बाड़मेर : पहली बार अनुसूचित जनजाति की युवती की निकली घोड़ी पर बंदोली

जागरूक टाइम्स 1276 Jun 29, 2018

धोरीमन्ना @ जागरूक टाइम्स

सिर्फ परिवार का सहयोग एवं खुद की जिद, इन सबके बीच नजदीकी रिश्तेदार तथा पारिवारिक सदस्यों ने भी छोटा-मोटा विरोध किया। लेकिन, आखिर युवती की जिद के आगे किसी की एक नहीं चली और घोड़ी पर सवार बैंड-बाजे के साथ दलित बेटी की बंदोली निकली, जो पूरे जिले भर में चर्चा का विषय बनी रही।

धोरीमन्ना कस्बे में लोग इस बंदोली को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे। किसी ने इसे ठीक नहीं समझा तो कई लोग बालिका की जिद की तारीफ करते नजर आए। लड़की की बंदोली वो भी घोड़ी पर, कस्बेवासियों को यह पहली बार देखेने को मिला। वहीं कस्बे भर के लोगों सहित अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों को खुशनुमा पल देखने को मिला। गौरतलब है कि बाड़मेर जिले भर में बिजली वाघेला पहली दलित युवती है, जिसने पुरानी रूढि़वादी परम्पराओं और रीतियों को लांघते हुए दलित समाज सहित अन्य के लिए एक नई मिसाल कायम की है। ज्ञात रहे कि यह युवती धोरीमन्ना पंचायत समिति के प्रगति प्रसार अधिकारी हेमाराम वागेला की बेटी है तथा बालिका वन विभाग में सिपाही के पद पर धोरीमन्ना में कार्यरत है। दलित समाज के ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी लड़की की बंदोली घोड़ी पर सवार होकर निकाली गई है। ऐसे में धोरीमन्ना पंचायत समिति के पूरे क्षेत्र में इस परिवार ने युवती को घोड़ी पर बिठाकर बिंदोली निकालकर एक समाज में मिसाल पेश की है।

सरकार भी बलिकाओं को कर रही प्रोत्साहित
वर्तमान परिदृश्य में बालिका शिक्षा एवं नारी उत्थान के लिए सरकार भी विभिन्न प्रकार के महिला कल्याण के कार्यक्रम चलाकर उनको प्रोत्साहित करने के लिए कार्य कर रही है। ऐसे में जब बेटी कामयाब होकर पढ़ लिखकर एवं नौकरी करने के बाद शादी करती है तो उसके खुद के भी कुछ सपने होते हैं। उन सपनों को साकार करने के लिए उनके परिवार के लोग और समाज के लोगो को आगे आकर साथ देना चाहिए। आज इस पहल को धोरीमन्ना क्षेत्र के लोगों ने चरितार्थ किया।

रूढि़वादी रीतियों से कहीं आगे निकल चुकी हैं बेटियां
आज की बेटियां रूढि़वादी रीतियों और परम्पराओं से कहीं आगे निकल चुकी है। प्राइवेट जॉब के साथ कई बेटियां सरकारी नौकरियों में बेटों के बराबर दर्जे पर कार्य कर रही हैं। ऐसे में बेटियां बेटों से कतई काम नहीं हैं। गौरतलब है कि राजस्थान के कई जिले ऐसे हैं जहां पुराने रूढि़वादी विचार एवं परम्पराएं आज भी चली आ रही है। जहां दलित समुदाय पर आज भी अत्याचार के खबरें सामने आती रही है। जहां शादी के दौरान दलित बेटों को भी सामंतवादी लोगों द्वारा घोड़ी पर सवार नहीं होने दिया जाता। ऐसे में बदलते परिवेश में बालिका ने घोड़ी पर बंदोली निकालकर एक नई मिसाल कायम की है। जिससे बेटियों में एक सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और बेटियां अपने सपनों को देखकर उन्हें साकार करने की कोशिश करेगी।

लड़कियां लड़कों से कम नहीं

हम लड़कियां भी लड़कों से कम नही हैं। जितनी मेहनत करके लड़के जीवन में आगे बढऩे के सपने देखते है। उससे अधिक हम मेहनत करके आगे बढ़ रहे हैं।

-बिजली वागेला, दुल्हन

सफलता की सीढ़ी तैयार कर रही है

आज दलित समाज की लड़कियां अपनी सफलता की सीढ़ी खुद तैयार कर रही हंै। प्रत्येक क्षेत्र में लड़कियां लड़कों से आगे निकलने का प्रयास कर रही है। क्षेत्र में आज हर जगह बिजली की चर्चा हो रही है।

-बाबूलाल सियाक, सामाजिक कार्यकर्ता

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