायक मामले को लेकर विदेश मंत्रालय सहित पाक स्थित भारतीय दूतावास से लागातार संपर्क में रहे। जिससे आज मंगलवार रेशमा का शव भारत की सरजमीं पर पहुंचा।

गौरतलब है कि इससे पूर्व थार एक्सप्रेस से शव लाने के कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन रेशमा के साथ पाक गए परिजनों की वीजा 28 जुलाई को ही समाप्त हो गई थी। कागजी कार्यवाही पूरी नहीं होने के कारण शव थार एक्सप्रेस से नहीं आ पाया। इस दौरान बीते शुक्रवार को थार एक्सप्रेस खोखरापार में करीब सवा घण्टे रुकी रही। लेकिन, रेशमा के परिजन शव लेकर खोखरापार नहीं पहुंच पाए।

मुनाबाव भारत पाकिस्तान के बीच रेलमार्ग है। सड़क मार्ग से यहां आने वालों में पहली बार पूर्व विदेशमंत्री जसवंतसिंह का नाम है और दूसरी बार मानवता के लिए दोनों देशों ने इस गेट को खोलकर सड़क के रास्ते आने की इजाजत दी है। रेशमा के मामले में जसवंत सिंह के पुत्र शिव विधायक मानवेन्द्रसिंह ने अपने पाकिस्तान के निजी ताल्लुकात से संपर्क साधकर मदद करवाई।


2005 में जसवंसिंह पाकिस्तान के हिंगलाज माता के मंदिर दर्शन को सपरिवार गए थे और उनके साथ श्रद्धालुओं का जत्था था। जसवंसिंह मुनाबाव बार्डर से पाकिस्तान गए थे और उनके पुत्र मानवेन्द्रसिंह अपनी खुद की जीप लेकर गए थे। जसवंसिंह के लिए उस समय मुनाबाव बॉर्डर के गेट खोले गए थे। जसवंतसिंह इसी रास्ते से वापस भारत लौटे थे।

पश्चिमी सरहद के दरवाजे खुले,  पाकिस्तानी रेंजर्स ने रेशमा के लिए पढ़ी दुआ

रेशमा के इंतकाल बाद पाकिस्तान की ओर से 28 जुलाई को थार एक्सप्रेस से ही शव लाने का तय था, लेकिन परिजनों की ओर से वीजा के कागजात पाकिस्तान एम्बेसी में जमा करवा दिए थे। लिहाजा इसमें देरी हो गई। हालांकि थार एक्स्रपेस को भी डेढ़ घंटा रु़कवा दिया गया, लेकिन परिजन पहुंच नहीं पाए। बावजूद इसके हर और से मुहिम को जारी रखा गया और इधर पूर्व सांसद मानवेन्द्रसिंह परिजनों की मदद के लिए सक्रिय रहे। उन्होंने इस्लामाबाद में पाकिस्तान उच्चायोग के अजय बिसारिया, अजीज अहमद खान और जेपीसिंह सहित कई अधिकारियों से संपर्क किया और उनसे सहयोग मांगा। मानवेन्द्र बताते है कि एम्बुलेंस लाने औैर मानवता के इस कार्य में सहयोग करने के लिए पाकिस्तान के अधिकारियों की तारीफ होनी चाहिए।

रेशमा के बेटे को ढाढ़स बंधाया

मानवता की मिसाल बन रही रेशमा के लिए पाकिस्तान में इस वक्त पाक रैंजर्स रेशमा के लिए दुआएं पढ़ रहे हैं। किसी शव को पहली बार भारत को सुपुर्द करने से पहले इन लोगों की संवेदनाएं जुड़ गई है। पाक रैंजर्स ने रेशमा को देश की मिट्टी के साथ जन्नत नसीब होने की दुआएं पढ़ी है। जानकारी के अनुसार शव पाकिस्तान के बॉर्डर पर लाया गया। इससे पहल मीरपुर खास से शव रवाना हुआ तो यहां मौजूद परिजनों के साथ पाकिस्तान के उच्चाधिकारियों ने बड़ी ही संवेदना दिखाते हुए रवानगी से पहले जन्नत नसीब होने के लिए दुआएं मांगी। पाकिस्तान के जीरो लाइन पर इमीग्रेशन के अधिकारी, पाक रैंजर्स और अन्य स्टाफ पहुंचा। इन लोगों ने शव को इज्जत बख्शी। साथ ही रेशमा के बेटे शाहिब को ढाढ़स भी बंधाया है। पाक रैंजर्स की ओर से मुनाबाव रेलवे स्टेशन पर भी दुआएं पढ़ी गई है।

