बुनियादी जरूरतों से महरूम, नीयती के मारे ये परिवार...

जागरूक टाइम्स 344 Jul 9, 2018

- राशन कार्ड, जॉब कार्ड, भामाशाह कार्ड, वोटर कार्ड, पानी, बिजली, शौचालय सहित कई जनकल्याणकारी योजनाओं से वंचित

धोरीमन्ना @ जागरूक टाइम्स

रहने को घर नहीं, सोने को बिस्तर नहीं, अपना खुदा है रखवाला... फिल्मी गीत की ये पंक्तियां क्षेत्र के मीठड़ा खुर्द गांव में सात घूमंतू परिवारों पर सटीक बैठती है। जब धरती से लोग हवा में उडऩे लगे हैं, वैज्ञानिक अंतरिक्ष में परचम लहराने लगे हैं, जीवन रक्षक दवाओं से वीआईपी लोगों की जान बचाई जाने लगी है। तब उसी देश में बहुसंख्यक परिवार झुग्गी झोपड़ी में रोजी-रोटी के लिए नारकीय जीवन जीने को मजबूर है। कमोबेश ऐसा ही हाल है कि उपखंड क्षेत्र के मीठड़ा खुर्द गांव में सात घूमंतू परिवारों का।

ये सात परिवार गांव के समीप ही कच्चे आशियाने बनाकर पिछले सात साल से नारकीय जीवन जीने को विवश है। इन परिवारों को राशन कार्ड, जाब कार्ड, वोटर लिस्ट मे नाम जुड़वाने, भामाशाह कार्ड, शिक्षा, शौचालय बनाने के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से चलाई जा रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी इन्हें कोई लाभ नही मिल रहा है। इन परिवारों के लिए चाहे गर्मी हो या सर्दी, बारिश हो या तुफान हो, झुग्गी झोंपडों में जीवन यापन करने वाले ये परिवार सरकार की हर सुविधाओं से वंचित है। ऐसे में जिदंगी इनका इम्तिहान ले रही है, लेकिन इनकी तरफ किसी जनप्रतिनिधि का ध्यान नहीं है। 

एक-एक परिवार में कई बच्चे हैं। शिक्षा और मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर ये परिवार खुले आसमान के नीचे ही रात गुजार रहे हैं। सरकारी स्तर पर क्या सुविधा मिल सकती है और इसके लिए कहां जाना पड़ेगा, इसके बारे में इन लोगों को कुछ नहीं मालूम। इन गरीब परिवारों के लिए कोई साधन सम्पन्न परिवार दान की नीयत से इनको जरूरत के कपड़े या खाने का कुछ सामान दे दे तो उसी को यह अपनी दिवाली समझते हैं।

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