एक पहल ने बदल दी गोचर भूमि की सूरत, लहलहाने लगे हजारों पेड़-पौधे

जागरूक टाइम्स 215 Jul 9, 2018

- मीठड़ा खुर्द गांव में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं हजारों पेड़-पौधे

धोरीमन्ना @ जागरूक टाइम्स

उपखंड मुख्यालय से सात किलोमीटर दूर मीठड़ा गांव मे लहलहाते हजारों पेड़-पौधे पर्यावरण संरक्षण की इबारत लिख रहे हैं। गांव की इस गोचर जमीन पर हरियाली नजर नहीं आती थी, लेकिन करीब पन्द्रह साल पूर्व वन विभाग की ओर से किए गए वृक्षारोपण ने यहां की फिजा ही बदल दी। अब चारों तरफ हरितिमा से आच्छादित यह क्षेत्र प्रकृति की शोभा बढ़ा रहा है। इस बार प्री मानसून की पहली बारिश के बाद अब यहां हर तरफ हरियाली नजर आ रही है। गांव को हरे पेड़-पौधो ने पूरी तरह आगोश में ले लिया है। लगभग तीन किलोमीटर के क्षेत्रफल में घने पेड़ होने से ना केवल तीक्ष्ण धूप में भी छांव ही रहती ह, बल्कि सवेरे से शाम तक मौसम भी काफी सुहावना और खुशनुमा बना रहता है।

यहां बबूल, खेजड़ी, बोरड़ी के पेड़ों की संख्या बहुतायत है और यहां विचरण करने वाले सैकड़ों वन्यजीवों एवं पशु-पक्षियों के लिए हमेशा इन पेड़ों पर ही निर्भर है। यहां अंकुरित फल पक्षियों के लिए मुख्य आहार है। गांव के स्थानीय निवासी एवं विश्नोई टाईगर फोर्स वन्यजीव व पर्यावरण संस्था के जिला प्रभारी भंवरलाल विश्नोई इन पेड़ों के लिए लगातार संघर्षरत है। लिहाजा, यह पेड़-पौधे कटाई होने से बचे हुए हैं। यहां पर रात्रि के समय सैकड़ों वन्यजीव चिंकारा, मोर, खरगोश, लोमड़ी सहित अनेक प्रजातियां विचरण करते आसानी से नजर आती हैं। इनके रेन बसेरा के लिए भी उपयुक्त जगह है।

इनका कहना है

पेड़-पौधे सिर्फ मनुष्य के लिए ही नहीं, बल्कि वन्यजीवों के लिए भी उपयोगी है। यहां कई पशु-पक्षियों का रहवास है। वहीं पेड़-पौध इन्हें आहार भी प्रदान करते हैं। पेड़ अमूल्य धरोहर है और हमें इन्हे काटना नहीं चाहिए। पेड़ हमारे सच्चे मित्र है। हमे इनकी रक्षा करनी चाहिए।

- भंवरलाल भादू विश्नोई, जिला प्रभारी, टाइगर फोर्स वन्यजीव एवं पर्यावरण संस्था, बाड़मेर

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