पाकिस्तान में हुए सहयोग की तारीफ

रेशमा का रिश्तेदार फोटेखां बताता है कि पाकिस्तान में 25 जुलाई को चुनाव थे। यहां आवागमन के साधन भी उपलब्ध नहीं थे। कार्यालय बंद थे। ऐसे में रेशमा के निधन के बाद उनको लगा कि अब कैसे भारत पहुंचेंगे। यहां उन्होंने शिव विधायक से संपर्क किया क्यूंकि पाकिस्तान में दफ्तरों में गए तो कोई जवाब नहीं मिल रहा था। अवकाश एवं चुनाव के कारण सभी व्यस्त थे। इस मामले के बाद सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया इसके बाद पाकिस्तान एम्बेसी की ओर उनके पास कॉल गया और कार्यवाही प्रारंभ हुई। एक दिन में ही सारे कागजात तैयार कर दिए गए।

खोला कार्यालय और दिए कागजात

पाकिस्तान एम्बेसी में उनके वीजा के कागजात जमा हो गए थे। इन कागजात के लिए दिक्कत आई कि शुक्रवार को पाकिस्तान में जुम्मे का अवकाश रहता है। शनिवार को थार एक्सप्रेस आनी थी। सुबह कागजात नहीं मिल रहे थे। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने सहयोग किया तो पाकिस्तान एम्बेसी ने उनकी फिर मदद कर दोपहर 2.30 बजे तक कागजात दे दिए। इसमें भी पाकिस्तान के अधिकारियों का सहयोग रहा।

रेल चूकी तो रखा पूरा ख्याल

रेशमा के रिश्तेदारों के मुताबिक थार एक्सप्रेस चूकने के बाद उनको मीरपुर खास में रोक दिया गया। यहां पर तय नहीं था कि अब कैसे जाएंगे। इसके बाद शिव विधायक मानवेन्द्रसिंह के विशेष प्रयास बाद उनको दिलासा दिया गया कि उनका काम हो रहा है। शनिवार से मंगलवार सुबह तक मीरपुर खास में इंतजार किया। सोमवार की शाम को ही संदेश आ गया कि सुबह उनको शव के साथ जाने की इजाजत मिल गई है। इस पर वहां मौजूद सभी अधिकारियों ने मुबारकबाद के साथ ही दुआ की कि जन्नत के साथ घर की मिट्टी नसीब हो जाएगी।

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शव के लिए खुली सरहद

बीते सप्ताह पाकिस्तान में बाड़मेर की महिला की मौत के बाद शव को बाड़मेर लाने के प्रयास किए जा रहे थे। विधायक मानवेन्द्र सिंह और ज़िला प्रशासन के प्रयासों से मुनाबाव रोड रास्ते से शव भारत आ चुका हैं। सिंह ने भारत सरकार और पाकिस्तान से बात कर शव लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई हैं. दुनिया से अलविदा कह चुकी भारतीय रेशमा का शव आज खोखरापार से मुनाबाव होते हुए उसके घर पहुँच गया। बड़ी पेचीदगियां होने के बाद पूर्व सांसद और शिव के विधायक कर्नल मानवेन्द्र सिंह ने खूब प्रयास किये। सड़क मार्ग से शव बाड़मेर के मुनाबाव जीरो पॉइंट पर लाया गया और फ्लैग मीटिंग के बाद सीमा सुरक्षा बल को सौपा गया। इसके बाद शव एम्बुलेंस से रेशमा के गाँव अगासडी रवाना किया गया। इससे पहले भारत की  और से प्रशासनिक अधिकारी , सीमा सुरक्षा बल , विभिन्न सुरक्षा एजेंसियां, इमिग्रेशन, मृतका के परिजन सरहद पर पहुंचे।

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