इतिहास में दूसरा बाद खुलेगा भारत-पाकिस्तान सीमा का द्वार, यह है वजह...

जागरूक टाइम्स 294 Jul 31, 2018

- महरूम रेशमा का शव भारत लाने के लिए खुलेगी मुनाबॉव बॉर्डर की तारबंदी

बाड़मेर @ जागरूक टाइम्स

भारत और पाकिस्तान के बीच में साढ़े ग्यारह सौ किलोमीटर लंबी पश्चिमी सीमा का सीमा द्वार इतिहास में दूसरी बार खुलने जा रहा है, लेकिन यह मानवीयता की दृष्टि से देखें तो दोनों देश को भी बेहतरीन पहल भी है क्यूंकि इस बार शव लाने को तारबंदी खुलेगी। पहली बार भारत और पाकिस्तान के बीच में सीमा द्वार जसवंतसिंह की पाकिस्तान यात्रा के दौरान खुला था जो करीब 13 साल पहले की घटना है, लेकिन इस बार एक भारतीय नागरिक के शव को मादरेवतन लाने के लिए यह रास्ता खोला जा रहा है। इसके लिए पाकिस्तान सरकार ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं और दिशा निर्देश जारी किए हैं।

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दरअसल, बाड़मेर से होकर निकलने वाली थार एक्सप्रेस दो देशों के नागरिकों के दिलों को मिलाने का काम कर रही है। इसी ट्रेन के माध्यम से बाड़मेर जिले की एक महिला रेशमा पाकिस्तान स्थित अपने रिश्तेदारों के घर मिलने के लिए गई थी, लेकिन वहां उसकी मौत हो गई। भारत-पाकिस्तान में रेशमा के रिश्तेदारों ने भी प्रयास किए कि शव भारत पहुंचे, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो पाए तब रेशमा के परिजनों ने बाड़मेर की पूर्व सांसद और शिव विधानसभा से विधायक कर्नल मानवेंद्रसिंह संपर्क किया। कर्नल मानवेंद्रसिंह ने पाकिस्तान में अपने संबंधों का अच्छी तरह इस्तेमाल किया और रेशमा के शव को वापस भारत लाने में मुख्य भूमिका निभाई।

मानवेंद्र सिंह ने पहले पाकिस्तान स्थित भारतीय दूतावास ने संपर्क किया साथ ही उन्होंने सिंध सूबे के लोकल प्रशासन से भी संपर्क साधा। मानवेंद्र सिंह ने दूरभाष पर जागरूक टाइम्स से बात करते हुए बताया कि यह सभी तरह के प्रयासों की सफलता है। हालांकि पहले पाकिस्तान में मृतका रेशमा के परिजनों ने मामला थोड़ा सा कन्फ्यूजन में डाल दिया था, लेकिन बाद में मामले को गंभीरता से दोनों देशों ने देखा और शव वापस लाने के प्रयास सफल साबित हुए। उन्होंने कहा कि यह खुशी की बात है कि भारतीय नागरिक के शव को सड़क मार्ग से वापस लाने की कोशिश रंग लाई।


शव एंबुलेंस से भारत पहुंचेगा

अब सात दिन पूर्व पाकिस्तान में बुखार से रेशमा की मौत के बाद मंगलवार को शव एंबुलेंस से भारत पहुंचेगा। वर्ष 1992 में तारबंदी के बाद पहली बार पाकिस्तान से शव को भारत लाने के लिए मुनाबाव बॉर्डर खुलेगा। खोखरापार -मुनाबाव बॉर्डर से शव एंबुलेंस से भारत पहुंचेगा। इधर, सात दिनों से परिजन लगातार रेशमा के शव को भारत लाने की मांग पर अड़े थे। 

यह है मामला

गत 30 जून को गडरारोड के आगासड़ी निवासी रेशमा पत्नी राणा खां अपनी बहन और बेटी से मिलने के लिए थार एक्सप्रेस से पाकिस्तान गई थी। पाकिस्तान के छिपरा तहसील के मथुनचानिया गांव में 25 जुलाई को बुखार आने से रेशमा की मौत हो गई। 27 जुलाई को थार एक्सप्रेस से शव भारत लाने की तैयारी थी, लेकिन पाक से शव को रवाना नहीं किया गया। अब सात दिन बाद रेशमा के शव को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उम्मीद जगी है। मंगलवार को सुबह 11.30 बजे मीरपुर खास से रेशमा का शव एंबुलेंस से मुनाबाव तक लाया जाएगा। इसके बाद भारतीय एंबुलेंस से शव रेशमा के गांव तक पहुंचाया जाएगा। शिव विधायक मानवेंद्रसिंह जसोल की ओर से लगातार शव को भारत लाने के प्रयास किए जा रहे थे। इधर, कलेक्टर शिवप्रसाद नकाते की ओर से भी नई दिल्ली और पाकिस्तान में अधिकारियों से वार्ता कर कागजी कार्रवाई पूरी करवाई गई। 

वर्ष 1992 के बाद पहली बार खुलेगी मुनाबाव बॉर्डर की तारबंदी

वर्ष 1992 में भारत-पाक से सटे मुनाबाव बॉर्डर समेत पूरे प्रदेश के अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर तारबंदी की गई थी। इससे पहले सड़क मार्ग से भारत-पाक के बीच आवागमन होता था। थार एक्सप्रेस के शुरू होने के बाद सड़क मार्ग बंद हो गया। वर्तमान में भारत-पाक जवानों के बीच फ्लैग मीटिंग के दौरान ही सड़क मार्ग का गेट खुलता है। दोनों देशों के अधिकारी सड़क मार्ग से एक-दूसरे देश में जाते हैं। यह पहली बार है कि वीजा पर बहन-बेटी से मिलने गई बाड़मेर के गडरारोड निवासी महिला की मौत के बाद उसका शव एंबुलेंस से मुनाबाव सड़क मार्ग के रास्ते भारत लाया जा रहा है। इससे पूर्व थार एक्सप्रेस को भी शव के लिए एक घंटे रोका गया था। वीजा खत्म हो जाने के कारण शव को रवाना नहीं किया जा सका।

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