बाड़मेर : हत्या के मामले में दो को फांसी, तीन अन्य आरोपियों को 7 वर्ष जेल

जागरूक टाइम्स 81 Aug 7, 2018

बाड़मेर @ जागरूक टाइम्स

जिले के रड़वा में बालिका को अपहरण कर दुष्कर्म करने और हत्या करने के मामले में न्यायालय ने दो आरोपियों को फांसी की सज़ा सुनाई है। वहीं अन्य 3 आरोपियों को 7-7 साल के कठोर दंड से दंडित किया है। 

दरअसल, जिले के रड़वा क्षेत्र में अपने घर मे मां और भाई के पास सो रही नाबालिग बालिका का आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह ने अपहरण कर सुनसान जगह ले गए। जहां उसके साथ बलात्कार किया और नाबालिग को पहाड़ी से गिराकर उसकी हत्या कर दी। वहीं अन्य तीन आरोपियों प्रहलादसिंह, नारसींगसिंह व शंकरसिंह ने आरोपी का अपराध छुपाने व और पीड़ित पक्ष पर दवाब बनाने साथ ही आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह का सहयोग किया।  मामले को लेकर मृतका के पिता पर दबाव बनाकर उससे लिखवाकर लिया गया कि उसकी बेटी का मानसिक संतुलन ठीक नहीं था। वहीं पहाड़ी से गिरने से उसकी मौत हो गई, लेकिन मृतका की मां ने अपनी बेटी का अपहरण कर दुष्कर्म करने और फिर हत्या करने का मामला महिला थाने में दर्ज करवाया था। महिला थाने में प्रकरण संख्या32/2013 में दर्ज हुआ। आरोपियों पर धारा 363, 366-क, 376 ए, 376डी, 458, 450, 302, 120बी, 347, 201 भारतीय दंड संहिता एवं 5(G)/6, 19(1)/21 लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 के अंतर्गत मामला दर्ज हुआ। इस प्रकरण की जांच तत्कालीन बाड़मेर पुलिस उपाधीक्षक नाजिम अली खान ने की और एक-एक पहलू को केस से जोड़कर मामले का खुलासा किया।

न्यायालय ने आरोपी घेवरसिंह व श्रवणसिंह को अपराध अंतर्गत धारा 363, 366-क, 376 ए, 376 डी, 458, 450, 302, 120 बी भारतीय दंड संहिता एवं 5(G)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों के संरक्षण अधिनियम 2012 एवं सहयोगी आरोपी प्रहलादसिंह, नरसींगसिंह व शंकरसिंह को धारा347, 201 भारतीय दंड संहिता एवं 19(1)/21लैंगिक अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम2012 के तहत दोषी घोषित किया।

न्यायालय ने दुष्कर्म व ह्त्या के आरोपी घेवरसिंह को धारा 363 भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए 7 वर्ष का कठोर कारावास एवं 25 हज़ार रुपए आर्थिक दंड से दंडित किया। वहीं आर्थिक दंड अदा ना करने पर 6 माह का अतिरिक्त कारावास, धारा366-क में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25हज़ार रुपये आर्थिक दंड व आर्थिक दंड अदा ना करने पर 6 महीने का अतिरिक्त कारावास, धारा376ए, 302, भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए मृत्युदंड से दंडित किया और आदेशित किया कि आरोपी को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाए। वहीं आरोपी घेवरसिंह को अपराध के लिए 50 हज़ार रुपए के आर्थिक दंड से दंडित किया गया।  धारा120बी भारतीय दंड संहिता में मृत्युदंड व 25हज़ार रुपए आर्थिक दंड, धारा 5(G)/6 लैंगिग अपराधों से बालको का संरक्षण अधिनियम 2012में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार रुपए आर्थिक दंड से दंडित किया गया।

आरोपी श्रवणसिंह को धारा 363 में दोषी मानते हुए 7 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार का आर्थिक दंड, धारा 366-क में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार का आर्थिक दंड, धारा376ए भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए मृत्युदंड से दंडित किया गया और आदेशित किया गया कि अभियुक्त को फांसी लगाकर तब तक लटकाया जाए जब तक उसकी मृत्यु ना हो जाए। वहीं अभियुक्त को धारा 376डी भारतीय दंड संहिता में आजीवन कारावास व 50 हज़ार का आर्थिक दंड, धारा 458 में 10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार का आर्थिक दंड, धारा 450में 10 वर्ष का कारावास, धारा 302 में मृत्युदंड व50 हज़ार रुपए आर्थिक दंड, धारा 120 में मृत्युदंड व 25 हज़ार आर्थिक दंड, धारा 5(G) में10 वर्ष का कठोर कारावास व 25 हज़ार आर्थिक दंड की सजा सुनाई गई।

अन्य तीन आरोपियों प्रहलादसिंह, नारसींगसिंह व शंकरसिंह को धारा 347 भारतीय दंड संहिता में दोषी मानते हुए 3-3 वर्ष का कठोर कारावास व प्रत्येक को 5-5 हज़ार रुपए का आर्थिक दंड, धारा201 में 7-7 वर्ष का कारावास व 10-10 हज़ार का आर्थिक दंड, धारा 19(1)/21 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में 6-6 माह का कारावास व 2-2 हज़ार का आर्थिक दंड से दंडित किया गया।

104 पन्नों में फैसला

विशिष्ट न्यायाधीश, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण प्रकरण) एवं पोक्सो मामलात में न्यायाधीश वमिता सिंह ने इस प्रकरण को रेयरेस्ट केस मानते हुए इसे मानवीयता को शर्मसार करने वाली घटना बताया हैं, जिसमेंं उन्होंने बाड़मेर पुलिस की जांच को पुख्ता मानते हुए पीडिता के पक्ष में फैसला देते हुए आरोपियों को मृत्युदंड दिया है।

सजा मिली, ख़ुशी है

इस प्रकरण की जांच मेरे द्वारा गम्भीरता से की गई थी, तत्कालीन एसपी राहुल बारहठ के नेतृत्व में हमने प्रकरण की हर बारीकी से पड़ताल की थी। आज न्यायालय के फैसले के बारे में सुनकर ख़ुशी मिली।

- नाजिम अली खान, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (केस के जांच अधिकारी)

न्यायालय ने न्याय दिया

पीड़िता के परिजनों के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता करना राम चौधरी के मुताबिक पांच साल तक कोर्ट के ट्रायल के बाद फैसला न्याय के पक्ष में आया है। यह फैसला नजीर बनेगा। 

विशिष्ठ लोक अभियोजक सवाई महेश्वरी ने भी न्यायालय के फैसले को न्याय के पक्ष में बताते हुए कहा कि मृतका के साथ हुए अपराध के बाद पुलिस की जांच और न्यायपालिका का साथ न्यायप्रिय रहा।

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